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दुराचारी को 10 साल की सजा
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Tue, 12 Jul 2016 11:21 PM IST
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त्वरित सत्र न्यायाधीश प्रथम ने दुराचार के आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी को 22 हजार रुपये अर्थदंड अदा करने का आदेश दिया है। जुर्माना की आधी राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश भी न्यायाधीश ने दिया है।
सादुल्लाहनगर थाना क्षेत्र के ग्राम जिगनी निवासी सिराजुद्दीन पर एक महिला ने दुराचार का आरोप लगाते हुए न्यायालय पर प्रार्थना पत्र दिया था। न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि सिराजुद्दीन ने उसके साथ दुराचार किया तथा शादी का झांसा देता रहा, जिससे वह गर्भवती हो गई।
न्यायालय के आदेश पर 27 जून 2014 को सादुल्लाहनगर थाने में सिराजुद्दीन के विरुद्ध दुराचार व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद सिराजुद्दीन के विरुद्ध दुराचार व जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने पांच गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने सिराजुद्दीन को दुराचार व जान से मारने की धमकी देने का आरोपी मानते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 22 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को 14 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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सादुल्लाहनगर थाना क्षेत्र के ग्राम जिगनी निवासी सिराजुद्दीन पर एक महिला ने दुराचार का आरोप लगाते हुए न्यायालय पर प्रार्थना पत्र दिया था। न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि सिराजुद्दीन ने उसके साथ दुराचार किया तथा शादी का झांसा देता रहा, जिससे वह गर्भवती हो गई।
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न्यायालय के आदेश पर 27 जून 2014 को सादुल्लाहनगर थाने में सिराजुद्दीन के विरुद्ध दुराचार व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद सिराजुद्दीन के विरुद्ध दुराचार व जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने पांच गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने सिराजुद्दीन को दुराचार व जान से मारने की धमकी देने का आरोपी मानते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 22 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को 14 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।