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60 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित

Sat, 13 Aug 2016 10:44 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Sat, 13 Aug 2016 10:44 PM IST
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60 thousand people affected by floods
गांव में भरा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
 बाराबंकी की सीमा में एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के बाद जो आफत गोंडा जिले की करनैलगंज तहसील में आई है, उसने करनैलगंज के 12 गांवों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। जहां की करीब 60 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। घाघरा की बाढ़ से जहां किसी गांव में घुटनों से कमर तक पानी भरा हुआ है तो वहीं नदी के नजदीक पड़ने वाले नकहरा और काशीपुर गांव में पानी लोगों के सिर से ऊपर बह रहा है।
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हालत यह है कि शुक्रवार को जहां घाघरा नदी खतरे के निशान से 39 सेमी ऊपर बह रही थी तो वहीं शनिवार की सुबह होते-होते नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 से 47 सेमी ऊपर पहुंच गया। वहीं प्रशासन बाढ़ प्रभावित 12 गांवों में केवल 15 हजार लोगों को ही बाढ़ पीड़ित मान रहा है।
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वहीं, 20 गांवों के हजारों किसानों की करीब 10 हजार एकड़ में फसल भी पानी में डूब चुकी है। कल तक जहां गौरा सिंहनापुर, नकहरा, काशीपुर, अतरसुईयां, घरकुईयां, पसका, चंदापुर किटौली, बहुवनमदार माझा, प्रतापपुर, दिउली व नैपुरा को प्रशासन बाढ़ ग्रस्त मान रहा था तो वहीं शनिवार को मोहम्मदपुर गढ़वार गांव इसमें और शामिल हो गया। जिसके बाद बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
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घाघरा नदी से बाढ़ का पानी 10 किलोमीटर दूर चलकर चचरी नाले तक आ चुका है। जिससे नाले का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। लोगों की मानें तो नाले में पानी आ जाने से पाल्हापुर बाढ़ चौकी और आसपास के गांवों पर भी बाढ़ का संकट मंडराना शुरू हो जाएगा।

वहीं, चचरी, पाल्हापुर सहित तमाम गांवों के आसपास बने ताल-तलैय्या व खंती में भी बाढ़ का पानी भर चुका है। जबकि चचरी से नकहरा को जाने वाले रास्ते पर पानी भर गया है। वहीं, बाढ़ग्रस्त करनैलगंज इलाके में संक्रामक बीमारियां तेजी से पांव पसारने लगी हैं। लेकिन अभी तक पीड़ित गांव वालों के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था प्रशासन नहीं करा पाया है। 


अनिल कुमार मिश्र, एसडीएम करनैलगंज ने कहा कि पाल्हापुर और गौरसिंहनापुर बाढ़ चौकी में कुल 6 हजार लंच पैकेट बाढ़ पीड़ितों के लिए रोज तैयार कर इनका वितरण पीड़ितों में किया जा रहा है। जबकि करनैलगंज में कुल 4 बाढ़ चौकियां  सक्रिय हैं। 51 नावें अब तक  बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगाई जा चुकी हैं। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या और बढ़ा दी जाएगी। अभी तक कुल 12 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 

 
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