{"_id":"5dc996738ebc3e5b2a71bbcd","slug":"1-5-lakh-tobacco-lovers-battling-serious-diseases-gonda-news-lko4917032112","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंभीर रोगों से जूझ रहे डेढ़ लाख तंबाकू प्रेमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंभीर रोगों से जूझ रहे डेढ़ लाख तंबाकू प्रेमी
विज्ञापन
गोंडा। गुटखा व धूम्रपान का शौक जीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। जिसमें गले के नीचे उतरते ही अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। जिले में 15 साल से 69 आयु वर्ग के तीन लाख 22 हजार लोग नशे की गिरफ्त में हैं। इनमें से करीब डेढ़ लोग मुख रोग के साथ ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके अलावा तंबाकू और गुटखा के प्रयोग से लोग आर्थिक रूप से भी कमजोर होते जा रहे हैं। सर्वे में करीब 47 हजार लोग सिर्फ गोंडा में ही तंबाकू उत्पाद के प्रयोग करने से गरीबी की चपेट में आ चुके हैं। साल भर में 41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नशे की लत से लोगों को उठाना पड़ता है।
जिले में गुटखा व तंबाकू उत्पाद का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी स्तर से कई तरह के प्रयोग रोकथाम के लिए हुए लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। हर साल करीब 20 से 25 हजार लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो तंबाकू उत्पाद का प्रयोग करने लगते हैं। इसके अलावा तंबाकू उत्पाद छोड़ने वालों की संख्या एक से दो हजार लोगों की ही है। शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों में गुटखा और तंबाकू उत्पाद बेचने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
शहर में ही अकेले दो हजार से अधिक गुमटियों और दुकानों पर पान के साथ गुटखा की बिक्री होती है और दुकानदार भी कहते हैं कि बढ़ी संख्या में लोग गुटखा का प्रयोग कर रहे हैं। पान भी लगवाने के बाद दो से चार गुटखा खरीद लेते हैं। इसी तरह शहर के अलावा जिले के करीब 40 कस्बों में एक हजार से अधिक दुकानें हैं तो 8 हजार से अधिक दुकानें गांवों में हैं। जिले की 1054 पंचायतों में करीब 12 हजार मजरों में से 8 हजार मजरों में दुकानें हैं जहां पर गुटखा की बिक्री होती है। गुटखा के निर्माण और बिक्री पर कोई रोक नहीं है, लेकिन गुटखा के पाउच पर कैंसर के लोगों के साथ ही चेतवानी लिखी होती है। चेतावनी की अनदेखी कर लोग शौक में गुटखा चबा रहे हैं।
विज्ञापन
हाल के दिनों में जागरूकता के लिए स्कूल-कॉलेजों से लेकर गांवों तक तंबाकू चबाने के रोकथाम के लिए अभियान चलाया गया। करीब एक लाख बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग ने शपथ भी दिलाई, रोकथाम के उपाय का असर इसके बाद भी गावों में नही दिख रहा है। गुटखा के प्रयोग से मुंह के कैंसर से पीड़ित एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह जहर भी अधिक घातक है। आज उसके चेहरे की सूरत बिगड़ गई है। ऑपरेशन हुआ और मुंह खुलने में अभी भी दिक्कत है। इसी तरह बेलसर के दुकानदार राम भरोसे कहते हैं कि हम लोग बेचते तो हैं लेकिन प्रयोग से नुकसान तो है ही। लोग गुटखों पर लिखी चेतावनी की अनदेखी करते हैं।
धूम्रपान 1.61 लाख लोगों की जिंदगी के लिए बना खतरा
जिले मेें वैसे तो 3.22 लाख लोग धूम्रपान का सेवन करते हैं, लेकिन 1.61 लाख लोगों की जिदंगी पर धूम्रपान पर खतरा मंडरा रहा है। ये लोग जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों पर धूम्रपान से होने वाले विभिन्न बीमारियों का इलाज करा रहे हैं। तंबाकू नियंत्रण के लिए संचालित कार्यक्रमों से इन लोगों को सलाह और जागरूकता के लिए अभियान से सुधारने का प्रयास हो रहा है। इसके अलावा इलाज भी किया जा रहा है।
सिगरेट पीने से 10 और बीड़ी से 6 साल कम हो रही आयु
गुटखा के साथ ही सिगरेट और बीड़ी पीने वालों की भी संख्या कम नही है। नशे की चपेट में शामिल लोगों में सिगरेट व बीडी पीने वाले भी शामिल है। सिगरेट पीने वालों के जीवन की आयु 10 साल और बीड़ी पीने वालों की आयु 6 साल कम हो रही है। इस तरह के एक लाख 61 हजार लोग हैं जो गुटखा के साथ ही सिगरेट व बीड़ी का प्रयोग कर रहे हैं। मुंह व गले के कैंसर के 80 फीसदी मामलों की वजह तंबाकू है।
धूम्रपान से 41 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठा रहे हैं लोग
गुटखा, तंबाकू उत्पाद और सिगरेट व बीडी पीने वालों लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। जिले के 3.22 लाख धूम्रपान के कारण करीब 41 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। साल भर में इतनी भारी भरकम राशि लोग ऐसे उत्पाद पर खर्च कर रहे हैं जो उनके जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। इससे करीब 47 हजार लोग गरीबी के शिकार भी हो चुके हैं।
दृढ़ निश्चय से छूट सकती है लत, बचें गंभीर रोग से
