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अपने लाल की शहादत पर गांव गौरवान्वित
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Tue, 14 Apr 2015 11:33 PM IST
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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सोमवार को हुए नक्सली हमले में जिले के जवान जय प्रकाश पासवान और अलाउद्दीन की शहादत की खबर उनके गांव बाराचंवर और हुसैनपुर में पहुंचते ही सन्नाटा पसरा हुआ है। घरवालों को बेटे की शहादत पर बेहद फक्र था लेकिन अपने को खो देने का दर्द आंखों में आंसुओं के सैलाब के रूप में दिख रहा था। घर में कोहराम मचा था तो गांव में गम की चादर तनी थी। देर रात दोनों के शव पुलिस लाइन पहुंचे। जिले के गणमान्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। दोनों ही अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। ऐसे में उनकी मौत से परिजनों के आंखों में भविष्य की चिंता भी साफ दिख रही थी कि अब घर कैसे चलेगा।
सजना था जयप्रकाश पासवान के सिर सेहरा
करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के बाराचंवर गांव निवासी जयप्रकाश पासवान के नक्सली हमले में मौत की खबर आते ही हर कोई स्तब्ध रह गया। कहां तो पूरा परिवार बेटे के सिर पर सेहरा सजाने की तैयारी में था कि वहीं बेटे की मौत की खबर ने उनपर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। बाराचंवर गांव निवासी प्रेमचंद्र पासवान का पुत्र जयप्रकाश पासवान जून 2012 में जगदलपुर में छत्तीसगढ़ आर्म पुलिस फोर्स में भर्ती हुआ था। उसके तन पर वर्दी सजते ही परिवार के चेहरे पर खुशियां सज गई थी। परिवार को एक ही उम्मीद थी कि उनकी गरीबी काफी हद तक दूर हो जाएगी। चार भाइयों में सबसे बड़े जयप्रकाश की कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था। पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं। सिर छिपाने के नाम पर छप्पर का मकान है। सोमवार की रात करीब 9 बजे गांव के लल्लन शर्मा के मोबाइल पर जयप्रकाश के शहादत की सूचना आई। उसके जरिए जैसे ही परिवार तक ये सूचना पहुंची घर में कोहराम मच गया। ये खबर पाकर पास-पड़ोस के लोग भी मौके पर वहां पहुंचकर जयप्रकाश के परिवार को संभालने में जुट गए। इकलौते कमाऊ बेटे की को खोने वाले बाप के सामने अचानक चिंताओं का पहाड़ खड़ा हो गया कि अब उसके परिवार की गाड़ी कैसे चलेगी और तीन बेटियों के हाथ कैसे पीले होंगे। शहीद के तीन बहनें पूनम (22), भागमनी (16) और ज्योति (10) हैं। लाल की मौत से मां तेतरी देवी बेहाल है। जयप्रकाश की बिरनो थाना के फत्तेहपुर पलिया गांव निवासी हरिनारायण पासवान की पुत्री नीतू पासवान से शादी तय थी। सिर्फ तारीख तय करनी बाकी थी। अनवर की शहादत से मां अनजान
नोनहरा थाना क्षेत्र के हुसैनपुर गांव निवासी अनवर हुसैन का छोटा बेटा अलाउद्दीन शाह 2012-13 में सत्रहवीं वाहिनी सीएएफ आर्म फोर्स में कबीरधाम छत्तीसगढ़ में आरक्षण ट्रेड में जीडी में भर्ती हुआ था। उसके शहीद होने की खबर आते ही एक तरफ जहां परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं शहीद की मानसिक रूप से बीमार मां अपने लाल के मौत से अंजान होकर बिलख रहे परिवार के अन्य लोगों को महज देख रही थी। अलाउद्दीन शाह की नौकरी लगने पर परिवार के लोगों में इस बात की खुशी छा गई कि अब उनका बेटा उनकी गरीबी को पूरी तरह से दूर करेगा और अपनी मां नूरजहां का इलाज कराएगा। कमाऊ बेटे को लेकर परिवार के लोगों ने तरह-तरह के सपने संजो रखे थे। 15 फरवरी को छुट्टी लेकर अलाउद्दीन घर आया था। छुट्टी बिताने के बाद 19 फरवरी को छत्तीसगढ़ लौटा था। 12 अप्रैल को मोबाइल से पिता से बात कर मां के उपचार के संबंध में जानकारी लेने के साथ ही मकान के निर्माण के संबंध में बातचीत किया था। बेटे की नौकरी से पहले पिता अनवर हुसैन ठेले पर सब्जी बेचा करते थे। नौकरी मिलने के बाद बेेटे ने यह कहते हुए उन्हें सब्जी बेचने का काम बंद कर दिया कि वह परिवार का खर्च चलाएगा। बड़ा भाई मो. गुलाम शाह आर्मी में भर्ती होने की तैयारी कर रहा है। इकलौते कमाऊ बेटे की मौत ने परिवार से परिवार के लोगों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक तरफ जहां अन्य परिजन बिलख रहे थे, वहीं शहीद की मानसिक रूप से बीमार मां बिलख रहे परिवार के लोगों को अजीब नजरों से देख रही थी।
