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कल से होगी राजकीय पक्षी सारस की गणना

Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
Gonda
Gonda Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
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गोंडा। घाघरा नदी में गैंगटिक डॉल्फिन की गणना का कार्यक्रम पांच अक्तूबर से शुरू होगा। इससे पहले तीन अक्तूबर को जिले में वन महकमा स्वयं सेवी संस्था टर्टल सर्वाइवल एलाइंस (टीएसए) के साथ मिलकर जिले की सभी नौ रेंजों में बीटवार सारस क्रेन की गणना करेगा। सुबह-शाम पांच से सात बजे तक चलने वाले इस अभियान के लिए वन महकमा ने उन प्राकृतिक वासों का चिन्हांकन करना शुरू दिया है, जहां सारस मूल रूप से पाए जाते हैं। तीन अक्तूबर को सारस को प्रदेश में राजकीय पक्षी का दर्जा दिया गया था। सारस की वैसे तो अपने आप में कई खासियत हैं। लेकिन एक मायने में इसकी सबसे बड़ी खासियत जोड़े के रूप में रहने की मानी जाती है। उप्र के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि यह सारस पूरे विश्व में सबसे ज्यादा उप्र के कन्नौज और फर्रुखाबाद जिले में ही पाये जाते हैं। यह गोंडा में भी काफी संख्या में पाये जाते हैं। तीन अक्तूबर को जिले में सारस की गणना की जानी है। जिसके लिए वन विभाग की तरफ से इनके प्राकृतिक वासों का चिह्नांकन किया जा रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. मनोज कुमार शुक्ल बताते हैं कि जिले में वन विभाग के नौ वन रेंज हैं। जिसमें बीटवार सभी फारेस्टगार्डों, रेंजरों को सारस के प्राकृतिक वास का चिन्हांकन करने को कहा गया है। सुबह-शाम पांच से सात बजे के बीच दो घंटे के लिए उनके विभाग के सभी कर्मचारी अपनी बीटों में सारस के प्राकृतिक वास के इर्द-गिर्द मौजूद रहकर सारस की गणना उधर, वन विभाग के सारस गणना के इस मिशन में सहयोग देने के लिए स्वयं सेवी संस्था टर्टल सर्वाइवल एलाइंस (टीएसए) ने भी अपनी कमर कस ली है। एलाइंस के तराई कोऑर्डिनेटर भास्कर दीक्षित का कहना है कि तीन अक्तूबर को वह गोंडा से कटराबाजार होते हुए फिर से लौटकर गोंडा आएंगे। इस बीच रास्ते में उनके जिन-जिन प्राकृतिक वासों का चयन उन्होंने किया है, वहां वह इस दो घंटे के बीच मौजूद रहकर सारस की गणना करेंगे।
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यहां देखे जाते हैं सारस
गोंडा। सुनसान और निर्जन इलाके में जहां झील या फिर कोई नदी बहती हो, वहां सारस पाने की संभावना ज्यादा रहती है। साथ ही घास-फूस और घनी जगहों वाले तराई इलाके में भी इनके मिलने की संभावना रहती है। धान के एक बड़े से खेत की मेड़ों पर भी यह दिखाई दे जाते हैं।
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कैसे होती है पहचान
गोंडा। सारस के समूह में सारस की यह पहचान करना कि कौन सारस नर और कौन मादा है, बड़ा मुश्किल हो जाता है। क्योंकि नर और मादा सारस के पहचान की खासियत यह होती है कि नर सारस बड़ा होता है और मादा सारस छोटी। जिसकी वास्तविक पहचान होना तब तक मुश्किल है, जब तक गणना करने वाला व्यक्ति इनके नजदीक न पहुंच जाए।
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