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Gonda News: घोटाले की रकम लौटाने के समझौतों की हो रही पड़ताल
Sun, 14 Jun 2026 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:05 PM IST
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गोंडा। इंडियन बैंक इंप्लाॅइज क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में 3.60 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब नए सिरे से शुरू हो गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद नगर कोतवाली पुलिस ने मामले से जुड़े दस्तावेज, शिकायतें, जांच रिपोर्ट और घोटाले की रकम लौटाने के लिखित समझौतों की पड़ताल शुरू कर दी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार विवेचना में सबसे पहले वादी मुकदमा और सोसाइटी के सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव से विस्तृत साक्ष्य लिए जाएंगे। इसके अलावा बैंक प्रबंधन, सोसाइटी के पूर्व पदाधिकारियों तथा पहले की शिकायतों की जांच करने वाले अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई जाएगी। रोडवेज चौकी प्रभारी एवं विवेचक सोनू कुमार ने बताया कि वादी मुकदमा फिलहाल बाहर हैं। उनके आने के बाद बयान दर्ज कराए जाएंगे और उपलब्ध अभिलेखों का गहन परीक्षण किया जाएगा।
मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार वर्ष 1997 से 2020 के बीच सोसाइटी की तीन करोड़ 60 लाख 16 हजार रुपये की धनराशि के गबन का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि ब्याज जोड़ने पर यह राशि बढ़कर 4.90 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। आरोप यह भी है कि अनियमितताओं का पता चलने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने हिस्से की धनराशि ब्याज सहित जमा करने का लिखित आश्वासन दिया था लेकिन बाद में ऐसा नहीं किया।
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पुलिस यह भी पता लगाएगी कि सोसाइटी और बैंक स्तर पर पहले कितनी शिकायतें हुईं? उनकी जांच किस स्तर पर हुई? और उन जांचों में क्या निष्कर्ष निकले? यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई और आरोपियों से धनराशि वसूली के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार विवेचना में सबसे पहले वादी मुकदमा और सोसाइटी के सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव से विस्तृत साक्ष्य लिए जाएंगे। इसके अलावा बैंक प्रबंधन, सोसाइटी के पूर्व पदाधिकारियों तथा पहले की शिकायतों की जांच करने वाले अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई जाएगी। रोडवेज चौकी प्रभारी एवं विवेचक सोनू कुमार ने बताया कि वादी मुकदमा फिलहाल बाहर हैं। उनके आने के बाद बयान दर्ज कराए जाएंगे और उपलब्ध अभिलेखों का गहन परीक्षण किया जाएगा।
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मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार वर्ष 1997 से 2020 के बीच सोसाइटी की तीन करोड़ 60 लाख 16 हजार रुपये की धनराशि के गबन का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि ब्याज जोड़ने पर यह राशि बढ़कर 4.90 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। आरोप यह भी है कि अनियमितताओं का पता चलने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने हिस्से की धनराशि ब्याज सहित जमा करने का लिखित आश्वासन दिया था लेकिन बाद में ऐसा नहीं किया।
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पुलिस यह भी पता लगाएगी कि सोसाइटी और बैंक स्तर पर पहले कितनी शिकायतें हुईं? उनकी जांच किस स्तर पर हुई? और उन जांचों में क्या निष्कर्ष निकले? यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई और आरोपियों से धनराशि वसूली के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए।