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घपले की जांच को 11 सदस्यीय टीम
Gonda
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोंडा। प्रधान डाकघर में फर्जी खाता खोलकर एक लिपिक द्वारा एक लाख रुपये निकालने के मामले की जांच कर रही टीम से गोरखपुर के पोस्टमास्टर जनरल ने जानकारी हासिल की। जांच धीमी गति से होने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने जांच 11 सदस्यीय टीम को सौंपी है। टीम को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देनी है।
सिविल लाइंस स्थित प्रधान डाकघर में तैनात एक लिपिक ने अपने नाम से ही फर्जी खाता खोलकर 1 लाख 1 हजार 78 रुपये का भुगतान ले लिया था। मामला सामने आने पर संबंधित लिपिक अक्षय कुमार को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम लगाई गई थी, जो अभी पड़ताल कर रही है। इस संबंध में ‘अमर उजाला’ ने 18 अक्तूबर के अंक में ‘फर्जी खाता खोल लिपिक ने हड़पे एक लाख रुपये’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद संबंधित लिपिक के गृह जनपद बाराबंकी के डीएम को डाक विभाग ने पत्र भेजकर उसकी संपत्ति पर नजर रखने का अनुरोध किया था। शुक्रवार को प्रधान डाकघर पहुंचे गोरखपुर के पोस्टमास्टर जनरल अनिल कुमार ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। जांच कर रहे अफसरों से जानकारी ली, जिसमें चौंकाने वाली बात सामने आई है। रकम एक लाख से बढ़कर लाखों रुपये तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, कोई भी अधिकारी इस बाबत कुछ बताने को तैयार नहीं है। उधर, जांच की धीमी गति को देखते हुए पीएमजी ने अब मामले की जांच के लिए विभाग की 11 सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें 6 सदस्य स्थानीय व 5 अन्य जिलों के शामिल हैं।
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सिविल लाइंस स्थित प्रधान डाकघर में तैनात एक लिपिक ने अपने नाम से ही फर्जी खाता खोलकर 1 लाख 1 हजार 78 रुपये का भुगतान ले लिया था। मामला सामने आने पर संबंधित लिपिक अक्षय कुमार को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम लगाई गई थी, जो अभी पड़ताल कर रही है। इस संबंध में ‘अमर उजाला’ ने 18 अक्तूबर के अंक में ‘फर्जी खाता खोल लिपिक ने हड़पे एक लाख रुपये’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद संबंधित लिपिक के गृह जनपद बाराबंकी के डीएम को डाक विभाग ने पत्र भेजकर उसकी संपत्ति पर नजर रखने का अनुरोध किया था। शुक्रवार को प्रधान डाकघर पहुंचे गोरखपुर के पोस्टमास्टर जनरल अनिल कुमार ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। जांच कर रहे अफसरों से जानकारी ली, जिसमें चौंकाने वाली बात सामने आई है। रकम एक लाख से बढ़कर लाखों रुपये तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, कोई भी अधिकारी इस बाबत कुछ बताने को तैयार नहीं है। उधर, जांच की धीमी गति को देखते हुए पीएमजी ने अब मामले की जांच के लिए विभाग की 11 सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें 6 सदस्य स्थानीय व 5 अन्य जिलों के शामिल हैं।
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