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बाढ़ की चपेट में आए 416 मजरे
Updated Fri, 11 Aug 2017 09:32 PM IST
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बाढ़ से 250 गांवों का संपर्क टूटा
आवागमन के लिए सिर्फ नाव का सहारा
अब तक 416 गांव घाघरा की चपेट में
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अब तक करीब 416 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 250 गांव का संपर्क टूट गया है। यहां आवागमन के लिए सिर्फ नाव का सहारा बचा है। उधर, बैराजों से छोड़ा गया करीब तीन लाख क्यूसेक पानी शनिवार से क्षेत्र में आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिससे स्थिति भयावह हो सकती है। दूसरी ओर, सरयू नदी में भी पानी बढ़ रहा है। जिससे आसपास के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं।
करनैलगंज तहसील के गांवों में तबाही का आलम शुरू हो गया है। पानी घटने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ बरसात का पानी तो दूसरी ओर विभिन्न बैराजों से छोड़ा जाने वाला पानी क्षेत्र में तबाही का कारण बनता जा रहा है। शुक्रवार तक करीब 416 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 250 गांव में जाने का नाव के अतिरिक्त कोई अन्य साधन नहीं है। उनका संपर्क मार्ग पूरी तरह से कटा हुआ है। गुरुवार की देर रात्रि विभिन्न बैराजों से करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना से प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। शनिवार की सुबह से घाघरा का पानी तेजी से उफान पर आने की सम्भावना बढ़ गई है। हांलाकि शुक्रवार से ही पानी बढने का सिलसिला शुरू हो गया है। लगातार 24 घंटे से घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 55 सेंटीमीटर ऊपर स्थिर बना था, जो अब बढने लगा है। सरयू नदी
में भी घाघरा के पानी की आमद शुरू हो गई है।
इनसेट
बाढ़ की स्थिति बेकाबू
तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि प्रभावित गांवों व मजरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बाढ़ की स्थिति बेकाबू हो चुकी है। प्रभावित गांवों से लोगों का पलायन कराया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को राहत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। नावें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बैराजों से पानी छोड़े जाने से पानी बढने की सूचना है। एहतियातन सभी बाढ़ चौकियों, राहत चौकियों एंव कर्मचारियों को हाई अलर्ट कर दिया गया है।
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इनसेट
बैराजों से पानी छोड़े जाने से हालात हुए बदतर
जाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि बाढ़ की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। संसाधनों का अभाव था, जिस पर एक तहसीलदार व एक नायब तहसीलदार जिले से इस तहसील को और मांगे गए थे। जिनका अटैचमेंट आज कराया जा रहा है। बैराजों से पानी छोड़े जाने से क्षेत्र में हालात बदतर हो रहे हैं। फिर भी बाढ़ प्रभावितों को दिक्कत न हो, इसके हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। हाईएलर्ट जारी करते हुए एनडीआरएफ, पुलिस, पीएसी व सभी कर्मचारियों को क्षेत्र में लगाया गया है।
सरयू नदी व नालों में चलने लगा पानी
करनैलगंज(गोंडा)। तहसील क्षेत्र में बाढ़ का पानी तेजी से बढ रहा है। अब सरयू नदी एंव आसपास के नालों में पानी चलने लगा है। इससे ग्रामीणों में चिंता व्याप्त है। परसपुर के नंदौर गांव में बांध के कट जाने से सरयू नदी में पानी बढना शुरू हो गया है। बताते चलें कि वर्ष 2011 में भी ग्रामीणों ने बांध को काटकर गांव को डूबने से बचाया था। उस समय करनैलगंज तहसील की 72 ग्राम पंचायतों के 670 मजरे व एक लाख 30 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी। 10650 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई थी।
आवागमन के लिए सिर्फ नाव का सहारा
अब तक 416 गांव घाघरा की चपेट में
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अब तक करीब 416 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 250 गांव का संपर्क टूट गया है। यहां आवागमन के लिए सिर्फ नाव का सहारा बचा है। उधर, बैराजों से छोड़ा गया करीब तीन लाख क्यूसेक पानी शनिवार से क्षेत्र में आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिससे स्थिति भयावह हो सकती है। दूसरी ओर, सरयू नदी में भी पानी बढ़ रहा है। जिससे आसपास के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं।
करनैलगंज तहसील के गांवों में तबाही का आलम शुरू हो गया है। पानी घटने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ बरसात का पानी तो दूसरी ओर विभिन्न बैराजों से छोड़ा जाने वाला पानी क्षेत्र में तबाही का कारण बनता जा रहा है। शुक्रवार तक करीब 416 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 250 गांव में जाने का नाव के अतिरिक्त कोई अन्य साधन नहीं है। उनका संपर्क मार्ग पूरी तरह से कटा हुआ है। गुरुवार की देर रात्रि विभिन्न बैराजों से करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना से प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। शनिवार की सुबह से घाघरा का पानी तेजी से उफान पर आने की सम्भावना बढ़ गई है। हांलाकि शुक्रवार से ही पानी बढने का सिलसिला शुरू हो गया है। लगातार 24 घंटे से घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 55 सेंटीमीटर ऊपर स्थिर बना था, जो अब बढने लगा है। सरयू नदी
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में भी घाघरा के पानी की आमद शुरू हो गई है।
इनसेट
बाढ़ की स्थिति बेकाबू
तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि प्रभावित गांवों व मजरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बाढ़ की स्थिति बेकाबू हो चुकी है। प्रभावित गांवों से लोगों का पलायन कराया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को राहत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। नावें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बैराजों से पानी छोड़े जाने से पानी बढने की सूचना है। एहतियातन सभी बाढ़ चौकियों, राहत चौकियों एंव कर्मचारियों को हाई अलर्ट कर दिया गया है।
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बैराजों से पानी छोड़े जाने से हालात हुए बदतर
जाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि बाढ़ की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। संसाधनों का अभाव था, जिस पर एक तहसीलदार व एक नायब तहसीलदार जिले से इस तहसील को और मांगे गए थे। जिनका अटैचमेंट आज कराया जा रहा है। बैराजों से पानी छोड़े जाने से क्षेत्र में हालात बदतर हो रहे हैं। फिर भी बाढ़ प्रभावितों को दिक्कत न हो, इसके हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। हाईएलर्ट जारी करते हुए एनडीआरएफ, पुलिस, पीएसी व सभी कर्मचारियों को क्षेत्र में लगाया गया है।
सरयू नदी व नालों में चलने लगा पानी
करनैलगंज(गोंडा)। तहसील क्षेत्र में बाढ़ का पानी तेजी से बढ रहा है। अब सरयू नदी एंव आसपास के नालों में पानी चलने लगा है। इससे ग्रामीणों में चिंता व्याप्त है। परसपुर के नंदौर गांव में बांध के कट जाने से सरयू नदी में पानी बढना शुरू हो गया है। बताते चलें कि वर्ष 2011 में भी ग्रामीणों ने बांध को काटकर गांव को डूबने से बचाया था। उस समय करनैलगंज तहसील की 72 ग्राम पंचायतों के 670 मजरे व एक लाख 30 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी। 10650 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई थी।