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थमे बसों के पहिए, अटकी गृहस्थी की गाड़ी

Mon, 20 Jun 2022 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 11:39 PM IST
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Wheels of buses stopped, family car stuck
अग्निपथ योजना के विरोध और बवाल के चलते रोडवेज के साथ निजी बसों का संचालन भी ठप रहा। यह स्थिति तीन दिनों से बनी हुई है। सुबह से दोपहर दो बजे तक बसों का आवागमन न होने से चालक, परिचालक और खलासी के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। सोमवार को भी बसों का संचालन सुबह से बंद रहा है। ऐसे में वाराणसी तक फर्राटा भरने वाली सभी बस स्टैंड में खड़ी रही। वहीं पुलिस प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग स्टैंड के पास कर दी गई थी। दोपहर दो बजे के बाद बसों का संचालन तो शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही बसों ही वाराणसी के लिए रवाना हो सकी। ऐसे में शेष बसों के चालक, परिचालक और खलासियों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी।
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गाजीपुर से वाराणसी के लिए प्रत्येक पांच मिनट पर एक निजी बस लंका बस स्टैंड के लिए रवाना होती है। देखा जाए तो 80 बसों का संचालन गाजीपुर- वाराणसी और वाराणसी- गाजीपुर के लिए किया जाता है। स्थिति यह है कि 17 जून की सुबह से ही बसों के संचालन पर रोक लगा दिया गया। दोपहर बाद करीब तीन बजे से लेकर देर शाम तक मात्र 20 ही बस का संचालन हो पाया। वहीं 19 जून की सुबह से ही यही स्थिति बनी हुई थी। शाम चार बजे 16 बसों का संचालन हो पाया। शेष बसों का संचालन न हो पाने की स्थिति उनके चालकों, परिचालकों एवं खलासियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने लगा है। बसों के संचालन से चालक को जहां प्रतिदिन के हिसाब से 600, परिचालक को 500 और खलासी को 400 रुपये मिलते हैं। अग्निपथ योजना का विरोध और बवाल ने इन लोगों के पेट की आग को बढ़ा दी है। आर्थिक संकट से जूझ रहे ये लोग मायूस होकर बसों के सफल संचालन का इंतजार कर रहे हैं। निजी बस स्टैंड इंचार्ज जगत नारायण ने बताया कि बसों का संचालन पूर्ण रूप से नहीं होने से काफी दिक्कत का सामना करने के साथ आर्थिक दंश भी झेलना पड़ रहा है।
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बसों का संचालन बंद हो जाने से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन कार्य करने पर ही पैसा मिलता है। ऐसे में आर्थिक दंश झेलना पड़ रहा है। - रामभजन यादव, चालक
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जब- तक बस नहीं चलेगी, तब- तक पैसा भी नहीं मिलेगा। दो- तीन से काफी स्थिति खराब है। अब समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे अपना और परिवार का पेट पाला जाए।- भानू प्रताप, चालक
तीन दिनों से कम ही बस चल रही है। कोई महीने में मानदेय अथवा वेतन तो मिलना नहीं है। प्रतिदिन की तर्ज पर पैसा बस संचालकों द्वारा दिया जाता है। ऐसे में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।- अशोक पाठक, परिचालक

अग्निपथ योजना के चलते जिला प्रशासन द्वारा वाराणसी जाने से बसों को रोक दिया है। ऐसे में आर्थिक रूप से काफी स्थिति खराब हो चुकी है। स्वंय और परिजनों को दो जून की रोटी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।- विद्याशंकर, खलासी
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