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अस्पतालों में नहीं है आग से बचाव के मजबूत इंतजाम
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:31 PM IST
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अस्पतालों में आग लग जाए तो भगवान ही मालिक
किसी अस्पताल में नहीं है आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। मंडल मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम काफी कमजोर है। कहने को तो वार्डों के बाहर फायर एक्सटिंग्यूसर लगाया गया है लेकिन वह मात्र दिखावा है, किसी की अवधि समाप्त हो चुकी है कहीं इसे अस्पताल के कर्मचारी चलाना ही नहीं जानते है। लखनऊ मेें केजीएमएसी लखनऊ में आग लगने की घटना ने अस्पतालों की आग से बचाव की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
देवीपाटन मंडल मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल में आग से बचाव के इतंजाम भी महज दिखावा साबित हो रहे हैं। यहां आग से बचाव के लिए कुछ वार्डों के अंतराल पर फायर एक्सटिंग्यूसर लगाए गए है लेकिन यदि आग लगने की कोई घटना हो जाए तो सब बेकार ही साबित होंगे। कारण जो फायर एक्सटिंग्यूसर लगे हैं, उनमें से अधिकांश की अवधि समाप्त हो चुकी है और जो सही भी है, उन्हें चलाने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया है। जिला अस्पताल के कुछ कर्मियों का कहना था कि दो साल पहले प्रशिक्षण दिया गया था, तब से किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया। जिन कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वे अब यहां नहीं है, ऐसे में प्रशिक्षण न पाने वाले कर्मचारियों के सामने संकट है कि यदि अस्पताल में आग लगने की घटना हो जाए और उनके सामने फायर एक्सटिंग्यूसर हो भी तो चला नहीं पाएंगे। इनसेट
दो साल पहले हो चुकी घटना
गोंडा। जिला अस्पताल में दो साल पहले नाक,कान, गला विभाग में दो पहले आग लगने की घटना हुई थी, उसके कुछ दिन बाद चिकित्सकों एवं कर्मियों को फायर एक्सटिंग्यूसर संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था, तब से न कोई घटना हुई और न ही प्रशिक्षण दुबारा देने की जरूरत ही समझा गया।
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इनसेट
जिला एवं महिला अस्तपताल के साथ ही निजी अस्पतालों के संचालकों को फायर एक्सटिग्यूसर लगाने के साथ ही फायर संबंधी जरुरी इंतजात करने के निर्देश दिए गए है। सभी को नोटिस भी भेजी गई है। जिससे आग से सुरक्षा के व्यापक इंतजात हो सकें।
जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
इनसेट
जिला अस्पताल में 30 फायर एक्सटिग्यूसर लगाए गए हैं। आग से सुरक्षा के संबंध में मुख्य अग्निशमन अधिकारी से सुझाव मांगा गया है। वह कोई प्रस्ताव देते हैं तो उसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।
डॉ. रतन कुमार, सीएमएस
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किसी अस्पताल में नहीं है आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। मंडल मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम काफी कमजोर है। कहने को तो वार्डों के बाहर फायर एक्सटिंग्यूसर लगाया गया है लेकिन वह मात्र दिखावा है, किसी की अवधि समाप्त हो चुकी है कहीं इसे अस्पताल के कर्मचारी चलाना ही नहीं जानते है। लखनऊ मेें केजीएमएसी लखनऊ में आग लगने की घटना ने अस्पतालों की आग से बचाव की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
देवीपाटन मंडल मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल में आग से बचाव के इतंजाम भी महज दिखावा साबित हो रहे हैं। यहां आग से बचाव के लिए कुछ वार्डों के अंतराल पर फायर एक्सटिंग्यूसर लगाए गए है लेकिन यदि आग लगने की कोई घटना हो जाए तो सब बेकार ही साबित होंगे। कारण जो फायर एक्सटिंग्यूसर लगे हैं, उनमें से अधिकांश की अवधि समाप्त हो चुकी है और जो सही भी है, उन्हें चलाने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया है। जिला अस्पताल के कुछ कर्मियों का कहना था कि दो साल पहले प्रशिक्षण दिया गया था, तब से किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया। जिन कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वे अब यहां नहीं है, ऐसे में प्रशिक्षण न पाने वाले कर्मचारियों के सामने संकट है कि यदि अस्पताल में आग लगने की घटना हो जाए और उनके सामने फायर एक्सटिंग्यूसर हो भी तो चला नहीं पाएंगे। इनसेट
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दो साल पहले हो चुकी घटना
गोंडा। जिला अस्पताल में दो साल पहले नाक,कान, गला विभाग में दो पहले आग लगने की घटना हुई थी, उसके कुछ दिन बाद चिकित्सकों एवं कर्मियों को फायर एक्सटिंग्यूसर संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था, तब से न कोई घटना हुई और न ही प्रशिक्षण दुबारा देने की जरूरत ही समझा गया।
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जिला एवं महिला अस्तपताल के साथ ही निजी अस्पतालों के संचालकों को फायर एक्सटिग्यूसर लगाने के साथ ही फायर संबंधी जरुरी इंतजात करने के निर्देश दिए गए है। सभी को नोटिस भी भेजी गई है। जिससे आग से सुरक्षा के व्यापक इंतजात हो सकें।
जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
इनसेट
जिला अस्पताल में 30 फायर एक्सटिग्यूसर लगाए गए हैं। आग से सुरक्षा के संबंध में मुख्य अग्निशमन अधिकारी से सुझाव मांगा गया है। वह कोई प्रस्ताव देते हैं तो उसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।
डॉ. रतन कुमार, सीएमएस