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रैली को ऐतिहासिक बनाने में जुटे सपाजन
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 19 Nov 2016 11:49 PM IST
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जिले में आगामी 23 नवंबर को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की रैली को ऐतिहासिक रूप देकर सपा नेता पिछले दिनों पार्टी के भीतर हुए घमासान की भरपाई करने में जुट गए हैं। भाजपा की परिवर्तन रैली के जवाब में सपाजन उससे ज्यादा भीड़ एकत्रित कर यह संदेश देने की कोशिश में जुटे हैं कि प्रदेश में दोबारा सपा की ही सरकार बनेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व को कोई दल चुनौती देने की स्थिति में नहीं है और आरटीआई मैदान की रैली से सपा के नेता पूरे पूर्वांचल को यह संदेश देना चाहते है कि अभी भी पूर्वांचल में सपा का दबदबा है।
समाजवादी पार्टी ने चुनाव अभियान की शुरुआत गाजीपुर से करने का फैसला लेकर जिले के नेताओं पर भरोसा जताया है। इस कारण पार्टी के नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों से भारी भीड़ ले जाकर नेताजी के उस भरोसे पर खरा उतरने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। बड़ी नोट बंद करने से आमजन को हो रही कठिनाइयों को भी सपा इस रैली की सफलता के लिए भुनाने में लगी है। नोट बंदी के चलते किसानों को खाद-बीज की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते रबी की बुआई का कार्य ठप पड़ा हुआ है। किसान, छोटे दूकानदार एव दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर इस समय बेकार हैं। उन्हें समझाकर रैली में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में मंत्री स्तर के लोगों को प्रभारी बनाकर स्थानीय नेताओं में सामंजस्य बनाकर सभी को रैली को सफल बनाने की जिम्मेदारी दे दी गई है।
कौएद का विलय सपा में हो जाने के बाद जिले के सातों विधानसभा में सपा के विधायक हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के पुराने प्रदर्शन को बरकरार रखने की कठिन चुनौती है। केंद्र सरकार की तरफ से गाजीपुर में विकास की झड़ी लगा देने एवं जिलों की मुख्य सड़कों के खस्ताहाली के कारण स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए सपा के नेता अपनी सीटों को बचाने को लेकर काफी परेशान हैं।
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23 की रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के साथ-साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भी आने से सपा के नेता मुख्यमंत्री से गाजीपुर जनपद के विकास के लिये कोई बड़ी घोषणा कराने के प्रयास में हैं। ताकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विकास पुरुष बताकर सपा अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रख सके। रैली को सफल बनाने के लिए दौरा कर रहे सपा के नेता अल्पसंख्यक वर्ग में यह संदेश देने का प्रयास कर रहे है कि सपा मुखिया सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध गाजीपुर की रैली से जंग का एलान करेंगे। उन्हें समझा बुझाकर अधिक से अधिक अल्पसंख्यक लोगों की भीड़ रैली में ले जाने के लिए प्रयासरत हैं।
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समाजवादी पार्टी ने चुनाव अभियान की शुरुआत गाजीपुर से करने का फैसला लेकर जिले के नेताओं पर भरोसा जताया है। इस कारण पार्टी के नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों से भारी भीड़ ले जाकर नेताजी के उस भरोसे पर खरा उतरने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। बड़ी नोट बंद करने से आमजन को हो रही कठिनाइयों को भी सपा इस रैली की सफलता के लिए भुनाने में लगी है। नोट बंदी के चलते किसानों को खाद-बीज की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते रबी की बुआई का कार्य ठप पड़ा हुआ है। किसान, छोटे दूकानदार एव दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर इस समय बेकार हैं। उन्हें समझाकर रैली में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में मंत्री स्तर के लोगों को प्रभारी बनाकर स्थानीय नेताओं में सामंजस्य बनाकर सभी को रैली को सफल बनाने की जिम्मेदारी दे दी गई है।
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कौएद का विलय सपा में हो जाने के बाद जिले के सातों विधानसभा में सपा के विधायक हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के पुराने प्रदर्शन को बरकरार रखने की कठिन चुनौती है। केंद्र सरकार की तरफ से गाजीपुर में विकास की झड़ी लगा देने एवं जिलों की मुख्य सड़कों के खस्ताहाली के कारण स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए सपा के नेता अपनी सीटों को बचाने को लेकर काफी परेशान हैं।
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23 की रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के साथ-साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भी आने से सपा के नेता मुख्यमंत्री से गाजीपुर जनपद के विकास के लिये कोई बड़ी घोषणा कराने के प्रयास में हैं। ताकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विकास पुरुष बताकर सपा अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रख सके। रैली को सफल बनाने के लिए दौरा कर रहे सपा के नेता अल्पसंख्यक वर्ग में यह संदेश देने का प्रयास कर रहे है कि सपा मुखिया सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध गाजीपुर की रैली से जंग का एलान करेंगे। उन्हें समझा बुझाकर अधिक से अधिक अल्पसंख्यक लोगों की भीड़ रैली में ले जाने के लिए प्रयासरत हैं।