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Gonda News: धानेपुर पहुंची 600 बोरी यूरिया, आज होगा वितरण

Thu, 31 Jul 2025 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Thu, 31 Jul 2025 11:31 PM IST
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600 bags of urea reached Dhanepur, distribution will be done today
धानेपुर (गोंडा)। किसानों के हंगामे के बाद धानेपुर समिति को 600 बोरी यूरिया का और आवंटन किया गया है। इसका वितरण शुक्रवार को किया जाएगा।
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यूरिया डंप होने के बाद भी वितरण न होने से बुधवार को किसानों ने गोंडा-उतरौला मार्ग जाम कर दिया था, जिसे पुलिस ने जाम खुलवाकर खाद का वितरण शुरू कराया था। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। किसानों को मांग को देखते हुए समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद भेजने का कार्य शुरू कर दिया गया है। समिति के सचिव रामभवन ने बताया कि 600 बोरी यूरिया मिली है, शुक्रवार को वितरण किया जाएगा। एडीओ कोऑपरेटिव सुधीर सिंह ने बताया कि धानेपुर समिति पर यूरिया की ज्यादा मांग थी, इसलिए सबसे पहले वहां खाद भेजी गई है। माधवगंज व त्रिलोकपुर समिति पर भी खाद भेजी जा रही है। सभी समितियों पर निष्पक्षता के साथ खाद वितरण के लिए एक निगरानी समिति बनाई गई है, जिनकी उपस्थिति में खाद वितरण किया जाएगा।
किसानों को वितरित किया गया बीज
धानेपुर (गोंडा)। मुजेहना के किसानों को बृहस्पतिवार को ग्राम पंचायत जैतापुर व कृषि कार्यालय पर मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए रागी व सावा का निशुल्क बीज वितरित किया गया। कृषि बीज गोदाम प्रभारी धर्मचंद्र वर्मा ने बताया कि मोटा अनाज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। रागी में कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है, जबकि सावा एक पौष्टिक और आसानी से पचने वाला अनाज है।
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अधिक खपत हुई 13 हजार मीट्रिक टन यूरिया के मामले की जांच शुरू

गोंडा। कृषि विभाग की टीम ने गत वर्ष की अपेक्षा इस साल 13 हजार मीट्रिक टन यूरिया की अधिक खपत को लेकर जांच शुरू कर दी है। कृषि अधिकारियों की टीम ने इसको लेकर पांच बिक्री केंद्रों की छानबीन कर किसानों से जानकारी ली है। दरअसल, जुलाई तक पिछले वर्ष 25 हजार 561 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई थी, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 39 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। ऐसे में 13 हजार से अधिक मीट्रिक टन की ज्यादा खपत ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने जब किसानों से बात की तो पता चला कि डीएपी का मूल्य अधिक होने के कारण यूरिया ज्यादा खर्च की गई। यही नहीं, मक्के का रकबा बढ़ना भी इसके पीछे की एक वजह बताई जा रही है। कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है।
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