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गन्ना क्षेत्र सुरक्षण में अब प्रबन्ध कमेटियों की नहीं चलेगी मनमानी

Mon, 04 Sep 2017 11:16 PM IST
Updated Mon, 04 Sep 2017 11:16 PM IST
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गन्ना क्षेत्र सुरक्षण में अब प्रबन्ध कमेटियों की नहीं चलेगी मनमानी
गन्ना क्षेत्र सुरक्षण में प्रबंध कमेटियों की नहीं चलेगी मनमानी
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गोंडा। गन्ना क्षेत्र सुरक्षण (केन एरिया रिजर्वेशन) में अब गन्ना समितियों के प्रबन्ध कमेटियों की मनमानी नही चल सकेगी। शासन ने चीनी मिल वार गन्ना क्षेत्र सुरक्षण के लिए समितियों से आने वाले प्रस्ताव भेजे जाने के मामले में प्रबन्ध कमेटियों के पर को कुछ कतर दिया है।

शासन अब गन्ना पेराई सत्र 2017-18 में गन्ना क्षेत्र सुरक्षण के लिए गन्ना समितियों के केवल वही प्रस्ताव स्वीकार किये जाएंगे जो गन्ना समितियों की साधारण सभा की बैठक में पारित किया गया होगा।
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शासन के गन्ना सुरक्षण के लिए दिये जाने वाले प्रस्ताव के तरीके में संशोधन करने से गन्ने व चीनी मिलों को लेकर राजनीति करने वाले प्रबन्ध कमेटी के पदाधिकारियों को झटका लगा है। अब कोई भी कमेटी किसी भी चीनी मिल को खुद को लाभ पहुंचाने के चक्कर में गन्ना सुरक्षण पर गलत प्रस्ताव नही बना सकेगी।
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समितियों के साधारण सभा की बैठकों में तैयार होने वाले प्रस्ताव पर क्षेत्र के हर गांव के किसानों के प्रतिनिधि के रूप में चुने गये डेलीगेट सदस्यों की सहमति व सर्व सम्मति वाले प्रस्ताव ही मान्य होंगे।

क्षेत्र का गन्ना किस चीनी मिल को दिये जाने से गांव के छोटे से छोटे गन्ना किसान को फायदा मिलेगा साधारण सभा में तैयार प्रस्ताव में इस बात का ख्याल रखा जाएगा।

चीनी मिलों व गन्ना माफिया को फायदा पहुंचाने का ऐसे होता खेल
गोंडा। गन्ना समितियों के प्रबन्ध कमेटियां व उसके डायरेक्टर कभी कभी अपने मक्सद से हट कर काम करने लगते हैं। बताया जाता है कि कमेटी के पदाधिकारी कभी कभी अपने पसंदीदा चीनी मिल अफसरों को खुश करने व उनसे खुद लाभ लेने के लिए उन्हें अधिक गन्ना एरिया दिलाने का प्रस्ताव तैयार करवा देते हैं।

कभी इसका लाभ क्षेत्र के गन्ना माफियाआें को भी दिलाए जाने का खेल किया जाता है। इसमें बिना यह सोचे प्रस्ताव पास कर दिया जाता है कि क्षेत्र के किसान को वास्तव में किस चीनी मिल से फायदा नुकसान अधिक होना है।

जिसे चीनी मिल को अधिक गन्ना एरिया सुरक्षण में मिलता है वह अधिक लाभ कमाती हैं वे चाहे खुद किसान से गन्ना खरीद करें या फिर गन्ना माफियाओं से गन्ना खरीदें। सूत्रों की माने तो इस खेल में कु छ कमेटी के लोगों व मिल प्रबन्धन में बड़ी डील होती है जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।

जिले की कुल गन्ना समितियां
गन्ना विकास समिति गोंडा, गन्ना विकास समिति मनकापुर, गन्ना विकास समिति नवाबगंज, गन्ना विकास समिति गौरा चौकी, गन्ना विकास समिति मैजापुर, गन्ना विकास समिति करनैलगंज ।

जिले में कुल चीनी मिलें
मैजापुर चीनी मिल गोंडा। मनकापुर चीनी मिल गोंडा। बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल गोंडा।
इनसेट
पड़ोस के जिलों के इन मिलों को भी जाता है गन्ना
* बभनान चीनी मिल बस्ती, * मसौधा चीनी मिल फैजाबाद, * बलरामपुर चीनी मिल बलरामपुर, * जरवल रोड चीनी मिल बहराइच, * हैदरगढ़ चीनी मिल बाराबंकी, * चिलवरिया चीनी मिल बहराइच।

इनसेट
* कुल किसान - 1.40 लाख ।
* कुल गन्ना क्षेत्रफल- 90 हजार हेक्टेयर ।
वर्जन
अगले गन्ना पेराई सत्र में किस चीनी मिल को कितना एरिया गन्ना दिया जाना है यह पहले तय किया जाता है। इसके लिए गन्ना समितियों की प्रबंध समितियों की ओर से पारित प्रस्ताव को गन्ना आयुक्त को भेजा जाता है। लेकिन अब शासन ने इस प्रस्ताव में निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए समितियाें के सचिवों को समिति की साधारण सभा बुलाकर बैठक में तय प्रस्ताव भेजने का निर्देश जारी किया है।
- पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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