{"_id":"5b88232342c792466c10178a","slug":"181535648547-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घातक बनी घाघरा, 170 गावों में सैलाब की तबाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घातक बनी घाघरा, 170 गावों में सैलाब की तबाही
Updated Thu, 30 Aug 2018 10:32 PM IST
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करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा नदी अब घातक होती जा रही है। नदी का पानी लगातार गांवों को चपेट में लेता जा रहा है। बुधवार से गुरुवार तक करीब 24 नए गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। घाघरा नदी का पानी दो दिन से करनैलगंज क्षेत्र के गांवों में भर रहा है। अब तक करीब 170 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। गुरुवार को भी घाघरा नदी का जलस्तर लगभग स्थिर रहा।
उधर, बैराजों में पानी का डिस्चार्ज लगभग पौने तीन लाख क्यूसेक बना रहने से आगामी दिनों में जल स्तर और कम होने के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। घटते पानी से उठने वाले मशीनें से लगातार कटान जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
मांझा रायपुर, परसावल, कमियार, बांसगांव व चरपुरवा के पास कटान तेज हो रही है। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। ई गांवों की अब तक चार हजार बीघा किसानों की कृषि योग्य भूमि नदी में समा चुकी है। बाढ़ से प्रभावित किसान पहले ही अपना घर छोड़कर बांध पर शरण लिए हुए है।
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बैराजों से भी बरसात होने के कारण लगातार पानी छोड़े जाने की खबरें आ रही हैं। नदी में पानी का डिस्चार्ज कभी कम तो कभी अधिक होने का सिलसिला जारी है। जिससे घाघरा का जलस्तर कभी नीचे तो कभी ऊपर होकर बाढ़ पीड़ितों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कई दिनों से खतरे के निशान से ऊपर पहुंची घाघरा नदी की लहरें करनैलगंज व बाराबंकी के सरहदी इलाकों के गांवों में मुसीबत का सबब बनी हुई हैं।
कई दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए है। कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। अभी तक यहां पर पर्याप्त नावों की व्यवस्था तक नहीं है। करनैलगंज तहसील क्षेत्र एवं सीमावर्ती जिले के करीब 49 ग्राम पंचायतों के 170 मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। बहुवन मदार माझा, नंदौर, बांसगांव, रेक्सडिया, पूरे अंगद, पूरे अजब, चंद्रभानपुर, भटपुरवा, दिवली नैपुरा, परसावल, मांझारायपुर, वेहटा, नकहरा, घरकुइंया आदि के लोगों ने बताया कि जान जोखिम में डालकर लोग पशुओं के चारे से लेकर अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी में सफर करते है। तो वहीं बच्चे भी स्कूल नाव के सहारे ही आते-जाते है।
लोग गृहस्थी समेट कर एल्गिन चरसड़ी बांध व अन्य ऊंचाई वाले स्थान पर सड़क के किनारे खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। गुरुवार को खतरे के निशान से 66 सेंटीमीटर ऊपर रही घाघरा के एल्गिन ब्रिज पर ली गयी माप के अनुसार दिन में दो बजे घाघरा का जलस्तर 106 से 736 दर्ज किया गया, जो कि खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष लगभग 66 सेंटीमीटर की बढ़त पर था। तो वहीं अयोध्या में ली गई माप के अनुसार सरयू का जलस्तर 93.190 दर्ज किया गया। यहां भी सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 46 सेंटीमीटर ऊपर है।
सिंचाई विभाग के अधिकारी बताते हैं कि खराब मौसम के चलते अभी आने वाले दिनों में जलस्तर परिवर्तन के कोई खास आसार नहीं दिखाई दे रहे है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 31 ग्राम पंचायत के 57 मजरे एवं 2550 घर, 8640 आबादी, 5712 पशु बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें करीब 3200 लोगों को राहत किट का वितरण किया जा चुका है।
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उधर, बैराजों में पानी का डिस्चार्ज लगभग पौने तीन लाख क्यूसेक बना रहने से आगामी दिनों में जल स्तर और कम होने के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। घटते पानी से उठने वाले मशीनें से लगातार कटान जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
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मांझा रायपुर, परसावल, कमियार, बांसगांव व चरपुरवा के पास कटान तेज हो रही है। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। ई गांवों की अब तक चार हजार बीघा किसानों की कृषि योग्य भूमि नदी में समा चुकी है। बाढ़ से प्रभावित किसान पहले ही अपना घर छोड़कर बांध पर शरण लिए हुए है।
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बैराजों से भी बरसात होने के कारण लगातार पानी छोड़े जाने की खबरें आ रही हैं। नदी में पानी का डिस्चार्ज कभी कम तो कभी अधिक होने का सिलसिला जारी है। जिससे घाघरा का जलस्तर कभी नीचे तो कभी ऊपर होकर बाढ़ पीड़ितों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कई दिनों से खतरे के निशान से ऊपर पहुंची घाघरा नदी की लहरें करनैलगंज व बाराबंकी के सरहदी इलाकों के गांवों में मुसीबत का सबब बनी हुई हैं।
कई दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए है। कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। अभी तक यहां पर पर्याप्त नावों की व्यवस्था तक नहीं है। करनैलगंज तहसील क्षेत्र एवं सीमावर्ती जिले के करीब 49 ग्राम पंचायतों के 170 मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। बहुवन मदार माझा, नंदौर, बांसगांव, रेक्सडिया, पूरे अंगद, पूरे अजब, चंद्रभानपुर, भटपुरवा, दिवली नैपुरा, परसावल, मांझारायपुर, वेहटा, नकहरा, घरकुइंया आदि के लोगों ने बताया कि जान जोखिम में डालकर लोग पशुओं के चारे से लेकर अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी में सफर करते है। तो वहीं बच्चे भी स्कूल नाव के सहारे ही आते-जाते है।
लोग गृहस्थी समेट कर एल्गिन चरसड़ी बांध व अन्य ऊंचाई वाले स्थान पर सड़क के किनारे खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। गुरुवार को खतरे के निशान से 66 सेंटीमीटर ऊपर रही घाघरा के एल्गिन ब्रिज पर ली गयी माप के अनुसार दिन में दो बजे घाघरा का जलस्तर 106 से 736 दर्ज किया गया, जो कि खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष लगभग 66 सेंटीमीटर की बढ़त पर था। तो वहीं अयोध्या में ली गई माप के अनुसार सरयू का जलस्तर 93.190 दर्ज किया गया। यहां भी सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 46 सेंटीमीटर ऊपर है।
सिंचाई विभाग के अधिकारी बताते हैं कि खराब मौसम के चलते अभी आने वाले दिनों में जलस्तर परिवर्तन के कोई खास आसार नहीं दिखाई दे रहे है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 31 ग्राम पंचायत के 57 मजरे एवं 2550 घर, 8640 आबादी, 5712 पशु बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें करीब 3200 लोगों को राहत किट का वितरण किया जा चुका है।