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खजुरहट के ग्रामीणों ने विकास भवन पर किया प्रदर्शन, सौंपा पत्रक
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गाजीपुर। सादात विकासखंड के खजुरहट गांव में शौचालय निर्माण और विकास कार्यों के नाम पर हुई अनियमितता को लेकर ग्रामीणों ने सोमवार को विकास भवन धरना-प्रदर्शन किया। मामले की जांच ईमानदार उच्चाधिकारी से कराने की मांग की। वहीं सीडीओ को संबोधित पत्रक परियोजना निदेशक विजय प्रकाश वर्मा को सौंपा। इस पर उन्होंने आश्वस्त किया कि तत्काल उचित कार्रवाई के साथ उच्च स्तरीय जांच होगी। ग्रामीणों ने चेताया कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं होती है, तो भूख हड़ताल शुरू किया जाएगा।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि ग्राम सभा में व्याप्त भ्रष्टाचार से जुड़े समस्याओं से संदर्भित प्रार्थना-पत्र बीते ढाई माह पूर्व शपथ-पत्र के साथ शिकायत-पत्र तत्कालीन डीएम ओम प्रकाश आर्य को दिया गया था। इस पर उन्होंने बीते छह जुलाई को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सुनील कुमार सिंह को जांच अधिकारी नामित करते हुए 30 दिन के अंतर्गत जांच आख्या प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया था। जबकि जांच कार्रवाई में हिला-हवाली करते हुए जांच अधिकारी ने अपने सहयोगी उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजेंद्र प्रसाद के साथ जांच करने पहुंचे। जब उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी नामित सदस्य भी नहीं है। तीस दिन में जिस जांच को होनी थी, करीब दो माह बाद बीते छह सितंबर को ग्राम प्रधान और सचिव की अनुपस्थिति में छह बिंदुओं पर ग्रामीणों से मौखिक वार्ता किए। इसमें मृत लोगों को दिया गया शौचालय, ग्राम सभा में निवास न करने वाले विभिन्न जाति के लोगों की जानकारी दी गई। साथ ही कई अनियमितता के बारे में भी ग्रामीणों ने बताया। पुन: 13 सितंबर को जांच अधिकारी पहुंचे और ग्राम प्रधान औय सचिव की अनुपस्थिति में कोरोम पूर्ति में लगे रहे। यही नहीं और फाइल पढ़कर सुनाने लगे की कार्य पूरा है न, इस पर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराते हुए जांच बिंदु पर कार्रवाई सुनिश्चि करने की मांग करने लगे।
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इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि ग्राम सभा में व्याप्त भ्रष्टाचार से जुड़े समस्याओं से संदर्भित प्रार्थना-पत्र बीते ढाई माह पूर्व शपथ-पत्र के साथ शिकायत-पत्र तत्कालीन डीएम ओम प्रकाश आर्य को दिया गया था। इस पर उन्होंने बीते छह जुलाई को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सुनील कुमार सिंह को जांच अधिकारी नामित करते हुए 30 दिन के अंतर्गत जांच आख्या प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया था। जबकि जांच कार्रवाई में हिला-हवाली करते हुए जांच अधिकारी ने अपने सहयोगी उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजेंद्र प्रसाद के साथ जांच करने पहुंचे। जब उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी नामित सदस्य भी नहीं है। तीस दिन में जिस जांच को होनी थी, करीब दो माह बाद बीते छह सितंबर को ग्राम प्रधान और सचिव की अनुपस्थिति में छह बिंदुओं पर ग्रामीणों से मौखिक वार्ता किए। इसमें मृत लोगों को दिया गया शौचालय, ग्राम सभा में निवास न करने वाले विभिन्न जाति के लोगों की जानकारी दी गई। साथ ही कई अनियमितता के बारे में भी ग्रामीणों ने बताया। पुन: 13 सितंबर को जांच अधिकारी पहुंचे और ग्राम प्रधान औय सचिव की अनुपस्थिति में कोरोम पूर्ति में लगे रहे। यही नहीं और फाइल पढ़कर सुनाने लगे की कार्य पूरा है न, इस पर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराते हुए जांच बिंदु पर कार्रवाई सुनिश्चि करने की मांग करने लगे।
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