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फिर बढ़ने लगी घाघरा, लोगों का जीना हुआ दुश्वार

Sun, 03 Sep 2017 11:48 PM IST
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:48 PM IST
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फिर बढ़ने लगी घाघरा, लोगों का जीना हुआ दुश्वार

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करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ पीड़ितों का जख्म भरने के पहले ही घाघरा जख्मों को कुरेद देती है। बाढ़ का पानी कम होंने से बाढ़ पीड़ितों में घर वापसी की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिरने लगा है। घाघरा खतरे के निशान को एक बार फिर से पार करके तबाही का संकेत देने लगी है। जिन गांवों से पानी निकल चुका था वहां पानी भरने लगा है।

एक तरफ घाघरा का पानी नदी में वापसी होने के बाद बाढ़ की मुश्किलें कम होने लगी थीं। बाढ़ पीड़ितों को घर वापसी का रास्ता खुलने लगा था तो शनिवार से एक बार फिर घाघरा ने आंखे तरेरनी शुरु कर दिया।
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शुक्रवार तक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे आ गया था। शनिवार से जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान से करीब 15 सेंटीमीटर ऊपर हो गया।
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नदी बढ़ने के साथ ही ग्राम नकहरा के सामने करनैलगंज क्षेत्र की ओर मुड़ चुकी घाघरा की धारा से पानी गावों की ओर बढ़ने लगा है। जिससे जिन गावों में पानी कम होने के बाद ग्रामीण अपने आशियाने को फिर से बसाने लगे थे वहां बाढ़ पीड़ितों को एक बार फिर बाढ़ वापसी का झटका लगा है।

जबकि अभी कम से कम आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के चार दर्जन मजरों में बाढ़ की नौबत पहले से ही बनी हुई है। जहां नावें लगी हुई हैं। अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां कीचड़ एवं दलदल तथा गांव के बाहर जलभराव होने से लोगों का जीवन सामान्य नहीं हो पाया था।

दाने-दाने को मोहताज पीड़ित
बाढ़ पीड़ित दाने-दाने को मोहताज हैं। रविवार को बांध पर दो झोपड़ियों में तंगहाली की हकीकत देखने को मिली। जहां एक बुजुर्ग राशन न होने के कारण सरकारी खैरात में मिली लइया को नमक के साथ बच्चों को खिला रहा था।

तो सरकारी राशन न मिलने के कारण घर में रखे भीगे चावल को साफ करके अपने परिवार का पेट भरने का इंतजाम करती हुई एक महिला सुनीता दिखाई दी। महिला ने बताया कि घर में पानी भर जाने के बाद घर में रखा राशन भीग गया था। अब जब खाने को कुछ नहीं है तो उसी भीगे राशन से ही परिवार का पेट भरना मजबूरी है।


दी जा रही है सहायता
एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि क्षेत्र में बाढ़ लगभग समाप्त होने वाली थी। जिन गावों में पानी भरा है वहां नावें लगी हैं। साथ ही बाढ़ पीड़ितों को लगातार राशन किट का वितरण कराया जा रहा है। घाघरा का जलस्तर थोड़ा बढ़ा है जिससे एक गांव में पानी आना शुरू हुआ है। जहां पहले से ही गांव खाली है। लोग सुरक्षित स्थान पर हैं।
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