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96 घंटे बाद घटा जलस्तर पर दुश्वारियां बरकरार
Updated Sat, 15 Jul 2017 10:19 PM IST
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घाघरा की चपेट में आए 26 नए गांव
96 घंटे बाद घटा जलस्तर पर दुश्वारियां बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। 96 घंटे बाद आखिरकार शनिवार की दोपहर बाद से घाघरा नदी का जलस्तर तेजी के साथ घटना शुरू हो गया है। हालांकि नदी के घटते जलस्तर से हाल-फिलहाल बाढ़ पीड़ितों को इसलिए कोई राहत नहीं मिली है, क्योंकि बाढ़ का पानी अभी भी उनके गांवों व मजरों में पहले की तरह भरा हुआ है। लेकिन उम्मीद है कि जिस रफ्तार से नदी घट रही है, अगर यह सिलसिला अगले 24 घंटे तक बना रहा तो इससे बाढ़ क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी। उधर पिछले तीन दिनों से खतरे के निशान से ऊपर घाघरा ने 26 नए गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। जिसका पानी परसपुर के बहुवनमदार माझा समेत करनैलगंज के कई इलाकों में भर गया है।
बाढ प्रभावित करनैलगंज इलाके में नकहरा के 14, काशीपुर के 9, प्रतापपुर के 3, घरकुइंया के 13, बसेरिया के 5, मोहम्मदपुर गढ़वार के 2, भटपुरवा के 6, अतरसुइया के 4 तो पूरेअंगद गांव के 9 मजरे घुटने से लेकर कमर तक पानी में डूबे हैं। जिसके कारण यहां रहने वाले लोगों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। वहीं पिछले तीन दिनों से खतरे के निशान से ऊपर चल रही घाघरा ने परसपुर के बहुवनदार माझा गांव के दर्जनभर मजरों को भी अपनी चपेट मे ले लिया है। जबकि करनैलगंज के भी कई मजरे इससे प्रभावित हुए हैं। नदी घट रही है, लेकिन इसके बाद भी बाढ़ के पानी का फैलाव लगातार हो रहा है। बाढ़ के पानी से बाराबंकी की सीमा पर बसी गोंडा की पांच ग्राम पंचायतों परसावल, रायपुर, बेहटा, कमियार, नैपूरा के 34 मजरे पहले से ही बाढ प्रभावित है। जहां के लोगों की जिंदगी बाढ़ के पानी ने नरक बना दी है।
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इनसेट
बाइक सहित नदी में गिरा लेखपाल, बाढ़ पीड़ितों ने बचाई जान
शनिवार को बाइक से बाढ़ पीड़ितों की खोज-खबर लेने निकले लेखपाल की बाइक अचानक फिसल गई। जिससे वह सीधे नदी में जा गिरे। यह देख वहीं मौके पर जमा लोगो ने भी नदी में छलांग लगा दी और लेखपाल को सकुशल बाहर निकाला। लेखपाल के शरीर से पानी निकालने के बाद उन्हे इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया गया। बताते हैं कि परसावल गांव के लेखपाल हरि प्रसाद सिंह शनिवार को बांध के रास्ते से परसावल की ओर जा रहे थे। उसी बीच बांध के किनारे उनकी मोटर साइकिल फिसल गई और वह सीधे बाइक समेत नदी में जा गिरे। यह देख बांध पर डेरा जमाये ग्रामीणों ने लेखपाल की चिल्लाहट सुनकर परसावल निवासी राम नेवाज, सत्यनाम, छोटेलाल, मंगल यादव, सुभाष चन्द, रामपूते ने लेखपाल को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। बांस व गमछे से जैसे-तैसे लेखपाल को नदी से बाहर निकाला गया। ग्रामीणों के मुताबिक लेखपाल के सारे अभिलेख एंव उसके कुछ अन्य सामान नदी में चले गये थे जिसे मोटर साइकिल समेत निकाल लिया गया है।
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इनसेट
नदी घटते ही बढ़ गई कटान
