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लागत भी नहीं निकल पा रहे सब्जी के किसान

Sat, 06 Jun 2020 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2020 10:21 PM IST
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Vegetable farmers are unable to recover the cost
लागत भी नहीं निकल पा रहे सब्जी के किसान
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गाजीपुर। लाकडाउन की लंबी अवधि और उसके बाद इन दिनों हुई बरसात ने हरी सब्जियों के कारोबार को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। स्थानीय स्तर पर साधन बंद हो जाने से सब्जियां बाहर नहीं भेजी जा सकी। इसके चलते स्थानीय स्तर पर भाव इतना गिर गया कि इसे औने-पौने दाम में बेचा जा रहा है। फायदा नहीं होने पर कुछ किसानों ने सब्जी की फसलों में ही हल चलवा दिया तथा नए फसल की बुआई में लग गए। सरकार की ओर से किसानों को पैकेज की घोषणा तो की गई लेकिन उसका कोई क्रियान्वयन नहीं दिखा। अंतत: सब्जी के किसान बर्बाद हो गए।

लाकडाउन के समय में खेतों में सब्जियों का उत्पादन तो होने लगा लेकिन साधन के अभाव में उन्हें मंडी तक नहीं भेजा जा सका। हालत यह हुई कि भिंडी, लतरा आदि पांच रुपए प्रति किलो पर आ गई। गरमी में परवल और करेला के भाव आसमान छूने लगते हैं वह दस रुपए किलो तक बिकने लगा। लौकी दस रुपए किलो तो मिर्चा पांच रुपए पाव पर आ गया। इसके अलावा सबसे दयनीय बात यह होती थी कि इतनी सस्ती सब्जियां भी पूरी तरह से नहीं बिकती थी। गरमी में फसलों को जिंदा रखने के लिए खेतों में पानी के रेट भी 140 रुपए प्रति घंटा बना हुआ था। अधिकतर सब्जी किसानों को पानी की कीमत भी नहीं मिल पाई। अनलाक वन के बाद भी अभी पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ है। सब्जियों के भाव में नाममात्र का उछाल तो हुआ है लेकिन बाहर भेजने तथा इनके आवक का क्रम अभी ठीक से शुरु नहीं हुआ है। इधर लगातार आई आंधी और बारिश ने सब्जियों की फसलों को नष्ट कर दिया। लगातार घाटा सह रहे किसानों ने मायूस होकर सब्जी के खेतों में हल भी चलवा दिया।
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