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Ghazipur News: चार-छह घंटे का करें इंतजार या लगाएं जुगाड़...जिला अस्पताल में हैं बेड भरे
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भर्ती होने वाले मरीजों की औसतन संख्या सौ के करीब
इमरजेंसी में मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जनपद में इन दिनों वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। कोई ऐसा घर नहीं है जहां कोई न कोई बीमार न हो। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में बेड कम पड़ गए हैं। मरीजों को बेड के लिए तीन से छह घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में तीमारदारों को बेड के लिए जुगाड़ लगाना पड़ रहा है। वहीं, जिम्मेदार भी बेड खाली होने पर मिलने या फिर ज्यादा जल्दी होने पर रेफर करवाने की सलाह देकर पल्ला झ़ाड़ते नजर आ रहे हैं।
इस समय 200 से अधिक बेड है,जो मरीजों से भरे हुए हैं। अस्पताल में रोजाना ढाई से तीन हजार की ओपीडी होे रही है। वहीं, भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी औसतन सौ के आसपास ही है। जबकि डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या इससे कम है। ऐसे में अस्पताल में बेड को लेकर विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है।
लगातार आ रही शिकायतों का सच जानने के लिए मंगलवार को पड़ताल की गई तो तो सरकार के दावे की कलई खोलने वाली तस्वीरें सामने आई। इमरजेंसी में ही मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा था। गंभीर मरीजों को सीधे रेफर कर दिया जा रहा था। यही नहीं, कोई तीन तो कोई छह घंटे इंतजार करने की बात कर रहा था। मरीजों के तीमारदारों का कहना था कि उन्हें दो टूक जवाब दिया जा रहा है कि बेड खाली नहीं है। इंतजार करिए, बेड खाली होने पर दिया जाएगा या मरीज को रेफर करवा लीजिए। ऐसे में तीमारदार बेड के लिए जुगाड़ खोजने में लगे हुए थे। कुछ तो यहां तक पता लगाने में लगे थे कि किस वार्ड में बेड खाली है, जिसके बाद मशक्कत करके अपने मरीज को भर्ती करा रहे थे।
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मैं अपने पति को लेकर बच्चे के साथ लेकर आई हूं। वह बुखार से पीड़ित हैं। छह बजे आई थी, लेकिन किसी तरह दोपहर में बारह बजे बेड मिला है। अब भगवान चाहेंगे तो आराम हो जाएगा।- निर्मला देवी, भगौतीपुर
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मेरी मां का वाराणसी में ऑपरेशन हुआ था। लेकिन, अचानक तबीयत खराब हो गई। जिला अस्पताल लाया तो बेड न होने की बात कही गई। अनुरोध किया तो रेफर करने को कह रहे थे। हालांकि तीन घंटे में मैंने बेड खोज लिया और उन्हें बताया, जिससे बेड मिल गया है।-विभोर, धौरहरा, रामपुर
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अस्पताल में व्यवस्था बहुत खराब हैं। मैं पिछले तीन घंटे से इमरजेंसी में पड़ा हूं। लेकिन, बेड नहीं मिल पाया है। जबकि मेरी तबीयत ठीक नहीं हैं। अधिकारियों को देखना चाहिए।-जमुना पांडेय, अटेरिया करंडा
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अस्पताल में बेड की कमी है। इसे लेकर प्राचार्य से बात हो चुकी है। कुछ बेड उपलब्ध कराया गया। लेकिन, अभी भी कमी बरकरार है।- डा. राजेश सिंह, सीएमएस
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अस्पताल में बेड की कुछ कमी हो गई है। जैसे ही कोई मरीज डिस्चार्ज हो रहा वहां दूसरे मरीज को बेड अलाॅट कर दिया जा रहा है। - डॉ. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज
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डेंगू वार्ड में 10 मरीज भर्ती