शनिवार की दोपहर बाद से घट रही घाघरा नदी से होने वाली कटान बढ़ गई है। 52 किलोमीटर लंबे एल्गिन-चरसड़ी बांध का करीब ढाई किलोमीटर हिस्सा घाघरा नदी पहले से ही काट चुकी है। ऐसे में नदी के घटने से होने वाली कटान को लेकर बंधे के बचे हिस्से के कटने का खतरा बढ़ गया है।
वर्जन
घाघरा नदी शनिवार की दोपहर बाद से घटने लगी है। उम्मीद है कि कल तक बाढ़ क्षेत्र करनैलगंज की तस्वीर में कुछ सुधार होगा। बाढ़ पीड़ितों की राहत के लिए पर्याप्त संख्या में नावों के साथ ही उनके खाने-पीने के लिए लंच पैकेटों का इंतजाम किया गया है। राशन किटें भी लगातार बाढ़ पीड़ितों में बांटी जा रहा है। 40 नावें अबतक लगाई गई है। जबकि गौरा सिंहनापुर बाढ़ राहत केंद्र से 350 बाढ़ पीड़ितों को राशन किट का वितरण किया गया है।
-अर्चना वर्मा, एसडीएम करनैलगंज
इनसेट
शाम ढलते ही बाढ़ चौकियों पर पसर जाता सन्नाटा
बाढ चौकियों पर शाम ढलते ही कर्मचारी नदारद हो जाते हैं। उसके बाद महज आवारा कुत्तों के हवाले बाढ चौकी हो जाती है। शुक्रवार की देर शाम कुछ ऐसा ही नजारा बाढ राहत केंद्र पाल्हापुर का नजर आया। जहंा देर शाम को केंद्र पर कोई कर्मचारी या अधिकारी मौजूद नहीं था। बल्कि आवारा कुत्ते बचा भोजन एंव बिछे तिरपाल पर आराम कर रहे थे। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि शाम ढलने के बाद महज पीएसी के जवान जो केंद्र पर डेरा जमाये हैं उनके अलावा बाढ़ केंद्र पर कोई भी कर्मी नहीं रुकता है। बाढ पीडितों के लिए आये तिरपाल को अधिकारियों की कुर्सी के आगे बिछाया गया है। जहंा कुत्तों की मौज हो रही है।
इनसेट
संक्रामक बीमारियों की गिरफ्त में बाढ़ पीड़ित
बाढ़ प्रभावित करनैलगंज इलाके में गर्मी पडने के साथ ही संक्रामक बीमारियां भी हावी होने लगी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि दो राहत केन्द्रो पाल्हापुर व गौरासिंहपुर में 8 डाक्टरों के साथ 8 फार्मासिस्टों की टीम रोजाना 30-35 बाढ़ पीड़ितों का रोज इलाज कर उन्हें दवा मुहैया करा रही है।
इनसेट
अपने ही गांव में शरणार्थी की तरह जी रहे बाढ़ पीड़ित
बाढ़ क्षेत्र करनैलगंज में घाघरा नदी के किनारे बसे गांव नकहरा, पाल्हापुर, गौरासिंहपुर, काशीपुर, घरकुईयां आदि के लोग अपने ही गांव में शरणार्थी की तरह जीने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से इन्हें जो किटे मुहैया कराई गई हैं, उसे ही यह लोग छाजन की तरह छाकर जैसे-तैसे उसके नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। दूर से देखने में यह पता ही नहीं चलता कि नदी में गांव है कि गांव में नदी। 96 घंटे बाद धीरे-धीरे घट रहे घाघरा नदी के जलस्तर के बावजूद बाढग़्रस्त करनैलगंज की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा। यहां की स्थिति यह है कि घाघरा नदी के किनारे बसे गांव और उनमें रहने वाले लोग प्रशासन के लाख समझाने के बावजूद अपना घर-बार छोडक़र जाने के लिए तैयार नहीं है।
इनसेट
प्रशासन की बदइंतजामी का रोना हो रहे काशीपुर के लोग
बाढ़ प्रभावित काशीपुर गांव के लोग प्रशासन की मनमानी से परेशान हैं। यहां रहने वाले दर्जनों लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से उन्हें न तो लंच पैकेट दिए जा रहे हैं, न ही राशन की किट। नैनुआ, जगन्नाथपुर, घरकुईयां गांव के रहने वाले संजीव यादव, कामता, लखपत का आर ोप है कि प्रशासन की ओर से राशन किट बांटने वाले जो लोग आते हैं वह पीछे से ही राशन व लंच पैकेट बांटकर चले जाते हैं।