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अमदही में बेधड़क सरकारी जमीनों पर कब्जा
Gonda
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोंडा। अमदही गांव में 40 वर्षों से विकास कार्य ठप हैं। दबंग सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, इस कारण लोगों को काफी दिक्कतों से जूझना पड़ता है। गरीब भूमिहीनों को पट्टा आवंटन भी नहीं हो पा रहा है। दरअसल, गांव के भू-मानचित्र को दबंगों ने सरकारी जमीन हड़पने के लिए लेखपाल की मिलीभगत से गायब कर दिया। तहसील प्रशासन ने भू-मानचित्र की दूसरी प्रति उपलब्ध कराई, वह भी संदिग्ध परिस्थितियों में फट गया। नतीजा यह है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का दायरा बढ़ता जा रहा है। समस्या के निस्तारण की कई बार अफसरों से मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रधान ने मामले में कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
मामला तहसील तरबगंज की ग्राम पंचायत अमदही का है। यहां की प्रधान रमकला ने हाल ही में मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि उनके गांव का भू-मानचित्र 40 वर्ष पूर्व गांव के ही कुछ दबंगों ने सरकारी भूमि हथियाने के लिए लेखपाल की मिली भगत से गायब करा दिया। इसके बाद तहसील प्रशासन ने 1979 में लेखपाल को भू-मानचित्र की द्वितीय प्रति उपलब्ध कराई, लेकिन एक वर्ष बाद 1980 में यह मानचित्र भी संदिग्ध परिस्थिति में फट गया। प्रधान के मुताबिक इसी बीच दबंगों ने जिला राजस्व अभिलेखागार में रखे भू-मानचित्र को भी गायब करा दिया। भू-मानचित्र न होने से पिछले चार दशकों से ग्राम पंचायत में विकास कार्य ठप हैं। वहीं, सरकारी भूमि पर दबंग कब्जा कर रहे हैं। रमकला ने बताया कि गांव में कृषि कार्य के लिए भूमि तो है, लेकिन उस पर दबंगों का कब्जा है। भू-मानचित्र न होने से भूमि की पैमाइश नहीं हो पा रही है। इससे गरीब भूमिहीनों को भूमि का पट्टा नहीं दिया जा सका। कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधान ने मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही भू-मानचित्र उपलब्ध कराने की मांग की है। उधर, लेखपाल परशुराम ने बताया कि भू-मानचित्र न होने से कुछ लोग सरकारी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए अफसरों को रिपोर्ट दी र्गई है।
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मामला तहसील तरबगंज की ग्राम पंचायत अमदही का है। यहां की प्रधान रमकला ने हाल ही में मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि उनके गांव का भू-मानचित्र 40 वर्ष पूर्व गांव के ही कुछ दबंगों ने सरकारी भूमि हथियाने के लिए लेखपाल की मिली भगत से गायब करा दिया। इसके बाद तहसील प्रशासन ने 1979 में लेखपाल को भू-मानचित्र की द्वितीय प्रति उपलब्ध कराई, लेकिन एक वर्ष बाद 1980 में यह मानचित्र भी संदिग्ध परिस्थिति में फट गया। प्रधान के मुताबिक इसी बीच दबंगों ने जिला राजस्व अभिलेखागार में रखे भू-मानचित्र को भी गायब करा दिया। भू-मानचित्र न होने से पिछले चार दशकों से ग्राम पंचायत में विकास कार्य ठप हैं। वहीं, सरकारी भूमि पर दबंग कब्जा कर रहे हैं। रमकला ने बताया कि गांव में कृषि कार्य के लिए भूमि तो है, लेकिन उस पर दबंगों का कब्जा है। भू-मानचित्र न होने से भूमि की पैमाइश नहीं हो पा रही है। इससे गरीब भूमिहीनों को भूमि का पट्टा नहीं दिया जा सका। कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधान ने मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही भू-मानचित्र उपलब्ध कराने की मांग की है। उधर, लेखपाल परशुराम ने बताया कि भू-मानचित्र न होने से कुछ लोग सरकारी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए अफसरों को रिपोर्ट दी र्गई है।
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