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Ghazipur News: बीएचयू और टाटा जैसे संस्थानों में लंबी वेटिंग, महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारियों से बचाई जान

Wed, 01 Jul 2026 01:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 01:21 AM IST
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While institutions like BHU and Tata Institutes face long waiting times, doctors at Maharishi Vishwamitra Medical College are saving lives from rare diseases.
डॉक्टर्स डे : डॉ. यू विगनेश। स्रोत.. स्वंय - फोटो : samvad
गाजीपुर। बीएचयू व टाटा जैसे बड़े संस्थानों में लंबी प्रतीक्षा सूची और तीन से चार महीने तक के इंतजार से मौत के करीब पहुंच रहे मरीजों को महर्षि विश्वामित्र के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है।
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ऐसी दुर्लभ बीमारी, जो 86 हजार लोगों में किसी एक व्यक्ति को होती है, इसकी सफल सर्जरी कर मरीज को जान बचाई। करीब साढ़े पांच वर्ष से मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवा दे रहे मौखिक और मैक्सिलोफेशियल सर्जन और डेंटल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यू विग्नेश ने हेमिमैंडिबुलर हाइपरप्लासिया की सफल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई थी।
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यही नहीं ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रकाश यादव ने थायरॉइड कैंसर का सफल ऑपरेशन कर महिला मरीज को नया जीवन देने का काम किया। ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रकाश यादव ने बताया कि प्रमिला देवी (58) करीब आठ-दस महीने से गर्दन में सूजन, दर्द से परेशान थीं। उनके तीमारदारों ने बताया कि पूर्व में बीएचयू और टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में भी परामर्श लिया गया था, जहां ऑपरेशन के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि बताई गई।
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इधर, धीरे-धीरे मरीज को सांस लेने व खाने में परेशानी बढ़ती जा रही थी। मरीज की बढ़ती परेशानी को देख विस्तृत जांच एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद मरीज को भर्ती कर जटिल सर्जरी की योजना बनाई गई। साथ ही जटिल थायरॉइड कैंसर का सफल ऑपरेशन किया। वर्तमान समय में महिला मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है।
मौखिक और मैक्सिलोफेशियल सर्जन और डेंटल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यू विग्नेश ने बताया कि चेहरे की दुर्लभ बीमारी हेमिमैंडिबुलर हाइपरप्लासिया जैसे बीमारी से एक 24 वर्षीय युवती पीड़ित थी। उनका एक तरफ का हिस्सा टेढ़ा होता जा रहा था। जांच में यह दुर्लभ बीमारी सामने आई।
थ्री डी सर्जिकल सॉफ्टवेयर के जरिये कंप्यूटर में बोन कटिंग की गाइड तैयार की गई, इससे यह पता चला कि सर्जरी के बाद मरीज का चेहरा कैसा दिखाई पड़ेगा। इसके बाद सफल सर्जरी की गई। यही नहीं रजदेपुर शहरी के रहने वाले 31 वर्षीय बलवंत जिनके निचले जबड़े के एक तरफ एमेलोब्लास्टोमा ट्यूमर था।

ऐसे में सर्जरी में एक तरफ का जबड़ा काटकर हटाना पड़ा। इसके साथ ही जबड़े का ज्वाइंट भी डिसआर्टिकुलेशन किया गया। दूसरी सर्जरी के दौरान थ्रीडी कस्टमाइज्ड इम्प्लांट के माध्यम से जबड़े के पुनर्निर्माण किया गया। आज मरीज पूरी तरह स्वस्थ और अपना जीवन-यापन सामान्य तौर पर कर रहे हैं।
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