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Ghazipur News: कहीं टेक्नीशियन तो कहीं प्लेट के अभाव में धूल फांक रही एक्स-रे मशीन
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गाजीपुर। जिले के प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे की व्यवस्था लंबे समय से खराब पड़ी है। स्थिति यह है कि कहीं टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है तो कहीं प्लेट के अभाव में मशीन धूल फांक रही है। भदौरा और बरूईन में मशीन ताले में बंद है। मुहम्मदाबाद में प्लेट न होने के कारण एक्स-रे फिल्म मरीजों को मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है। सैदपुर में हमेशा बिजली न होने का बहाना बनाकर मरीजों को निजी केंद्रों पर भेज दिया जाता है।
बिहार से सटे जनपद के अंतिम छोर पर स्थित भदौरा ब्लाॅक में स्थापित सीएचसी पर दो दर्जन से अधिक गांव चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए निर्भर हैं। यहां करीब छह माह पूर्व आई एक्स-रे मशीन ताले मेंं बंद पड़ी हुई है। वजह यहां अब तक एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। यही हाल जमानिया तहसील के बरूईन सीएचसी का है। टेक्नीशियन की तैनाती न होने से करीब चार वर्षों से मशीन धूल फांक रही है। बाराचवर और गोड़उर सीएचसी की भी स्थिति जस की तस है। सबसे खराब स्थिति मुहम्मदाबाद सीएचसी की है। कागजी कार्रवाई में यहां की चिकित्सकीय व्यवस्था बेहतर है, जबकि स्थिति यह है कि यहां तीन माह से एक्स-रे प्लेट ही नहीं है। मरीजों को उनके मोबाइल पर एक्स-रे फिल्म उपलब्ध कराई जाती है। सैदपुर सीएचसी की स्थिति तो ऐसी है कि एक्स-रे कराने पहुंचे मरीजों को बिजली की सुविधा न होने का हवाला देकर वापस कर दिया जाता है। कमोबेश यह स्थिति अधिकतर जगहों पर है।
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बिहार से सटे जनपद के अंतिम छोर पर स्थित भदौरा ब्लाॅक में स्थापित सीएचसी पर दो दर्जन से अधिक गांव चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए निर्भर हैं। यहां करीब छह माह पूर्व आई एक्स-रे मशीन ताले मेंं बंद पड़ी हुई है। वजह यहां अब तक एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। यही हाल जमानिया तहसील के बरूईन सीएचसी का है। टेक्नीशियन की तैनाती न होने से करीब चार वर्षों से मशीन धूल फांक रही है। बाराचवर और गोड़उर सीएचसी की भी स्थिति जस की तस है। सबसे खराब स्थिति मुहम्मदाबाद सीएचसी की है। कागजी कार्रवाई में यहां की चिकित्सकीय व्यवस्था बेहतर है, जबकि स्थिति यह है कि यहां तीन माह से एक्स-रे प्लेट ही नहीं है। मरीजों को उनके मोबाइल पर एक्स-रे फिल्म उपलब्ध कराई जाती है। सैदपुर सीएचसी की स्थिति तो ऐसी है कि एक्स-रे कराने पहुंचे मरीजों को बिजली की सुविधा न होने का हवाला देकर वापस कर दिया जाता है। कमोबेश यह स्थिति अधिकतर जगहों पर है।
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