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फरार होने के तीसरे दिन भी नही लौटे काम पर गोदाम प्रभारी
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:33 PM IST
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गिरफ्तारी के डर से गोदामों में ताला डाल प्रभारी गायब
गोंडा। अनाज घोटाले में गिरफ्तारी के डर से पांच दिन पहले खाद्य रसद विभाग के ब्लाक गोदामों से भागे गोदाम प्रभारी अभी वापस नही लौटे हैं। सभी गोदाम प्रभारियों के मोबाइल नंबर बंद हैं।
गोदाम में ताला लटकने से गोदाम का काम ठप पड़ गया है। इस समय गोदाम में अनाज जमा कराने का काम चल रहा था अचानक छापेमारी शुरू होने से घोटाले में संलिप्त गोदाम प्रभारी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं। गोदाम के बाहर एफसीआई से आया अनाज लदे ट्रक गोदाम पर खड़े हैं। विभागीय अधिकारी परेशान है कि रोस्टर का क्रम बिगड़ रहा है इससे बाद में दिक्कत होगी।
राशन कार्ड धारकों में बंटने वाले अनाज में कई साल से घपला चल रहा है। इसको लेकर कई बार मुद्दे उठने के साथ खुलासा भी हो चुका है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से यह खेल चलता रहा इसका खुलासा दो माह पहले वजीरगंज ब्लॉक क्षेत्र के एक निजी गोदाम में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक का अनाज पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ था।
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इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कई दिनों से खाद्य रसद विभाग की ओर से उठान वितरण व अनाज की ढुलाई करने पर फोकस कर रही थी। जांच अधिकारियों की माने तो इस मामले में कई गोदाम प्रभारियों की संलिप्तता सामने आने पर उनकी व गोदाम पर उनके इस घपले के कारनामें में मददगार लोगों की गिरफ्तारी जरूरी हो गई थी।
इसी को लेकर 27 जुलाई को जिले के मुजेहना, इटियाथोक, तरबगंज, वजीरगंज, बभनजोत व छपिया ब्लॉक गोदाम पर छापेमारी की थी। छापेमारी में क्राइम ब्रांच ने तरबगंज के गोदाम प्रभारी मनोज शुक्ला को दबोच लिया था लेकिन कुछ टीमों के अपने निर्धारित छापेमारी वाले स्थान पर पहुंचने में देर कर देने से बात फैल गई और पांच गोदाम प्रभारी भाग निकले।
कई और गोदामों पर टीमें गई थीं लेकिन खाली हाथ रहीं। अब गोदाम प्रभारियों के न लौटने से विभाग के अधिकारियों का सिरदर्द बढ़ गया है। बन्द गोदाम का दूसरे प्रभारी को चार्ज दिलाना भी आसान नही है। बगल के प्रभारियों को चार्ज दिलाने की कवायद चल रही है। इस बारे में आरएमओ केके सिंह का कहना है कि जो भी स्थित होगी व्यवस्था की जाएगी।
कोटेदारों तक पहुंचेगी क्राइम बांच के जांच की आंच
अनाज घोटाले में जांच टीमों के जांच का दायरा बढ़ेगा। अनाज माफियाओं से शुरू होने वाली जांच भारतीय खाद्य निगम, खाद्य रसद विभाग, ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों, आपूर्ति विभाग से लेकर उचित दर विक्रेताओं तक पहुंचेगी। घोटाले में कई पर्यवेक्षणीय अधिकारी कर्मचारी भी जांच के दायरे में आएंगे।
क्राइम ब्रांच प्रभारी इन्द्रजीत यादव का कहना है कि बड़ा घोटाला है इसकी जांच में वक्त लगेगा। एफसीआई से अनाज उठकर खाद्य रसद विभाग के ब्लाकवार गोदामों तक पहुंचने फिर यहां से इस अनाज के कोटेदारों को उठान कर अपने दुकान को ले जाने की जांच किये बिना घोटाले का खुलासा संभव नही है।
घपले रोकने में नाकाम रहा विभाग
खाद्य रसद विभाग अनाज घपले को रोक पाने में नाकाम साबित हुआ है। अधिकारियों की मिलीभगत से खाद्यान्न माफियाओं ने अनाज घोटाले में जमकर खेल किया। घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों की माने तो अधिकारियों ने जिम्मेदारी निभाने के बजाए खुद भी घपले में शामिल हो गये।