गुटखा, तंबाकू या फिर सिगरेट व बीड़ी से कई गंभीर रोग हो रहे हैं। कैंसर से पीड़ित लोगों में अधिकांश धूम्रपान करने वाले ही हैं। रोगों के साथ ही आर्थिक नुकसान भी लोग उठा रहे हैं। अस्पताल में लोग आते हैं लत छुड़ाने के लिए उन्हें जागरूक किया जाता है। दृढ़ निश्चय करके लोग पहल करें और नशे का विरोध करें तो लत छूट सकती है। जिले में बड़ी संख्या में लोग नशे की लत के शिकार हैं और काफी लोगों को जागरूक किया गया है। अब इसके लिए संभ्रांत लोगों को आगे आना होगा। -डॉ. मलिक आलमगीर, एसीएमओ व प्रभारी तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम
विज्ञापन
जिले में गुटखा व तंबाकू उत्पाद का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी स्तर से कई तरह के प्रयोग रोकथाम के लिए हुए लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। हर साल करीब 20 से 25 हजार लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो तंबाकू उत्पाद का प्रयोग करने लगते हैं। इसके अलावा तंबाकू उत्पाद छोड़ने वालों की संख्या एक से दो हजार लोगों की ही है। शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों में गुटखा और तंबाकू उत्पाद बेचने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
शहर में ही अकेले दो हजार से अधिक गुमटियों और दुकानों पर पान के साथ गुटखा की बिक्री होती है और दुकानदार भी कहते हैं कि बढ़ी संख्या में लोग गुटखा का प्रयोग कर रहे हैं। पान भी लगवाने के बाद दो से चार गुटखा खरीद लेते हैं। इसी तरह शहर के अलावा जिले के करीब 40 कस्बों में एक हजार से अधिक दुकानें हैं तो 8 हजार से अधिक दुकानें गांवों में हैं। जिले की 1054 पंचायतों में करीब 12 हजार मजरों में से 8 हजार मजरों में दुकानें हैं जहां पर गुटखा की बिक्री होती है। गुटखा के निर्माण और बिक्री पर कोई रोक नहीं है, लेकिन गुटखा के पाउच पर कैंसर के लोगों के साथ ही चेतवानी लिखी होती है। चेतावनी की अनदेखी कर लोग शौक में गुटखा चबा रहे हैं।
विज्ञापन
हाल के दिनों में जागरूकता के लिए स्कूल-कॉलेजों से लेकर गांवों तक तंबाकू चबाने के रोकथाम के लिए अभियान चलाया गया। करीब एक लाख बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग ने शपथ भी दिलाई, रोकथाम के उपाय का असर इसके बाद भी गावों में नही दिख रहा है। गुटखा के प्रयोग से मुंह के कैंसर से पीड़ित एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह जहर भी अधिक घातक है। आज उसके चेहरे की सूरत बिगड़ गई है। ऑपरेशन हुआ और मुंह खुलने में अभी भी दिक्कत है। इसी तरह बेलसर के दुकानदार राम भरोसे कहते हैं कि हम लोग बेचते तो हैं लेकिन प्रयोग से नुकसान तो है ही। लोग गुटखों पर लिखी चेतावनी की अनदेखी करते हैं।
धूम्रपान 1.61 लाख लोगों की जिंदगी के लिए बना खतरा
जिले मेें वैसे तो 3.22 लाख लोग धूम्रपान का सेवन करते हैं, लेकिन 1.61 लाख लोगों की जिदंगी पर धूम्रपान पर खतरा मंडरा रहा है। ये लोग जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों पर धूम्रपान से होने वाले विभिन्न बीमारियों का इलाज करा रहे हैं। तंबाकू नियंत्रण के लिए संचालित कार्यक्रमों से इन लोगों को सलाह और जागरूकता के लिए अभियान से सुधारने का प्रयास हो रहा है। इसके अलावा इलाज भी किया जा रहा है।
सिगरेट पीने से 10 और बीड़ी से 6 साल कम हो रही आयु
गुटखा के साथ ही सिगरेट और बीड़ी पीने वालों की भी संख्या कम नही है। नशे की चपेट में शामिल लोगों में सिगरेट व बीडी पीने वाले भी शामिल है। सिगरेट पीने वालों के जीवन की आयु 10 साल और बीड़ी पीने वालों की आयु 6 साल कम हो रही है। इस तरह के एक लाख 61 हजार लोग हैं जो गुटखा के साथ ही सिगरेट व बीड़ी का प्रयोग कर रहे हैं। मुंह व गले के कैंसर के 80 फीसदी मामलों की वजह तंबाकू है।
धूम्रपान से 41 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठा रहे हैं लोग
गुटखा, तंबाकू उत्पाद और सिगरेट व बीडी पीने वालों लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। जिले के 3.22 लाख धूम्रपान के कारण करीब 41 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। साल भर में इतनी भारी भरकम राशि लोग ऐसे उत्पाद पर खर्च कर रहे हैं जो उनके जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। इससे करीब 47 हजार लोग गरीबी के शिकार भी हो चुके हैं।
दृढ़ निश्चय से छूट सकती है लत, बचें गंभीर रोग से
गुटखा, तंबाकू या फिर सिगरेट व बीड़ी से कई गंभीर रोग हो रहे हैं। कैंसर से पीड़ित लोगों में अधिकांश धूम्रपान करने वाले ही हैं। रोगों के साथ ही आर्थिक नुकसान भी लोग उठा रहे हैं। अस्पताल में लोग आते हैं लत छुड़ाने के लिए उन्हें जागरूक किया जाता है। दृढ़ निश्चय करके लोग पहल करें और नशे का विरोध करें तो लत छूट सकती है। जिले में बड़ी संख्या में लोग नशे की लत के शिकार हैं और काफी लोगों को जागरूक किया गया है। अब इसके लिए संभ्रांत लोगों को आगे आना होगा। -डॉ. मलिक आलमगीर, एसीएमओ व प्रभारी तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम