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Bahraich: सर्विस रोड के 45.13 करोड़ हड़पने में 15 अफसर फंसे, तीन सदस्यीय टीम की जांच में खुलासा

Wed, 03 Aug 2022 06:13 PM IST
लखनऊ ब्यूरो तेज प्रताप सिंह,गोंडा
तेज प्रताप सिंह,गोंडा Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 03 Aug 2022 06:13 PM IST
सार

श्रावस्ती जिले के सिंचाई विभाग में 45.13 करोड़ रुपये के काम में हुए घोटाले में 15 अफसर फंस गए हैं। मामले का खुलासा तीन सदस्यीय जांच में हुआ है।

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श्रावस्ती में सरयू नहर खंड की राप्ती मुख्य नहर का बैराज। - फोटो : amar ujala

विस्तार

देवीपाटन मंडल में श्रावस्ती जिले के सिंचाई विभाग में 45.13 करोड़ रुपये के काम में बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया है। मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद मंडलायुक्त ने 15 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव सिंचाई को भेज दी है। इनमें दो अधिशासी अभियंता, चार सहायक अभियंता व नौ अवर अभियंता शामिल हैं। मामले की शिकायत श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राम फेरन पांडेय ने मुख्यमंत्री से की थी जिसकी जांच कराने के आदेश हुए थे।

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बहराइच जिले के सरयू नहर खंड तीन का कार्य क्षेत्र श्रावस्ती भी है। इसी के कार्य क्षेत्र में राप्ती मुख्य नहर में शून्य से 0.450 किमी. व 6.600 से 21.00 किमी. के 9.620 पर स्थित तीन साइफन पर गुणवत्ता विहीन बोल्डर व लाइनिंग कार्यों की जांच कराए बिना ही अधिशासी अभियंता राकेश कुमार पर ठेकेदार को फर्जी भुगतान करने का आरोप है। किमी. 14.680 पर दूसरे साइफन पर सैंड फिलिंग का काम कराए बिना फर्जी भुगतान किया गया।18.650 किमी. पर स्थित तीसरे साइफन पर दलदल में काम कराया गया, जिसमें डिवाटरिंग करके सूखा दिखाया और फर्जी भुगतान किया गया।
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समस्त बाउचर का भुगतान बिना जीएसटी के हुआ। राप्ती नहर मुख्य शाखा से निकलने वाले परसोहना माइनर, चौबेपुरवा प्रथम व द्वितीय, बैरिहवा व बनकटवा माइनरों पर कराए गए पक्के कार्य बीआरबी, पीआरबी व साइफन पर घोर अनियमितता की गई है।
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अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने राप्ती मुख्य नहर पर डौला, सर्विस रोड आदि बिना सही कराए व बिना सहायक अभियंता के हस्ताक्षर के ही बाउचर पास कराकर ठेकेदार को तीन करोड़ 98 लाख 69 हजार 579 रुपये का भुगतान किया। सहायक अभियंता द्वितीय के पत्र से पूरी तरह स्पष्ट है कि अधिशासी अभियंता द्वारा पद का दुरुपयोग कर गैरकानूनी ढंग से लाभ प्राप्त किया जा रहा है और लाभ पहुंचाया जा रहा है।

विधायक ने राकेश कुमार के कार्यकाल वर्ष 2019-20, 2020-21 व 2021-22 में कराए गए काम व किए गए करोड़ों के भुगतान की जांच कराने की मांग की। (संवाद)

माइनरों में नहीं बनाया सेक्शन, हो गया भुगतान
आयुक्त एमपी अग्रवाल ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त राजेंद्र प्रसाद, अधीक्षण अभियंता ड्रेनेज मंडल गोंडा अरुण कुमार व मंडलीय संपरीक्षा प्रकोष्ठ के प्राविधिक परीक्षक इं. अमित कुमार चौधरी को जांच का जिम्मा सौंपा। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अधिकांश साइफन, माइनर्स के पक्के कार्यों में रफनेस व फिनिशिंग की कमी मिली। लगभग सभी माइनरों का सेक्शन नहीं बनाया गया मौके पर मात्र एल सेक्शन के अनुसार खोदाई की बात सामने आई।

इसी प्रकार राप्ती मुख्य नहर के अर्दन सेक्शन के विभिन्न कंपोनेंट बर्म, डौला व सर्विस रोड ड्रेसिंग व लेवलिंग कर नहीं बनाए गए। जांच टीम के अनुसार, सरयू नहर खंड तीन के अंतर्गत आने वाली राप्ती मुख्य नहर की रीच पूर्णत: कटिंग कर बनाई गई है। नहर से निकाली गई मिट्टी सर्विस रोड के किनारे डाल देने से बड़े-बड़े ढेर बन गए। अर्थ वर्क का भुगतान पिट मेजरमेंट से किया गया, जबकि नहर सेक्शन बनने के बाद लेवल डिफरेंस से मिट्टी की गणना कर भुगतान किया जाना चाहिए था।


अधिशासी अभियंता ने 25 साल के कार्यकाल में विभिन्न अनुबंधों पर 45. 13 करोड़ का भुगतान किया। जांच टीम को व्यय की सूची नहीं उपलब्ध कराई। जांच टीम ने संपूर्ण भुगतान का वर्षवार ब्योरा न उपलब्ध कराने के कारण वास्तविक भुगतान की स्थिति स्पष्ट न होने पर राकेश कुमार के कार्यकाल के कार्यों की अलग से विस्तृत जांच की संस्तुति की। जांच अफसरों ने अनियमितता व घोटाले के लिए अधिशासी अभियंता राकेश कुमार व बीके यादव, सहायक अभियंता रमेश चंद्र प्रसाद, सौरभ सिंह, अनुपम सिंह व राना प्रताप यादव और अवर अभियंता सुरेंद्र कुमार गुप्ता, रवि कुमार, अश्वनी कुमार, गोविंद, विनोद कुमार गौड़, धीरेंद्र प्रताप सिंह, सूर्य प्रकाश यादव, सोनम वर्मा व प्रियंका वर्मा को दोषी मानते हुए सभी के विरुद्ध कार्यवाही की संस्तुति की।

शिकायत की जांच में अनियमितता मिली है, जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन के आदेश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। एमपी अग्रवाल, आयुक्त देवीपाटन मंडल

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