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सरयू में उफान से 33 गांव बाढ़ की चपेट में, पांच सौ परिवार बेघर

Wed, 12 Aug 2020 09:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2020 09:57 PM IST
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33 villages in flood due to flood in Saryu, five hundred families homeless
उमरी बेगमगंज गोंडा। सरयू में नेपाल से छोड़े गए छह लाख क्यूसेक पानी से नदी अब उफान पर है। गांवों में सरयू का पानी कहर ढ़ा रहा है। तरबगंज तहसील के ऐली परसौली गांव के 33 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और वहां के करीब पांच सौ की आबादी गांव छोड़कर खुले आसमान के नीचे आ गई है। स्थिति यह है कि रिंग बांध का निर्माण पूरा न होने से अभी और गांवों के लोगों की धड़कनें बढ़ी हैं। करीब 32 गांवों में बाढ़ का कहर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। यहां के लोग भी घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से राहत व बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। रिंग बांध को पूरा करने के लिए अधिकारियों की निगरानी में तेज पकड़ रहा है।
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नेपाल का पानी तबाही मचाने लगा है सरयू नदी पूरी तरह से उफान पर है। भिखारीपुर सकरौरा तटबंध टूटने के बाद एली परसौली गांव को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए बनाए गए रिंग बांध को मजबूत करने के साथ ही उसकी ऊंचाई बढ़ाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। रिंग बांध के किनारे तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे ग्रामीणों की धड़कन तेज हो गई हैं। वहीं बिशुन पुरवा के सामने एक बार फिर मसीना लगने से कटान शुरू हो गई, यहां बचाव कार्य जारी है। बांध टूटने पर ऐली परसोली के करीब 32 गांवों को भीषण बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ सकती है।
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उधर दूसरी तरफ बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस चुका है और ऐली परसोली के 33 मजरे एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पानी लोगों के घरों में घुसने लगा है। लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। प्रशासन पल्ली बांट कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर रोक रहा है। अंधेरे से निपटने के लिए मिट्टी के तेल की जरूरत बताई जा रही है। करीब 65 लोगों का घर बार नदी में समा गया है। इन लोगों के पास अब घर बनाने के लिए कोई जमीन भी मौजूद नहीं है। यहां प्रशासन की तरफ से राहत के नाम पर मात्र आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की गई है। प्रधान प्रतिनिधि जग प्रसाद यादव व सुरजीत सिंह मिट्टी तेल वितरण की मांग प्रशासन से की है। एसडीएम तरबगंज राजेश कुमार अपनी पूरी टीम के साथ विशुनपुरवा में कैंप कर रहे हैं। इस बाबत सहायक अभियंता बाढ़ कार्य खंड गोंडा प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मसीना लगने से कटान शुरू हुई थी लेकिन उस को कंट्रोल कर लिया गया है। रिंग बांध की मजबूती के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है
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नकहरा में भी बाढ़ का कहर, नौ गांव बाढ़ से डूबे
करनैलगंज (गोंडा)। सरयू (घाघरा) में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर बेकाबू होती जा रही है। लगातार जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। सरयू नदी फिर से खतरे के निशान से करीब 100 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। तीन दिन पूर्व विभिन्न बैराजों से छोड़े गए करीब 6 लाख क्यूसेक पानी से नदी पूरे शबाब पर है। बुधवार को विभिन्न बैराजों से छोड़े गए करीब साढे तीन लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज जारी रहा। बांध के आस पास वाले गांव में बाढ़ के पानी का फैलाव तेजी से हो रहा है। 7 गांव बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। जिसमें ग्राम माझा रायपुर, परसावल, नेपुरा, पारा, बेहटा और कमियार यह बाराबंकी और गोंडा जिले की सीमा पर बसे गांव हैं तथा करनैलगंज तहसील के ग्राम नकहरा के नौ मजरे पूरी तरह बाढ़ के पानी से डूब चुके हैं और सभी मजरे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

पानी का जबरदस्त सैलाब आने से घाघरा नदी 100 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी है और जिन गांवों में आज तक पानी नहीं घुसा वहां तक घाघरा के बाढ़ का पानी दस्तक दे चुका है। गोंडा और बाराबंकी जिले की सीमा पर बसी ग्राम पंचायतें कमियार, माझा रायपुर, परसावल, नैपुरा तो पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। इसके अलावा ग्राम पारा और बेहटा के अधिकांश मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। करनैलगंज तहसील के ग्राम नकहरा के 9 मजरे पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। बुधवार को 3 लाख 26 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज सरयू में हो रहा था। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 107.116 पर चल रही थी। बांध के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में मनोज कुमार गुप्ता, धर्मपाल यादव, दृग पाल यादव, रामसनेही, शिव शरण, कैलाश नाथ आदि का कहना है कि बांध बनने के बाद पहली बार पानी का इतना सैलाब देखने को मिल रहा है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि पानी का डिस्चार्ज धीरे-धीरे घट रहा है। अगर बरसात न हुई तो डिस्चार्ज घटेगा और जलस्तर में गिरावट होगी।
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