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Gonda News: 1,875 खंभे टूटे, 90 ट्रांसफार्मर फुंके
Mon, 04 May 2026 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 04 May 2026 11:28 PM IST
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धानेपुर में आंधी से टूटा बिजली का पोल। - संवाद
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गोंडा। आंधी से देवीपाटन मंडल की बिजली व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। गोंडा समेत बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में पेड़ गिरने, खंभों के टूटने और ट्रांसफार्मरों के फुंकने से व्यापक स्तर पर विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे लाखों उपभोक्ता प्रभावित हुए।
आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि 566 स्थानों पर पेड़ और बड़ी-बड़ी डालियां टूटकर बिजली की लाइन, पोल और ट्रांसफार्मरों पर गिर गईं। इसके चलते कुल 1,875 विद्युत खंभे क्षतिग्रस्त हो गए और 90 से अधिक ट्रांसफार्मर या तो जल गए या उनमें तकनीकी खराबी आ गई। इस कारण चारों जिलों के 100 से अधिक विद्युत उपकेंद्रों से आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।
हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोंडा में विकास भवन, कलेक्ट्रेट और मुख्य अभियंता कार्यालय भी बिजली संकट से अछूते नहीं रहे। कई जगह देर शाम तक भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां बिजली के साथ-साथ पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक नुकसान गोंडा में हुआ है। यहां 650 खंभे टूटे व 32 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। 245 स्थानों पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। बहराइच में 550 खंभे टूटे व 28 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए और 127 स्थानों पर पेड़ गिरे। बलरामपुर में 425 खंभे टूटे, 16 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए और 134 स्थानों पर पेड़ गिरे हैं। श्रावस्ती में 250 खंभे व 14 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए और 60 स्थानों पर पेड़ गिरे हैं।
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने बताया कि सभी अधीक्षण अभियंताओं और फील्ड कर्मचारियों को तत्काल मरम्मत कार्य में जुटने के निर्देश दिए गए हैं। खंभों को दुरुस्त करने, तारों को बदलने और ट्रांसफार्मरों की मरम्मत या प्रतिस्थापन का काम युद्ध स्तर पर शुरू कराया गया है। आवश्यक सामग्री की आपूर्ति तेज कर दी गई है। अतिरिक्त टीमों को भी लगाया गया है, ताकि जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
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आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि 566 स्थानों पर पेड़ और बड़ी-बड़ी डालियां टूटकर बिजली की लाइन, पोल और ट्रांसफार्मरों पर गिर गईं। इसके चलते कुल 1,875 विद्युत खंभे क्षतिग्रस्त हो गए और 90 से अधिक ट्रांसफार्मर या तो जल गए या उनमें तकनीकी खराबी आ गई। इस कारण चारों जिलों के 100 से अधिक विद्युत उपकेंद्रों से आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।
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हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोंडा में विकास भवन, कलेक्ट्रेट और मुख्य अभियंता कार्यालय भी बिजली संकट से अछूते नहीं रहे। कई जगह देर शाम तक भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां बिजली के साथ-साथ पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक नुकसान गोंडा में हुआ है। यहां 650 खंभे टूटे व 32 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। 245 स्थानों पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। बहराइच में 550 खंभे टूटे व 28 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए और 127 स्थानों पर पेड़ गिरे। बलरामपुर में 425 खंभे टूटे, 16 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए और 134 स्थानों पर पेड़ गिरे हैं। श्रावस्ती में 250 खंभे व 14 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए और 60 स्थानों पर पेड़ गिरे हैं।
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने बताया कि सभी अधीक्षण अभियंताओं और फील्ड कर्मचारियों को तत्काल मरम्मत कार्य में जुटने के निर्देश दिए गए हैं। खंभों को दुरुस्त करने, तारों को बदलने और ट्रांसफार्मरों की मरम्मत या प्रतिस्थापन का काम युद्ध स्तर पर शुरू कराया गया है। आवश्यक सामग्री की आपूर्ति तेज कर दी गई है। अतिरिक्त टीमों को भी लगाया गया है, ताकि जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।