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सजना था जयप्रकाश पासवान के सिर सेहरा
करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के बाराचंवर गांव निवासी जयप्रकाश पासवान के नक्सली हमले में मौत की खबर आते ही हर कोई स्तब्ध रह गया। कहां तो पूरा परिवार बेटे के सिर पर सेहरा सजाने की तैयारी में था कि वहीं बेटे की मौत की खबर ने उनपर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। बाराचंवर गांव निवासी प्रेमचंद्र पासवान का पुत्र जयप्रकाश पासवान जून 2012 में जगदलपुर में छत्तीसगढ़ आर्म पुलिस फोर्स में भर्ती हुआ था। उसके तन पर वर्दी सजते ही परिवार के चेहरे पर खुशियां सज गई थी। परिवार को एक ही उम्मीद थी कि उनकी गरीबी काफी हद तक दूर हो जाएगी। चार भाइयों में सबसे बड़े जयप्रकाश की कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था। पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं। सिर छिपाने के नाम पर छप्पर का मकान है। सोमवार की रात करीब 9 बजे गांव के लल्लन शर्मा के मोबाइल पर जयप्रकाश के शहादत की सूचना आई। उसके जरिए जैसे ही परिवार तक ये सूचना पहुंची घर में कोहराम मच गया। ये खबर पाकर पास-पड़ोस के लोग भी मौके पर वहां पहुंचकर जयप्रकाश के परिवार को संभालने में जुट गए। इकलौते कमाऊ बेटे की को खोने वाले बाप के सामने अचानक चिंताओं का पहाड़ खड़ा हो गया कि अब उसके परिवार की गाड़ी कैसे चलेगी और तीन बेटियों के हाथ कैसे पीले होंगे। शहीद के तीन बहनें पूनम (22), भागमनी (16) और ज्योति (10) हैं। लाल की मौत से मां तेतरी देवी बेहाल है। जयप्रकाश की बिरनो थाना के फत्तेहपुर पलिया गांव निवासी हरिनारायण पासवान की पुत्री नीतू पासवान से शादी तय थी। सिर्फ तारीख तय करनी बाकी थी। अनवर की शहादत से मां अनजान
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नोनहरा थाना क्षेत्र के हुसैनपुर गांव निवासी अनवर हुसैन का छोटा बेटा अलाउद्दीन शाह 2012-13 में सत्रहवीं वाहिनी सीएएफ आर्म फोर्स में कबीरधाम छत्तीसगढ़ में आरक्षण ट्रेड में जीडी में भर्ती हुआ था। उसके शहीद होने की खबर आते ही एक तरफ जहां परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं शहीद की मानसिक रूप से बीमार मां अपने लाल के मौत से अंजान होकर बिलख रहे परिवार के अन्य लोगों को महज देख रही थी। अलाउद्दीन शाह की नौकरी लगने पर परिवार के लोगों में इस बात की खुशी छा गई कि अब उनका बेटा उनकी गरीबी को पूरी तरह से दूर करेगा और अपनी मां नूरजहां का इलाज कराएगा। कमाऊ बेटे को लेकर परिवार के लोगों ने तरह-तरह के सपने संजो रखे थे। 15 फरवरी को छुट्टी लेकर अलाउद्दीन घर आया था। छुट्टी बिताने के बाद 19 फरवरी को छत्तीसगढ़ लौटा था। 12 अप्रैल को मोबाइल से पिता से बात कर मां के उपचार के संबंध में जानकारी लेने के साथ ही मकान के निर्माण के संबंध में बातचीत किया था। बेटे की नौकरी से पहले पिता अनवर हुसैन ठेले पर सब्जी बेचा करते थे। नौकरी मिलने के बाद बेेटे ने यह कहते हुए उन्हें सब्जी बेचने का काम बंद कर दिया कि वह परिवार का खर्च चलाएगा। बड़ा भाई मो. गुलाम शाह आर्मी में भर्ती होने की तैयारी कर रहा है। इकलौते कमाऊ बेटे की मौत ने परिवार से परिवार के लोगों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक तरफ जहां अन्य परिजन बिलख रहे थे, वहीं शहीद की मानसिक रूप से बीमार मां बिलख रहे परिवार के लोगों को अजीब नजरों से देख रही थी।
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