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Gonda News: एसएनसीयू में 16 बेड, वेंटिलेटर एक भी नहीं
Mon, 14 Sep 2026 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:20 PM IST
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जिला महिला अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती बच्चे। - संवाद
गोंडा। जिला महिला अस्पताल में नवजातों को बेहतर इलाज देने के लिए संचालित सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) संसाधनों की कमी से जूझ रही है। 16 बेड की इस यूनिट में गंभीर नवजातों के लिए एक भी वेंटिलेटर नहीं है। यहां 16 रेडियंट वार्मर, छह फोटोथैरेपी और दो सीपैप मशीन हैं। गंभीर हालत में बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करना पड़ता है। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक मरीजों के दबाव को देखते हुए कम से कम पांच वेंटिलेटर युक्त बेड की जरूरत है।
अस्पताल की जुलाई की मासिक रिपोर्ट (21 जून से 20 जुलाई 2026) एसएनसीयू पर बढ़ते दबाव की तस्वीर भी सामने रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक यूनिट का बेड ऑक्यूपेंसी रेट 128.12 फीसदी रहा। यानी उपलब्ध क्षमता से अधिक नवजातों का इलाज करना पड़ा। इस दौरान कुल 139 नवजात भर्ती हुए, जिनमें 66 अस्पताल में जन्मे और 73 दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों या निजी अस्पतालों से रेफर होकर आए थे।
सीएमएस डॉ. एस दयाल का कहना है कि यहां आने वाले बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर इलाज किया जाता है। वेंटिलेटर की डिमांड भेजी गई है।
माहभर में 87 नवजात स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए गए। इनमें 46 अस्पताल में जन्मे और 41 बच्चे बाहर से रेफर होकर आए थे। 16 गंभीर नवजातों को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया, जबकि 19 को परिजन बिना चिकित्सकीय सलाह के अस्पताल से ले गए। इसी अवधि में 14 नवजातों की मौत हुई। इनमें चार बच्चे अस्पताल में जन्मे थे, जबकि 10 बच्चे बाहर से गंभीर हालत में एसएनसीयू पहुंचे थे। यानी मृत नवजातों में बड़ी संख्या रेफर होकर आने वाले गंभीर मरीजों की रही। मासिक रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में महिला अस्पताल में कुल 885 प्रसव कराए गए। इनमें 284 प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुए। रिपोर्ट में 880 जीवित जन्म और 13 मृत जन्म दर्ज हैं। सभी 13 मृत जन्म गर्भ में ही मृत्यु की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।
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गंभीर नवजातों के लिए रेफरल ही सहारा
एसएनसीयू में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने से गंभीर नवजातों के इलाज में चुनौती बढ़ जाती है। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार सांस लेने में गंभीर परेशानी या ऐसी स्थिति में आने वाले बच्चों को उच्च केंद्र भेजना पड़ता है, जहां वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हो। मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच एसएनसीयू में अतिरिक्त बेड और जीवनरक्षक उपकरणों की जरूरत भी सामने आ रही है।
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अस्पताल की जुलाई की मासिक रिपोर्ट (21 जून से 20 जुलाई 2026) एसएनसीयू पर बढ़ते दबाव की तस्वीर भी सामने रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक यूनिट का बेड ऑक्यूपेंसी रेट 128.12 फीसदी रहा। यानी उपलब्ध क्षमता से अधिक नवजातों का इलाज करना पड़ा। इस दौरान कुल 139 नवजात भर्ती हुए, जिनमें 66 अस्पताल में जन्मे और 73 दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों या निजी अस्पतालों से रेफर होकर आए थे।
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सीएमएस डॉ. एस दयाल का कहना है कि यहां आने वाले बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर इलाज किया जाता है। वेंटिलेटर की डिमांड भेजी गई है।
माहभर में 87 नवजात स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए गए। इनमें 46 अस्पताल में जन्मे और 41 बच्चे बाहर से रेफर होकर आए थे। 16 गंभीर नवजातों को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया, जबकि 19 को परिजन बिना चिकित्सकीय सलाह के अस्पताल से ले गए। इसी अवधि में 14 नवजातों की मौत हुई। इनमें चार बच्चे अस्पताल में जन्मे थे, जबकि 10 बच्चे बाहर से गंभीर हालत में एसएनसीयू पहुंचे थे। यानी मृत नवजातों में बड़ी संख्या रेफर होकर आने वाले गंभीर मरीजों की रही। मासिक रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में महिला अस्पताल में कुल 885 प्रसव कराए गए। इनमें 284 प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुए। रिपोर्ट में 880 जीवित जन्म और 13 मृत जन्म दर्ज हैं। सभी 13 मृत जन्म गर्भ में ही मृत्यु की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।
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गंभीर नवजातों के लिए रेफरल ही सहारा
एसएनसीयू में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने से गंभीर नवजातों के इलाज में चुनौती बढ़ जाती है। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार सांस लेने में गंभीर परेशानी या ऐसी स्थिति में आने वाले बच्चों को उच्च केंद्र भेजना पड़ता है, जहां वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हो। मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच एसएनसीयू में अतिरिक्त बेड और जीवनरक्षक उपकरणों की जरूरत भी सामने आ रही है।