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खतरे के निशान को छूने को बेताब घाघरा

Sat, 22 Jul 2017 11:19 PM IST
Updated Sat, 22 Jul 2017 11:19 PM IST
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खतरे के निशान को छूने को बेताब घाघरा

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10 सेंमी बढ़ी घाघरा, कटान की जद में बांध
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज (गोंडा)। पानी के उफान से घाघरा खतरे के निशान की तरफ बढ़ रही है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से तटबंध के साथ बाढ़ क्षेत्र के लिए खतरा बढ़ रहा है। शनिवार को घाघरा की कटान ने बांध को काटते हुए अपना रुख नकहरा गांव की ओर कर लिया। बांध व गांव के बीच बने मार्ग को काटकर बाढ़ का पानी एक बार फि र नकहरा गांव की ओर बहने लगा है। जिससे ग्रामीण चिंतित हैं। बांध का हिस्सा कटान की जद में है। जिसे रोकने के सारे प्रयास नाकाफी हैं।
शनिवार को घाघरा का जलस्तर बढने के साथ ही खतरे के निशान को छूने को बेताब रहा। खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष शुक्रवार की देर शाम को जलस्तर 105.826 था जो शनिवार की सुबह बढ़कर 105.906 पहुंच गया। घाघरा शाम तक बढ़त बनाते हुुए 105.956 पर पहुंच गई है। लगातार घाघरा के जलस्तर में बढ़त से बांध के लिए खतरा बढ़ गया है। ग्राम नकहरा के सामने बांध में तेजी से कटान हो रही है। बांध के हिस्से को काट कर नदी ने अपना रुख नकहरा गांव की ओर करना शुरू कर दिया है। बांध से गांव तक आने वाले रास्ते को बांध के रुप में बनाया गया था उसमें भी घाघरा की कटान तेज हो गई है। जिससे घाघरा का पानी नकहरा गांव में बहने लगा है। दूसरी ओर बांध के हिस्से में हो रही कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। कटान रोकने के सारे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। यदि बांध के कट-वन का हिस्सा करीब दस मीटर भी कटा तो घाघरा करनैलगंज तहसील के गांवों को प्रभावित करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेगी, जबकि बांध के करीब 30 मीटर हिस्से में कटान तेज हो गई है। बांध में कटान को देख ग्राम नकहरा व काशीपुर के ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों में रामसुख, नकछेद, बृजलाल, अनोखे, शिवप्रसाद आदि का कहना है कि अभी तक घाघरा का पानी बांध के कटे हुए हिस्से से घरकुंइया व प्रतापपुर होते हुए क्षेत्र में जाता था। अब नकहरा के सामने से मुख्य धारा दिखाई दे रही है। तटबंध के कटने की आशंका से प्रभावित गांवों के लोग दहशत में है, गांव वाले रात जागकर बिता रहे हैं।
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बाढ़ प्रभावित गांवों के ठीक नहीं हालात

करनैलगंज (गोंडा)। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में दुश्वारियंा कम नहीं हो रही है। कभी बरसात एवं कभी घटते तो कभी बढते जलस्तर ने बाढ़ पीड़ितों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रशासन ने बाढ़ क्षेत्र से सारी सुविधाएं हटा ली हैं। कुछ गांवों में नावें लगी हैं। बाकी बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में सुविधाओं का टोटा है। करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम बहुवन मदार मांझा, बाबा मांझा, घरकुंइयां, शिवगढ, पूरे अंगद, प्रतापपुर, के करीब 28 मजरे अभी भी पानी से पूरी तरह से घिरे हैं। जितना पानी क्षेत्र में घटता है उससे अधिक पानी घाघरा से आकर लगातार क्षेत्र में फैल रहा है। बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों कमियार, परसावल, रायपुर, बेहटा, नैपुरा के करीब 34 मजरों के हालात भी पानी के कारण ठीक नहीं हैं। तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि कुछ मजरों को बाढ़ के पानी ने घेर रखा है जहंा आने जाने के लिए नावें लगी है। जो भी पानी घाघरा का क्षेत्र में आता है वह फैलकर निकल जाता है। जिससे बाढ़ की स्थिति नहीं है। फि र भी लगातार निगरानी कराई जा रही है। बांध पर भी नजर रखी जा रही है।
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