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Gonda News: केले की खेती से 24 साल का युवा बना प्रगतिशील किसान
Tue, 17 Jun 2025 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 17 Jun 2025 11:29 PM IST
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कटरा बाजार के टेढ़ी गांव में केले की फसल दिखाते प्रगतिशील किसान अंकित सिंह। - संवाद
कटरा बाजार (गोंडा)। लखनऊ में एलएलबी की तैयारी कर रहे युवक को केले की खेती ने प्रगतिशील किसान बना दिया। वह केले की खेती से प्रतिवर्ष लाखों रुपये कमाई कर रहे हैं। वह गांव के प्रधान भी चुने गए। युवा किसान को देखकर गांव के अन्य लोगों ने भी केले की खेती की तरफ कदम बढ़ाए हैं।
विकासखंड कटरा बाजार के टेढ़ी गांव के मौजूदा प्रधान अंकित सिंह लखनऊ में रहकर एलएलबी की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता राजेंद्र सिंह गांव के प्रधान थे। 2021 में पिता के निधन के बाद वह गांव लौटे और निर्विरोध प्रधान चुने गए। उनके परिवार से बहराइच गंगवल के राजा उदय प्रताप सिंह से नजदीकियां थीं। उनकी सलाह से अंकित ने 24 साल की उम्र में प्रधानी के साथ 53 बीघे में केले की खेती शुरू की। इसमें उनके साथ मनोज व आशीष भी शामिल थे। 2024 में दैवीय आपदा में नुकसान के बाद भी 16 लाख रुपये की लागत से लगभग 60 लाख की बचत हुई।
प्रगतिशील किसान अंकित सिंह ने बताया कि पहले उनके गांव में गन्ने की खेती होती थी लेकिन, उनकी पहल ने गांव की तस्वीर ही बदल दी। एक एकड़ में तीन लाख 75 हजार रुपये खर्च कर पैदा की गई केले की फसल से अब 15 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। इसकी पहल उन्होंने साढ़े चार एकड़ में जी-9 प्रजाति केले की फसल से की। अच्छा मुनाफा होता देख इसे विस्तार देकर आठ एकड़ में केले की फसल लगवाई। केले की फसल 12 से 14 माह में तैयार होती है। फसल अच्छी रही तो इसकी पैदावार 350 से लेकर 400 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है, जिससे एकमुश्त मुनाफा होता है। (संवाद)
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महाराष्ट्र के जलगांव से मंगवाते हैं पौधे
अंकित के मुताबिक वह केले के पौधे महाराष्ट्र के जलगांव से मंगवाते हैं। एक एकड़ में लगभग 3025 पौधे लगाए जाते हैं। एक दूसरे पौधे के बीच छह फुट का अंतर रखा जाता है। एक पौधे की कीमत लगभग 22 रुपये आती है। केले की खेती से मोटी कमाई देखकर क्षेत्र के संदीप, शंकरपाल, आशीष, शिवनारायण, मनोज, आरिफ, धर्मेंद्र, करीम सहित 40 किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़ दी और केले की खेती शुरू कर दी है। देखते ही देखते गांव में 56 हेक्टेयर केले की खेती शुरू हो गई।
राजधानी तक बिक रहा केला
टेढ़ी गांव में तैयार केले राजधानी के बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल की शोभा बढ़ा रहे हैं। यहां केले की खरीद करने गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य राज्यों के व्यापारी आते हैं। वर्ष 2024 में टेढ़ी गांव से लखनऊ में खुले नामीगिरामी शॉपिंग मॉल में 250 क्विंटल केला भेजा गया था।
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विकासखंड कटरा बाजार के टेढ़ी गांव के मौजूदा प्रधान अंकित सिंह लखनऊ में रहकर एलएलबी की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता राजेंद्र सिंह गांव के प्रधान थे। 2021 में पिता के निधन के बाद वह गांव लौटे और निर्विरोध प्रधान चुने गए। उनके परिवार से बहराइच गंगवल के राजा उदय प्रताप सिंह से नजदीकियां थीं। उनकी सलाह से अंकित ने 24 साल की उम्र में प्रधानी के साथ 53 बीघे में केले की खेती शुरू की। इसमें उनके साथ मनोज व आशीष भी शामिल थे। 2024 में दैवीय आपदा में नुकसान के बाद भी 16 लाख रुपये की लागत से लगभग 60 लाख की बचत हुई।
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प्रगतिशील किसान अंकित सिंह ने बताया कि पहले उनके गांव में गन्ने की खेती होती थी लेकिन, उनकी पहल ने गांव की तस्वीर ही बदल दी। एक एकड़ में तीन लाख 75 हजार रुपये खर्च कर पैदा की गई केले की फसल से अब 15 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। इसकी पहल उन्होंने साढ़े चार एकड़ में जी-9 प्रजाति केले की फसल से की। अच्छा मुनाफा होता देख इसे विस्तार देकर आठ एकड़ में केले की फसल लगवाई। केले की फसल 12 से 14 माह में तैयार होती है। फसल अच्छी रही तो इसकी पैदावार 350 से लेकर 400 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है, जिससे एकमुश्त मुनाफा होता है। (संवाद)
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महाराष्ट्र के जलगांव से मंगवाते हैं पौधे
अंकित के मुताबिक वह केले के पौधे महाराष्ट्र के जलगांव से मंगवाते हैं। एक एकड़ में लगभग 3025 पौधे लगाए जाते हैं। एक दूसरे पौधे के बीच छह फुट का अंतर रखा जाता है। एक पौधे की कीमत लगभग 22 रुपये आती है। केले की खेती से मोटी कमाई देखकर क्षेत्र के संदीप, शंकरपाल, आशीष, शिवनारायण, मनोज, आरिफ, धर्मेंद्र, करीम सहित 40 किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़ दी और केले की खेती शुरू कर दी है। देखते ही देखते गांव में 56 हेक्टेयर केले की खेती शुरू हो गई।
राजधानी तक बिक रहा केला
टेढ़ी गांव में तैयार केले राजधानी के बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल की शोभा बढ़ा रहे हैं। यहां केले की खरीद करने गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य राज्यों के व्यापारी आते हैं। वर्ष 2024 में टेढ़ी गांव से लखनऊ में खुले नामीगिरामी शॉपिंग मॉल में 250 क्विंटल केला भेजा गया था।