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कटान से बढ़ी लोगों की चिंता

Fri, 14 Jul 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर Updated Fri, 14 Jul 2017 11:21 PM IST
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Worried people of Katan
करंडा के बडहरिया गांव के पास हो रहा गंगा में कटान।
गंगा सहित सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। एक तरफ जहां करंडा ब्लाक के तटवर्ती इलाकों में हो रहे कटान से लोगों के रातों की नींद उड़ गई है। वहीं मुहम्मदाबाद के सेमरा और शिवरायकापुरा और गहमर गांव के लोगों में बढ़ते जलस्तर को देख माथे पर चिंता की लकीर खिंच गईं। इन ब्लाकों के लोगों का कहना है कि अगर इस बार गंगा में बाढ़ आई तो तटवर्ती इलाकों के गांव गंगा में समाहित हो जाएंगे।  पुलिस प्रशासन भी इसको लेकर काफी सतर्क है। थाना पुलिस और डायल 100 के पुलिस कर्मी गंगा के किनारे पहुंचकर किनारे बसे लोगों को समय से सतर्क रहने की भी बात कह रहे हैं।
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गहमर संवाददाता के अनुसार गंगा के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देख तटवर्ती इलाकों के लोगों में दहशत व्याप्त है। वहीं गंगा से सटे गांवों और झोपड़ी डालकर रहने वाले लोग पूर्व में आई बाढ़ की भयावहता को सोचकर सिहर उठ रहे हैं।करंडा संवाददाता के अनुसार सातवें शुक्रवार को भी कटान का क्रम जारी रहा। कटान से रफीपुर के अभिषेक यादव, अजय यादव, पप्पू यादव और शेरपुर तुलसीपुर में धनंजय सिंह, रमाशंकर सिंह, गोपाल सिंह, उमा शकर सिंह, राम अवतार सिंह, कृष्णा सिंह, राधेश्याम सिंह, कमलेश सिंह, योगेश सिंह, राजेश सिंह एवं घनश्याम सिंह तथा बड़हरिया के सुखराम,राजनरायन यादव, हरिदयाल यादव, तेजनरायन यादव, सुदामा तथा प्रमोद की लगभग 12 बीघे जमीन गंगा में समाहित हो गई।
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प्रतिदिन हो रही कटान से ग्रामीणों का तनाव बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो सरकार ने कुछ किया और ना ही जनप्रतिनिधियों ने कुछ किया। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों के भी आने की सूचना थी, लेकिन वो लोग पुरैना से ही घूम कर चले गए।
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कटान प्रभावित गांवों तक भी नहीं पहुंचे। कटान से अब तक 25 से 30 बीघे खेती योग्य भूमि गंगा में समाहित हो चुकी है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार गंगा के जलस्तर में हो रहे बढ़ाव से सेमरा और शिवरायकापुरा गांव के लोगों में दहशत व्याप्त है। वर्ष 2013 और 2016 में आई बाढ़ के पीड़ित परिवार आज भी विस्थापन का जीवन-यापन कर रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बार बाढ़ आई तो सेमरा का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार अवगत कराने के बाद भी आज तक क्षतिग्रस्त हो चुके ठोकर की भी मरम्मत नहीं कराई गई।

 
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