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Ghazipur News: महाकुंभ में स्नान करके ही जाएंगे, चाहे जितनी परीक्षा देनी पड़े

Thu, 30 Jan 2025 12:02 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2025 12:02 AM IST
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Will go to Mahakumbh only after taking bath, no matter how many exams one has to face.
महाकुंभ हादसे के बाद जिले की सीमा में जगह-जगह फंसे असम, बंगाल, झारखंड, नेपाल, बिहार से आए तीर्थयात्री परेशान तो दिखे लेकिन हताश नहीं। थकान और तमाम मुश्किलों के बावजूद उनकी आस्था में रत्तीभर भी कमी नहीं थी। श्रद्धालुओं के मुंह से एक ही वाक्य सुनने को मिलता कि अब इतनी दूर आए हैं तो महाकुंभ में स्नान करके ही जाएंगे। चाहे जितनी परीक्षा देनी पड़े।
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ऐसा कहने वाले श्रद्धालुओं में नेपाल के जनकपुर की रहने वाली 70 वर्ष से अधिक उम्र की अनुराधा देवी भी रहीं। उन्होंने इच्छा जताई कि वह तीर्थराज प्रयाग की भूमि को नमन करना चाहती हैं।
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144 वर्ष बाद लगे महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने की इच्छा पूरी करने के लिए वह अपने बेटे समेत 40 लोगों के जत्थे के साथ बस से प्रयागराज के लिए रवाना हुईं थी लेकिन लहुरी काशी (गाजीपुर) में ही प्रशासन ने उनकी गाड़ी को आईटीआई मैदान में घुमवा दिया। इससे वह निराश जरूर हुईं लेकिन यहां से गुजरी गंगा के बारे में जानकर खुश भी हो गईं। जत्थे के साथ उन्होंने ददरी घाट आकर गंगा में स्नान किया।
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अमर उजाला से बातचीत में बुजुर्ग अनुराधा देवी ने कहा कि जीवन में पहली बार बेटा प्रयागराज में लगे महाकुंभ के लिए ले जा रहा था लेकिन वहां हादसा होने से जिला प्रशासन ने रोक दिया। शाही स्नान न कर पाने का काफी मलाल है लेकिन यहां गंगा स्नान कर काफी शांति महसूस कर रही हूं। रोक हटने के बाद प्रयागराज के लिए निकलेंगे।
इसी तरह का उत्साह नेपाल के परसा जिले से 42 लोगों के जत्थे के साथ गाजीपुर पहुंचे संजय ओझा का भी था। उनका जत्था महराजगंज पुलिस चौकी परिसर में अपनी बस खड़ी कर रुका है। उनका कहना था कि सभी लोगों ने मिलकर किराये पर बस हायर की है। बस मालिक को रोजाना 20 हजार रुपये और तेल का अलग से देने की बात तय है। सभी ने मिलकर छह दिन का किराया भी दे दिया है।
योजना थी कि मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में स्नान के बाद काशी विश्वनाथ का दर्शन करेंगे और फिर नेपाल लौट जाएंगे लेकिन यहां से आगे नहीं बढ़ पाए। हालांकि हमने तय कर लिया है कि चाहे जितने दिन लग जाएं, प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करके ही लौटेंगे। असम के सिल्चर से आए शंकर शाही मुहूर्त में स्नान करने का सपना संजोए थे, जो पूरा न होने पर निराश दिखे।
उन्होंने कहा कि 1700 किमी का सफर पूरा कर आ चुका हूं तो महाकुंभ स्नान भी जरूर करूंगा। कुछ इसी तरह का दृढ़ संकल्प जनकपुर नेपाल के रहने वाले भोगेंद्र कुमार शाह में भी देखने को मिला।

पश्चिम बंगाल के रायगढ़ से आए उपेंद्र घोष, संजय सील, नेपाल के राजेंद्र महतो, सुनसुरी नेपाल के दीपक कुमार मेहता और नेपाल से आई कांति देवी ने भी कहा कि अब महाकुंभ का स्नान करके ही जाएंगे।
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