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सेवानिवृत्ति के बाद अमरूद की खेती से लाखों का कमा रहा इंजीनियर
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फोटो-33 गोंडा के करनैलगंज के कुरथा गांव मे अमरुद दिखाते सेवानिवृत्त इंजीनियर राम नारायण सिंह। संव
- फोटो : GONDA
करनैलगंज (गोंडा)। सच्ची लगन व मेहनत से किया गया कार्य कभी निष्फल नहीं होता। रेलवे से सेवानिवृत्त हुए एक इंजीनियर ने इसे सही साबित कर दिखाया है। अवकाश प्राप्ति के बाद घर पर आराम करने की जगह उन्हें अमरूद की खेती करना रास आया। उन्होंने आधुनिक तकनीक का समावेश कर सपोर्ट क्वालिटी के अमरूद की खेती कर बागवानी से ही घर बैठे लाखों की कमाई कर सभी के सामने एक मिसाल कायम की।
करनैलगंज की ग्राम पंचायत कुर्था निवासी राम नारायन सिंह दिल्ली के रेल विभाग से सेक्शन इंजीनियर के पद से वर्ष 2001 में अवकाश प्राप्त किया था। इसके बाद कुछ समय बिताने के बाद उनके मन में आधुनिक विधि से खेती करने का ऐसा जज्बा पैदा हुआ कि उन्होंने गांव पहुंचकर गुलाब व गेंदा के फूलों की खेती शुरू कर दी। इसी दौरान गन्ना विभाग में पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत छोटे पुत्र डॉ. प्रमोद सिंह की मदद से उन्होंने छत्तीसगढ़ में बीएनआर कंपनी द्वारा तैयार किए गए बीएनआर पिजी थाईलैंड की वन केजी अमरूद की ग्राफ्टेड प्लांट के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद अक्टूबर 2019 में एक एकड़ में अमरूद की पैदावार लगायी। एक वर्ष के अंदर ही पौध फल देने के लिए तैयार हो गए। मगर उनके ग्रोथ को देखते हुए पेड़ में आए सभी फूल तोड़ दिए गए।
इंजीनियर राम नारायन बताते हैं कि मौजूदा समय में सभी पौधों में फल लगे हैं। इसमें कोमनेट या पॉलीथिन बंधी है। यह सपोर्ट क्वालिटी का अमरूद है। पौध के ग्रोथ को देखते हुए हर दो साल में प्रत्येक पौध से 15 से 25 फल प्राप्त किए जा सकते हैं। तोड़ने के समय इनका वजन 600 ग्राम से एक किलोग्राम तक होता है। खास बात यह है कि अमरूद पेड़ से अपने आप टूटकर नहीं गिरते। तोड़ने के बाद 20 से 25 दिन तक इसे घर में रखा जा सकता है। बड़े शहरों में इसकी मांग ज्यादा होने से यह आसानी से 100 से 150 रुपया प्रति किलोग्राम तक बिक जाते हैं। बताया कि इस बार तीन लाख तक की कीमत का अमरूद तैयार होगा। अमरूद की इस किस्म के एक एकड़ में 500 पौधे लगाकर सीजन में बिना किसी परेशानी के लाखों की कमाई की जा सकती है। संवाद
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करनैलगंज की ग्राम पंचायत कुर्था निवासी राम नारायन सिंह दिल्ली के रेल विभाग से सेक्शन इंजीनियर के पद से वर्ष 2001 में अवकाश प्राप्त किया था। इसके बाद कुछ समय बिताने के बाद उनके मन में आधुनिक विधि से खेती करने का ऐसा जज्बा पैदा हुआ कि उन्होंने गांव पहुंचकर गुलाब व गेंदा के फूलों की खेती शुरू कर दी। इसी दौरान गन्ना विभाग में पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत छोटे पुत्र डॉ. प्रमोद सिंह की मदद से उन्होंने छत्तीसगढ़ में बीएनआर कंपनी द्वारा तैयार किए गए बीएनआर पिजी थाईलैंड की वन केजी अमरूद की ग्राफ्टेड प्लांट के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद अक्टूबर 2019 में एक एकड़ में अमरूद की पैदावार लगायी। एक वर्ष के अंदर ही पौध फल देने के लिए तैयार हो गए। मगर उनके ग्रोथ को देखते हुए पेड़ में आए सभी फूल तोड़ दिए गए।
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इंजीनियर राम नारायन बताते हैं कि मौजूदा समय में सभी पौधों में फल लगे हैं। इसमें कोमनेट या पॉलीथिन बंधी है। यह सपोर्ट क्वालिटी का अमरूद है। पौध के ग्रोथ को देखते हुए हर दो साल में प्रत्येक पौध से 15 से 25 फल प्राप्त किए जा सकते हैं। तोड़ने के समय इनका वजन 600 ग्राम से एक किलोग्राम तक होता है। खास बात यह है कि अमरूद पेड़ से अपने आप टूटकर नहीं गिरते। तोड़ने के बाद 20 से 25 दिन तक इसे घर में रखा जा सकता है। बड़े शहरों में इसकी मांग ज्यादा होने से यह आसानी से 100 से 150 रुपया प्रति किलोग्राम तक बिक जाते हैं। बताया कि इस बार तीन लाख तक की कीमत का अमरूद तैयार होगा। अमरूद की इस किस्म के एक एकड़ में 500 पौधे लगाकर सीजन में बिना किसी परेशानी के लाखों की कमाई की जा सकती है। संवाद
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