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आरक्षण के नए दांव से 300 पंचायतें आरक्षण हो सकती हैं बाहर

Tue, 16 Mar 2021 10:40 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Mar 2021 10:40 PM IST
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300 panchayats will be out of reservation with the new reservation stakes
गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में एक बार फिर आरक्षण की चर्चाएं बढ़ गई हैं। 1214 पंचायतों में सीटों के परिवर्तन की हवा बहने लगी है। जारी हुए आरक्षण में वह तीन सौ पंचायतें आरक्षित हो गई थीं जो आजादी के बाद आज तक आरक्षित नही हुईं थीं।
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इसमें कुछ पंचायतें अन्य पिछड़ा वर्ग और कुछ अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गईं थीं। इसमें आधार वर्ष 1995 से अब तक हुए आरक्षण की प्रक्रिया बनी थी। ऐसे में जिस भी वर्ग के लिए आरक्षण से पंचायतें शेष रह गईं थीं। उन्हें प्राथमिकता से आरक्षित कर दिया गया था। लेकिन नए मानक तय होने से एक बार फिर वह पंचायतें बची रह जाएंगी और रोस्टर में आनी वाली पंचायतें ही आरक्षित हो सकेंगी।
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जिले में वर्ष 1995 से 2015 तक 1054 पंचायतें ही थीं। लेकिन इस साल 160 नई पंचायतों के बढ़ने से 1214 पंचायतें हो गईं। इसके बाद आरक्षण की कार्रवाई होने के बाद गावों में चुनावी माहौल पूरे उबाल पर था। अचानक गावों में माहौल ही बदल गया है, कई गांवों में फिर एक बार अनारक्षित मानकर लोग प्रचार में जुट गए हैं।
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वहीं अनुमान के आधार पर कई गांवों में आरक्षित वर्ग को चुनाव में उतारने की तैयारी होने लगी है। इसके साथ ही होर्डिंग बैनर छपवाने की भीड़ भी कम हो गई है। शहर में होर्डिंग तैयार करने वाले तिलकराम कहते हैं बीते दिनों कई आर्डर आए थे। अब रोक दिए गए हैं।
पता चला रहा है कि आरक्षण में बदलाव होने वाला है, ऐसे में अभी छपाने के कार्य रोके जा रहे हैं। यही नहीं कई गांवों में प्रचार के लिए चल रही मुहिम भी थम गई है। सभी की निगाहें आरक्षण के तरीके और सूची पर फिर से टिक गई है। प्रधान के साथ जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्यों के दावेदारों की मुश्किलें भी बढ़ रही है।
पंचायतों में आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद लोगों ने बड़े स्तर पर प्रचार अभियान शुरू हो गए थे। करीब 20 हजार दावेदारों ने 1214 गांवों में विभिन्न पदों पर अपने प्रचार में ताकत झोंक दी थी। लाखों रुपये खर्च करके लोगों ने अपनी जमीन तैयार कर ली थी।
प्रधान पद के दावेदारों ने तीन से पांच लाख तक का बजट खर्च किया है, इसी तरह जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए भी दो लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य के दावेदार भी दस हजार रुपये की होर्डिंग आदि पर खर्च कर चुके हैं। इसके बाद अब आरक्षण तय करने के लिए फिर से प्रक्रिया शुरू होने से दावेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 16 हजार नए मतदाता बढ़ गए हैं। अभी तक 1214 पंचायतों में अभी तक 26 लाख 53 हजार 357 मतदाता थे और नए 16 हजार मतदाताओं के बढ़ गए हैं। अब मतदाता सूची में 26 लाख 69 हजार 315 मतदाता हो गए हैं। पंचायत चुनाव में नए मतदाता प्रत्याशियों के फैसला सुनाएंगे। सूची को अंतिम रूप देने के बाद अब निर्वाचन विभाग आगे की तैयारी में जुटा है।
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