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ग्रामसभा की 16 बीघे भूमि पर 40 करोड़ से बनेगा बिजलीघर
Updated Sat, 28 Apr 2018 10:49 PM IST
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बेंदुली में 40 करोड़ से बनेगा नया बिजलीघर
गोंडा। साढ़े तीन बीघे जमीन के चक्कर में जिस 132 केवी बिजलीघर का निर्माण कार्य पिछले दो साल से इटियाथोक/खरगूपुर इलाके में पेंडिंग पड़ा था। वह जल्द ही नई डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के पास होते ही चालू हो जाएगा।
जिसके बाद आने वाले दिनों में खरगूपुर व इटियाथोक इलाके की बिजली बजाए बलरामपुर के गोंडा से ही चलेगी। इस 132 केवी के नए बिजलीघर से केवल इन्हीं दो बिजलीघरों को फायदा नहीं होगा, बल्कि आसपास के करीब आधा दर्जन और बिजलीघरों को भी वैकल्पिक श्रोत के मद्देनजर इस बिजलीघर से जोड़ा जाएगा। ताकि बिजलीघर की अगर एक लाइन किसी कारणवश फाल्ट में आए तो दूसरे से इलाके की सप्लाई चलती रहे।
गोंडा जिले में पावर कॉर्पोरेशन के 25 बिजलीघरों में दो बिजलीघर इटियाथोक व खरगूपुर, ऐसे हैं, जिन्हें गोंडा से नहीं बल्कि बलरामपुर से बिजली मिलती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बलरामपुर से खरगूपुर की दूरी कुआंना जंगल के रास्ते महज 18 किलोमीटर है, जबकि गोंडा से 30 किलोमीटर। जिसके चलते पिछले दो दशकों से इटियाथोक व खरगूपुर इलाके की बिजली बलरामपुर से ही चलती आ रही है।
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बलरामपुर से खरगूपुर तक 33 केवी की लाइन कुआंना जंगल के जिस रास्ते आई है, वह जंगल में है। इस कारण आए दिन पेड़ की टहनियां, डाल टूटने से बिजली की लाइन फाल्ट में आ जाती है।
जिसे लेकर पिछले दो दशक से इटियाथोक व खरगूपुर इलाके में पारेषण खंड विभाग जमीन की तलाश कर रहा था। इटियाथोक व खरगूपुर में बिजलीघर के आसपास की जो जमीन उसने देखी भी, वह इतनी पर्याप्त नहीं थी कि उसमें 132 केवी क्षमता का बिजलीघर बनाया जा सके।
जिससे हर बार ही उसकी प्लानिंग फेल होती गई। लेकिन अब इटियाथोक से खरगूपुर जाने वाली रोड पर बेंदुली गांव में पारेषण खंड विभाग को जितनी जमीन 132 केवी बिजलीघर के लिए चाहिए थी, वह मिल गई है। जिससे बिजलीघर निर्माण का रास्ता उसके लिए साफ हो गया है।
पारेषण खंड विभाग के एक्सईएन सीपी पांडेय का कहना है कि बेंदुली गांव में प्रशासन की मदद से उन्हें साढ़े तीन बीघे जमीन मिल गई है। जिसपर वह अपना 132 केवी का बिजलीघर आसानी से बना सकते हैं।
बिजलीघर निर्माण के लिए इसका प्रारंभिक आंगणन वह बना रहे हैं। जिसकी कुल अनुमानित लागत तकरीबन 40 करोड़ आने का अनुमान है। जैसे ही डीपीआर तैयार हो जाती है, उसे पारेषण कार्य अनुमोदन समिति को भेज देंगे। स्वीकृति मिलने के बाद इसका काम भी शुरू करा दिया जाएगा।
गोंडा। साढ़े तीन बीघे जमीन के चक्कर में जिस 132 केवी बिजलीघर का निर्माण कार्य पिछले दो साल से इटियाथोक/खरगूपुर इलाके में पेंडिंग पड़ा था। वह जल्द ही नई डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के पास होते ही चालू हो जाएगा।
जिसके बाद आने वाले दिनों में खरगूपुर व इटियाथोक इलाके की बिजली बजाए बलरामपुर के गोंडा से ही चलेगी। इस 132 केवी के नए बिजलीघर से केवल इन्हीं दो बिजलीघरों को फायदा नहीं होगा, बल्कि आसपास के करीब आधा दर्जन और बिजलीघरों को भी वैकल्पिक श्रोत के मद्देनजर इस बिजलीघर से जोड़ा जाएगा। ताकि बिजलीघर की अगर एक लाइन किसी कारणवश फाल्ट में आए तो दूसरे से इलाके की सप्लाई चलती रहे।
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गोंडा जिले में पावर कॉर्पोरेशन के 25 बिजलीघरों में दो बिजलीघर इटियाथोक व खरगूपुर, ऐसे हैं, जिन्हें गोंडा से नहीं बल्कि बलरामपुर से बिजली मिलती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बलरामपुर से खरगूपुर की दूरी कुआंना जंगल के रास्ते महज 18 किलोमीटर है, जबकि गोंडा से 30 किलोमीटर। जिसके चलते पिछले दो दशकों से इटियाथोक व खरगूपुर इलाके की बिजली बलरामपुर से ही चलती आ रही है।
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बलरामपुर से खरगूपुर तक 33 केवी की लाइन कुआंना जंगल के जिस रास्ते आई है, वह जंगल में है। इस कारण आए दिन पेड़ की टहनियां, डाल टूटने से बिजली की लाइन फाल्ट में आ जाती है।
जिसे लेकर पिछले दो दशक से इटियाथोक व खरगूपुर इलाके में पारेषण खंड विभाग जमीन की तलाश कर रहा था। इटियाथोक व खरगूपुर में बिजलीघर के आसपास की जो जमीन उसने देखी भी, वह इतनी पर्याप्त नहीं थी कि उसमें 132 केवी क्षमता का बिजलीघर बनाया जा सके।
जिससे हर बार ही उसकी प्लानिंग फेल होती गई। लेकिन अब इटियाथोक से खरगूपुर जाने वाली रोड पर बेंदुली गांव में पारेषण खंड विभाग को जितनी जमीन 132 केवी बिजलीघर के लिए चाहिए थी, वह मिल गई है। जिससे बिजलीघर निर्माण का रास्ता उसके लिए साफ हो गया है।
पारेषण खंड विभाग के एक्सईएन सीपी पांडेय का कहना है कि बेंदुली गांव में प्रशासन की मदद से उन्हें साढ़े तीन बीघे जमीन मिल गई है। जिसपर वह अपना 132 केवी का बिजलीघर आसानी से बना सकते हैं।
बिजलीघर निर्माण के लिए इसका प्रारंभिक आंगणन वह बना रहे हैं। जिसकी कुल अनुमानित लागत तकरीबन 40 करोड़ आने का अनुमान है। जैसे ही डीपीआर तैयार हो जाती है, उसे पारेषण कार्य अनुमोदन समिति को भेज देंगे। स्वीकृति मिलने के बाद इसका काम भी शुरू करा दिया जाएगा।