मानीटरिंग में लगे विभागीय अधिकारी छोटे अधिकारियों कर्मचारियों के घपले पर पर्दा डालते रहे। इस बात को सीएम की ओर से जांच करने आयी प्रदेश की भी टीम ने देखा।
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गोंडा। अनाज घोटाले में गिरफ्तारी के डर से पांच दिन पहले खाद्य रसद विभाग के ब्लाक गोदामों से भागे गोदाम प्रभारी अभी वापस नही लौटे हैं। सभी गोदाम प्रभारियों के मोबाइल नंबर बंद हैं।
गोदाम में ताला लटकने से गोदाम का काम ठप पड़ गया है। इस समय गोदाम में अनाज जमा कराने का काम चल रहा था अचानक छापेमारी शुरू होने से घोटाले में संलिप्त गोदाम प्रभारी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं। गोदाम के बाहर एफसीआई से आया अनाज लदे ट्रक गोदाम पर खड़े हैं। विभागीय अधिकारी परेशान है कि रोस्टर का क्रम बिगड़ रहा है इससे बाद में दिक्कत होगी।
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राशन कार्ड धारकों में बंटने वाले अनाज में कई साल से घपला चल रहा है। इसको लेकर कई बार मुद्दे उठने के साथ खुलासा भी हो चुका है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से यह खेल चलता रहा इसका खुलासा दो माह पहले वजीरगंज ब्लॉक क्षेत्र के एक निजी गोदाम में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक का अनाज पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ था।
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इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कई दिनों से खाद्य रसद विभाग की ओर से उठान वितरण व अनाज की ढुलाई करने पर फोकस कर रही थी। जांच अधिकारियों की माने तो इस मामले में कई गोदाम प्रभारियों की संलिप्तता सामने आने पर उनकी व गोदाम पर उनके इस घपले के कारनामें में मददगार लोगों की गिरफ्तारी जरूरी हो गई थी।
इसी को लेकर 27 जुलाई को जिले के मुजेहना, इटियाथोक, तरबगंज, वजीरगंज, बभनजोत व छपिया ब्लॉक गोदाम पर छापेमारी की थी। छापेमारी में क्राइम ब्रांच ने तरबगंज के गोदाम प्रभारी मनोज शुक्ला को दबोच लिया था लेकिन कुछ टीमों के अपने निर्धारित छापेमारी वाले स्थान पर पहुंचने में देर कर देने से बात फैल गई और पांच गोदाम प्रभारी भाग निकले।
कई और गोदामों पर टीमें गई थीं लेकिन खाली हाथ रहीं। अब गोदाम प्रभारियों के न लौटने से विभाग के अधिकारियों का सिरदर्द बढ़ गया है। बन्द गोदाम का दूसरे प्रभारी को चार्ज दिलाना भी आसान नही है। बगल के प्रभारियों को चार्ज दिलाने की कवायद चल रही है। इस बारे में आरएमओ केके सिंह का कहना है कि जो भी स्थित होगी व्यवस्था की जाएगी।
कोटेदारों तक पहुंचेगी क्राइम बांच के जांच की आंच
अनाज घोटाले में जांच टीमों के जांच का दायरा बढ़ेगा। अनाज माफियाओं से शुरू होने वाली जांच भारतीय खाद्य निगम, खाद्य रसद विभाग, ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों, आपूर्ति विभाग से लेकर उचित दर विक्रेताओं तक पहुंचेगी। घोटाले में कई पर्यवेक्षणीय अधिकारी कर्मचारी भी जांच के दायरे में आएंगे।
क्राइम ब्रांच प्रभारी इन्द्रजीत यादव का कहना है कि बड़ा घोटाला है इसकी जांच में वक्त लगेगा। एफसीआई से अनाज उठकर खाद्य रसद विभाग के ब्लाकवार गोदामों तक पहुंचने फिर यहां से इस अनाज के कोटेदारों को उठान कर अपने दुकान को ले जाने की जांच किये बिना घोटाले का खुलासा संभव नही है।
घपले रोकने में नाकाम रहा विभाग
खाद्य रसद विभाग अनाज घपले को रोक पाने में नाकाम साबित हुआ है। अधिकारियों की मिलीभगत से खाद्यान्न माफियाओं ने अनाज घोटाले में जमकर खेल किया। घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों की माने तो अधिकारियों ने जिम्मेदारी निभाने के बजाए खुद भी घपले में शामिल हो गये।
मानीटरिंग में लगे विभागीय अधिकारी छोटे अधिकारियों कर्मचारियों के घपले पर पर्दा डालते रहे। इस बात को सीएम की ओर से जांच करने आयी प्रदेश की भी टीम ने देखा।