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50 दिन में जमा हुए 2200 करोड़ पुराने नोट
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Fri, 30 Dec 2016 10:59 PM IST
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अंतिम दिन बैंकों में कर्मचारी करते रहे ग्राहकों का इंतजा
- फोटो : अमर उजाला
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बैंकों में 500 व 1000 के पुराने नोट जमा करने की समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो गई। पुराने नोट जमा करने के आखिरी दिन शुक्रवार को बैंक में कर्मचारी ग्राहकों का इंतजार करते रहे। पुराने नोट जमा करने के आखिरी दिन सभी बैंकों में सन्नाटे का माहौल रहा। बैंकों में रोजाना की तरह भी शुक्रवार को बैंकों में भीड़ नहीं दिखी। वैसे सरकार की ओर से तय किये गये पुराने नोटों के चलन के 50 दिन में जिले में करीब 2200 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।
सरकार की ओर से 08 नवम्बर को 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट बन्द कर दिये जाने के बाद से बैंकों में पुराने नोट बदलने की होड़ मच गई थी। इसके अलावा नोट बंदी के बाद उपजे कैश किल्लत से परेशान लोगों को बैंक से पैसे निकालने के लिए दिन भर बैंकों की लाइन में जूझना पड़ रहा था।
लेकिन बैंकों में अब भीड़ नहीं दिख रही है। वहीं शुक्रवार को नोट बंदी के 50 दिन बाद बैंकों में पर्याप्त कैश पहुंचने लगा है, जबकि जिले में अब तक करीब 2200 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा किए जा चुके हैं। सरकार की ओर से 30 दिसंबर तक 500 व 1000 रुपये के नोट बदलने का आखिरी घोषित किया गया था। लेकिन बैंकों में आखिरी दिन भीड़ उमडने से उलट दिखा।
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रोजाना जोरदार भीड़ रहने वाले नगर के स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में शुक्रवार को 11.00 बजे सन्नाटा रहा। दो काउंटर पर पैसा निकालने व जमा करने की 10-10 मौजूद रहे। बैंक में पुराना नोट जमा करने वाला कोई व्यक्ति काउंटर पर नहीं दिखा। एसबीआई के चीफ मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि आज तो बैंक में सामान्य स्थिति है। पुराने नोट जमा करने वाले लोगों की तादाद भी निल दिख रही है।
मंडलीय कार्यालय में भी सामान्य रही स्थिति
गोंडा-बहराइच रोड पर इलाहाबाद के मंडलीय कार्यालय में भी स्थिति सामान्य दिखी। भुगतान काउंटर पर मात्र दो ग्राहक लगे दिखे, जबकि अन्य लोग दूसरी योजनाओं के बारे में एक अन्य काउंटर पर जानकारी ले रहे थे। बैंक के एजीएम एएस हीरा ने बताया कि पहले लोगों को कैश की समस्या थी जिससे बैंकों में भीड़ हो रही थी। अब बैंकों में पर्याप्त कैश है। लोग बैंक में लेन देन सामान्य रूप से करने लगे हैं। नोट बंदी के बाद से अब तक करीब इलाहाबाद बैंक में पुराने नोट के करीब 630 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं।
नोटबंदी पर खाताधारकों की है अलग-अलग राय
नोट बंदी के फैसले पर लोगों की अलग अलग राय है। कुछ लोग नोट बन्दी के बाद अब अच्छे दिन आने के दावे कर रहे हैं तो कुछ नोट बंदी से बाद में कारोबार खेती आदि पर खराब असर पडने का तर्क दे रहे हैं। शुक्रवार को स्टेट बैंक आये नगर के रमेश कुमार का कहना है कि नोट बंदी से रुपये डंप कर व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले लोगों को झटका लगा है अब वह भी सामान्य लोगों की तरह एक प्लेटफार्म पर आ गये हैं।
