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Gonda News: 10 साल पुरानी केस डायरी गायब, पुलिसकर्मियों पर एफआईआर
Thu, 19 Mar 2026 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:36 PM IST
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गोंडा। करनैलगंज कोतवाली के एक पुराने मुकदमे की केस डायरी गायब होने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने के बाद एसपी विनीत जायसवाल के निर्देश पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ करनैलगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले में तत्कालीन दीवान, मुंशी और पैरोकार की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन्हें जांच के दायरे में लिया गया है।
मामला वर्ष 2013 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले से जुड़ा है। 25 फरवरी 2013 को करनैलगंज के पांडेय चौरा निवासी शिवमंगल सिंह ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए केवल समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद 25 मार्च 2013 को अंतिम रिपोर्ट लगाकर पत्रावली क्षेत्राधिकारी कार्यालय भेज दी गई थी। वादी की आपत्ति के बाद मामले की पुनर्विवेचना उपनिरीक्षक कौशल किशोर यादव को सौंपी गई। पुनर्विवेचना के दौरान पूरक परचे के साथ पत्रावली फिर से क्षेत्राधिकारी कार्यालय भेजी गई और वहां से 10 फरवरी 2016 को कोतवाली करनैलगंज को पुनर्विवेचना के लिए वापस भेज दी गई। इसके बाद से केस डायरी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
बीते दिनों सीओ करनैलगंज की जांच में यह मामला सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी एसपी को दी गई। क्षेत्राधिकारी तरबगंज से प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें केस डायरी गायब होने की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी के निर्देश पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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निरीक्षक अपराध अरविंद कुमार ने बताया कि मामले की तफ्तीश शुरू कर दी गई है और पुराने अभिलेखों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्षेत्राधिकारी कार्यालय से केस डायरी किसने प्राप्त की थी और वह कहां गायब हुई। उन्होंने बताया कि सामान्यतः केस डायरी पैरोकार तथा थाने के दीवान-मुंशी के पास सुरक्षित रहती है, इसलिए उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
ट्रायल शुरू होने से पहले बढ़ी चिंता
न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले केस डायरी गायब होने से पुलिस की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों को डर है कि न्यायालय द्वारा केस डायरी मांगे जाने पर पुलिस के सामने पक्ष रखने में दिक्कत आएगी, जिससे मुकदमे की पैरवी प्रभावित हो सकती है।
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मामला वर्ष 2013 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले से जुड़ा है। 25 फरवरी 2013 को करनैलगंज के पांडेय चौरा निवासी शिवमंगल सिंह ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए केवल समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद 25 मार्च 2013 को अंतिम रिपोर्ट लगाकर पत्रावली क्षेत्राधिकारी कार्यालय भेज दी गई थी। वादी की आपत्ति के बाद मामले की पुनर्विवेचना उपनिरीक्षक कौशल किशोर यादव को सौंपी गई। पुनर्विवेचना के दौरान पूरक परचे के साथ पत्रावली फिर से क्षेत्राधिकारी कार्यालय भेजी गई और वहां से 10 फरवरी 2016 को कोतवाली करनैलगंज को पुनर्विवेचना के लिए वापस भेज दी गई। इसके बाद से केस डायरी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
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बीते दिनों सीओ करनैलगंज की जांच में यह मामला सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी एसपी को दी गई। क्षेत्राधिकारी तरबगंज से प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें केस डायरी गायब होने की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी के निर्देश पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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निरीक्षक अपराध अरविंद कुमार ने बताया कि मामले की तफ्तीश शुरू कर दी गई है और पुराने अभिलेखों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्षेत्राधिकारी कार्यालय से केस डायरी किसने प्राप्त की थी और वह कहां गायब हुई। उन्होंने बताया कि सामान्यतः केस डायरी पैरोकार तथा थाने के दीवान-मुंशी के पास सुरक्षित रहती है, इसलिए उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
ट्रायल शुरू होने से पहले बढ़ी चिंता
न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले केस डायरी गायब होने से पुलिस की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों को डर है कि न्यायालय द्वारा केस डायरी मांगे जाने पर पुलिस के सामने पक्ष रखने में दिक्कत आएगी, जिससे मुकदमे की पैरवी प्रभावित हो सकती है।