जनपद में स्वास्थ्य विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को डेंगू के नये मरीज नहीं मिले हैं। मौजूदा समय में 98 एक्टिव केस हैं, जिनमें 83 ठीक हो चुके हैं। वहीं, जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड में 25 बेड हैं, जहां 10 मरीजों का इलाज चल रहा है।
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इमरजेंसी में मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जनपद में इन दिनों वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। कोई ऐसा घर नहीं है जहां कोई न कोई बीमार न हो। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में बेड कम पड़ गए हैं। मरीजों को बेड के लिए तीन से छह घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में तीमारदारों को बेड के लिए जुगाड़ लगाना पड़ रहा है। वहीं, जिम्मेदार भी बेड खाली होने पर मिलने या फिर ज्यादा जल्दी होने पर रेफर करवाने की सलाह देकर पल्ला झ़ाड़ते नजर आ रहे हैं।
इस समय 200 से अधिक बेड है,जो मरीजों से भरे हुए हैं। अस्पताल में रोजाना ढाई से तीन हजार की ओपीडी होे रही है। वहीं, भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी औसतन सौ के आसपास ही है। जबकि डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या इससे कम है। ऐसे में अस्पताल में बेड को लेकर विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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लगातार आ रही शिकायतों का सच जानने के लिए मंगलवार को पड़ताल की गई तो तो सरकार के दावे की कलई खोलने वाली तस्वीरें सामने आई। इमरजेंसी में ही मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा था। गंभीर मरीजों को सीधे रेफर कर दिया जा रहा था। यही नहीं, कोई तीन तो कोई छह घंटे इंतजार करने की बात कर रहा था। मरीजों के तीमारदारों का कहना था कि उन्हें दो टूक जवाब दिया जा रहा है कि बेड खाली नहीं है। इंतजार करिए, बेड खाली होने पर दिया जाएगा या मरीज को रेफर करवा लीजिए। ऐसे में तीमारदार बेड के लिए जुगाड़ खोजने में लगे हुए थे। कुछ तो यहां तक पता लगाने में लगे थे कि किस वार्ड में बेड खाली है, जिसके बाद मशक्कत करके अपने मरीज को भर्ती करा रहे थे।
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मैं अपने पति को लेकर बच्चे के साथ लेकर आई हूं। वह बुखार से पीड़ित हैं। छह बजे आई थी, लेकिन किसी तरह दोपहर में बारह बजे बेड मिला है। अब भगवान चाहेंगे तो आराम हो जाएगा।- निर्मला देवी, भगौतीपुर
मेरी मां का वाराणसी में ऑपरेशन हुआ था। लेकिन, अचानक तबीयत खराब हो गई। जिला अस्पताल लाया तो बेड न होने की बात कही गई। अनुरोध किया तो रेफर करने को कह रहे थे। हालांकि तीन घंटे में मैंने बेड खोज लिया और उन्हें बताया, जिससे बेड मिल गया है।-विभोर, धौरहरा, रामपुर
अस्पताल में व्यवस्था बहुत खराब हैं। मैं पिछले तीन घंटे से इमरजेंसी में पड़ा हूं। लेकिन, बेड नहीं मिल पाया है। जबकि मेरी तबीयत ठीक नहीं हैं। अधिकारियों को देखना चाहिए।-जमुना पांडेय, अटेरिया करंडा
अस्पताल में बेड की कमी है। इसे लेकर प्राचार्य से बात हो चुकी है। कुछ बेड उपलब्ध कराया गया। लेकिन, अभी भी कमी बरकरार है।- डा. राजेश सिंह, सीएमएस
अस्पताल में बेड की कुछ कमी हो गई है। जैसे ही कोई मरीज डिस्चार्ज हो रहा वहां दूसरे मरीज को बेड अलाॅट कर दिया जा रहा है। - डॉ. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज
डेंगू वार्ड में 10 मरीज भर्ती
जनपद में स्वास्थ्य विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को डेंगू के नये मरीज नहीं मिले हैं। मौजूदा समय में 98 एक्टिव केस हैं, जिनमें 83 ठीक हो चुके हैं। वहीं, जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड में 25 बेड हैं, जहां 10 मरीजों का इलाज चल रहा है।