जबकि इलाहाबाद बैंक में पैसा जमा करने आये सुनील कुमार का कहना है कि नोट बंदी से तमाम कामगार काम छोड़ कर चले गए हैं। छोटे छोटे कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। वहीं रामबहादुर का कहना है कि नोट बन्दी में किसान लुट गया है। उसकी उपज नहीं बिकी। अनाज से लेकर सब्जी आदि आधे दाम पर बेचने को किसानों को मजबूर होना पड़ा।
एटीएम आखिरकार अब उगलने लगे नोट
गोंडा। नोट बंदी के 50 दिन बाद आखिरकार एटीएम अब नोट उगलने लगे हैं। लड्डबी लाइनों में घंटों जूझने वाले लोगों को अब एटीएम से पैसा निकालना आसान हो गया है। शुक्रवार को सिविल लाइन के पीएनबी से लोग आसानी से पैसा निकालते रहे। आईसीआईसीआई के एटीएम में पैसा रहा लेकिन निकालने वाला कोई नही दिखा गार्ड ने बताया कि अब लोग आते हैं पैसा निकाल कर चले जाते हैं।
दिनभर में करीब 200 लोग पैसा निकाल रहे हैं। स्टेट बैंक के मुख्य शाखा पर एक साथ तीन तीन एटीएम में रोज कैश भरा जा रहा है। तीनों मशीनों पर आने वाले लोग 2000 के नोट निकालते दिखे। ईसीआईसीआई बैंक का एटीएम 14 घंटे खुल रहा है। एक्सिस बैंक का एटीएम रोजाना 12से 14 घंटे खुल रहा है। इलाहाबाद बैंक के मुख्य शाखा का एटीएम चलता मिला। शुक्रवार को एटीएम पर पैसा लेने के लिए पांच लोग लाइन में लगे रहे।
यहां कभी नहीं मिला पैसा
नगर के बैंक ऑफ इंडिया का अदम गोंडवी के सामने लगा एटीएम नोटबंदी के बाद से शो-पीश बना रहा है। नोट बंदी के दौरान एक भी दिन इसमें पैसा नहीं डाला गया। गोंडा व मनकापुर रेलवे स्टेशन पर लगा एसबीआई का एटीएम एक भी दिन नही चला। विकास भवन के पास सिंडीकेट बैंक का एटीएम भी एक भी दिन चला।
वर्जन
अब बैंकों में पर्याप्त कैश आ जाने से कैश किल्लत जैसे हालात नही हैं। लोगों को बैंक से आसानी से पैसा मिल रहा है। बैंकों में आज तक पुराने नोट जमा करने का समय खत्म हो गया है। बैंकों से रिपोर्ट आरबीआई को भेजी जा रही है। अभी रोज की रिपोर्ट बैंक कलेक्ट कर रहे हैं। सभी बैंकों में पुराने नोट के करीब 2200 करोड़ रुपये जमा होने का अनुमान है। -एके पांडेय, एलडीएम गोंडा।
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सरकार की ओर से 08 नवम्बर को 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट बन्द कर दिये जाने के बाद से बैंकों में पुराने नोट बदलने की होड़ मच गई थी। इसके अलावा नोट बंदी के बाद उपजे कैश किल्लत से परेशान लोगों को बैंक से पैसे निकालने के लिए दिन भर बैंकों की लाइन में जूझना पड़ रहा था।
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लेकिन बैंकों में अब भीड़ नहीं दिख रही है। वहीं शुक्रवार को नोट बंदी के 50 दिन बाद बैंकों में पर्याप्त कैश पहुंचने लगा है, जबकि जिले में अब तक करीब 2200 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा किए जा चुके हैं। सरकार की ओर से 30 दिसंबर तक 500 व 1000 रुपये के नोट बदलने का आखिरी घोषित किया गया था। लेकिन बैंकों में आखिरी दिन भीड़ उमडने से उलट दिखा।
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रोजाना जोरदार भीड़ रहने वाले नगर के स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में शुक्रवार को 11.00 बजे सन्नाटा रहा। दो काउंटर पर पैसा निकालने व जमा करने की 10-10 मौजूद रहे। बैंक में पुराना नोट जमा करने वाला कोई व्यक्ति काउंटर पर नहीं दिखा। एसबीआई के चीफ मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि आज तो बैंक में सामान्य स्थिति है। पुराने नोट जमा करने वाले लोगों की तादाद भी निल दिख रही है।
मंडलीय कार्यालय में भी सामान्य रही स्थिति
गोंडा-बहराइच रोड पर इलाहाबाद के मंडलीय कार्यालय में भी स्थिति सामान्य दिखी। भुगतान काउंटर पर मात्र दो ग्राहक लगे दिखे, जबकि अन्य लोग दूसरी योजनाओं के बारे में एक अन्य काउंटर पर जानकारी ले रहे थे। बैंक के एजीएम एएस हीरा ने बताया कि पहले लोगों को कैश की समस्या थी जिससे बैंकों में भीड़ हो रही थी। अब बैंकों में पर्याप्त कैश है। लोग बैंक में लेन देन सामान्य रूप से करने लगे हैं। नोट बंदी के बाद से अब तक करीब इलाहाबाद बैंक में पुराने नोट के करीब 630 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं।
नोटबंदी पर खाताधारकों की है अलग-अलग राय
नोट बंदी के फैसले पर लोगों की अलग अलग राय है। कुछ लोग नोट बन्दी के बाद अब अच्छे दिन आने के दावे कर रहे हैं तो कुछ नोट बंदी से बाद में कारोबार खेती आदि पर खराब असर पडने का तर्क दे रहे हैं। शुक्रवार को स्टेट बैंक आये नगर के रमेश कुमार का कहना है कि नोट बंदी से रुपये डंप कर व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले लोगों को झटका लगा है अब वह भी सामान्य लोगों की तरह एक प्लेटफार्म पर आ गये हैं।
जबकि इलाहाबाद बैंक में पैसा जमा करने आये सुनील कुमार का कहना है कि नोट बंदी से तमाम कामगार काम छोड़ कर चले गए हैं। छोटे छोटे कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। वहीं रामबहादुर का कहना है कि नोट बन्दी में किसान लुट गया है। उसकी उपज नहीं बिकी। अनाज से लेकर सब्जी आदि आधे दाम पर बेचने को किसानों को मजबूर होना पड़ा।
एटीएम आखिरकार अब उगलने लगे नोट
गोंडा। नोट बंदी के 50 दिन बाद आखिरकार एटीएम अब नोट उगलने लगे हैं। लड्डबी लाइनों में घंटों जूझने वाले लोगों को अब एटीएम से पैसा निकालना आसान हो गया है। शुक्रवार को सिविल लाइन के पीएनबी से लोग आसानी से पैसा निकालते रहे। आईसीआईसीआई के एटीएम में पैसा रहा लेकिन निकालने वाला कोई नही दिखा गार्ड ने बताया कि अब लोग आते हैं पैसा निकाल कर चले जाते हैं।
दिनभर में करीब 200 लोग पैसा निकाल रहे हैं। स्टेट बैंक के मुख्य शाखा पर एक साथ तीन तीन एटीएम में रोज कैश भरा जा रहा है। तीनों मशीनों पर आने वाले लोग 2000 के नोट निकालते दिखे। ईसीआईसीआई बैंक का एटीएम 14 घंटे खुल रहा है। एक्सिस बैंक का एटीएम रोजाना 12से 14 घंटे खुल रहा है। इलाहाबाद बैंक के मुख्य शाखा का एटीएम चलता मिला। शुक्रवार को एटीएम पर पैसा लेने के लिए पांच लोग लाइन में लगे रहे।
यहां कभी नहीं मिला पैसा
नगर के बैंक ऑफ इंडिया का अदम गोंडवी के सामने लगा एटीएम नोटबंदी के बाद से शो-पीश बना रहा है। नोट बंदी के दौरान एक भी दिन इसमें पैसा नहीं डाला गया। गोंडा व मनकापुर रेलवे स्टेशन पर लगा एसबीआई का एटीएम एक भी दिन नही चला। विकास भवन के पास सिंडीकेट बैंक का एटीएम भी एक भी दिन चला।
वर्जन
अब बैंकों में पर्याप्त कैश आ जाने से कैश किल्लत जैसे हालात नही हैं। लोगों को बैंक से आसानी से पैसा मिल रहा है। बैंकों में आज तक पुराने नोट जमा करने का समय खत्म हो गया है। बैंकों से रिपोर्ट आरबीआई को भेजी जा रही है। अभी रोज की रिपोर्ट बैंक कलेक्ट कर रहे हैं। सभी बैंकों में पुराने नोट के करीब 2200 करोड़ रुपये जमा होने का अनुमान है। -एके पांडेय, एलडीएम गोंडा।