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शिक्षा से ही सशक्त होंगी महिलाएं
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जमानियां। महिलाएं सशक्त होंगी, तभी समाज सशक्त होगा। सोच में बदलाव से ही महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है। इसके लिए महिलाओं की शिक्षा, जागरूकता जरूरी है। अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत मंगलवार को महिला सशक्तीकरण पर आयोजित वेबिनार में महिलाओं ने ये बातें कहीं।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से महिलाएं सशक्त होंगी। महिलाएं किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। उन्हें बेहतर अवसर की जरूरत है। बेटियों को शिक्षित करें, ताकि बेटे-बेटियों में फर्क मिटाया जा सके। दस दौरान महिलाओं से संबंधित कानून के बारे में भी जानकारी दी गई। कहा कि महिलाओं की तरक्की से परिवार के साथ देश भी आगे बढ़ता है। इस दौरान सना परवीन और सौम्या त्रिपाठी ने महिला सुरक्षा पर सवाल किए। इनको महिला थाने और महिला पुलिसकर्मी से मदद लेने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में नारी सम्मान, महिला अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने एवं नारी शिक्षा को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में रुख्सार, मंजारी सिंह, माधुरी जायसवाल, शहाना परवीन, स्वाति सिंह, सविता राय, शीला देवी समेत 15 लोगों ने हिस्सा लिया।
कोट...
परिवार से लेकर काम करने की जगह तक महिलाओं को बराबर समझे जाने से महिलाओं के जीवन में बदलाव संभव है। - डॉ. प्रतिमा सिंह, पीजी कॉलेज, गाजीपुर।
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महिलाएं किसी से कम नहीं हैं, लेकिन अभी भी समाज में उनको उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। महिलाएं हक के लिए आगे आएं, इससे वे सशक्त होंगी। - डॉ. रुचि मूर्ति सिंह, पीजी कॉलेज गाजीपुर।
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महिलाएं अगर ठान लें, तो कुछ भी कर सकती हैं। बस उनको अवसर मिलना चाहिए। महिलाओं को अवसर का लाभ उठाना चाहिए। - डॉ. नीतू सिंह, हिंदू पीजी कॉलेज जमानिया
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महिलाओं की स्थिति में अभी और बदलाव की जरूरत है। महिलाओं को अभी भी घर तक ही सीमित मानने की सोच से ऊपर उठना होगा। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। - प्रियंका सिंह, पटकनियां गाजीपुर।
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नारी को अबला और दया का पात्र समझा जाता है। यह ठीक नहीं है। महिलाएं समाज को सभ्य बनाने से लेकर राष्ट्र को सभ्य नागरिक देती हैं। -श्वेता सिंह, रौजा गाजीपुर।
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लोकतांत्रिक देश में स्वच्छ और मजबूत सरकार बनाने में महिलाएं भी योगदान दे रही हैं। यह उनके सशक्त होने का उदाहरण है। -पूर्णिमा त्रिपाठी
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लोग बेटियों को शिक्षित करें ताकि आगे चल कर वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। इससे बेटे-बेटियों में फर्क मिटाने में भी मदद मिलेगी। - महजबीन
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महिलाएं पहले से सशक्त हुई हैं। वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं। इससे समाज में उनकी स्थिति में बदलाव आया है। उन्हें इसी तरह आगे बढ़ने की जरूरत है। - वंदना तिवारी
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वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से महिलाएं सशक्त होंगी। महिलाएं किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। उन्हें बेहतर अवसर की जरूरत है। बेटियों को शिक्षित करें, ताकि बेटे-बेटियों में फर्क मिटाया जा सके। दस दौरान महिलाओं से संबंधित कानून के बारे में भी जानकारी दी गई। कहा कि महिलाओं की तरक्की से परिवार के साथ देश भी आगे बढ़ता है। इस दौरान सना परवीन और सौम्या त्रिपाठी ने महिला सुरक्षा पर सवाल किए। इनको महिला थाने और महिला पुलिसकर्मी से मदद लेने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में नारी सम्मान, महिला अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने एवं नारी शिक्षा को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में रुख्सार, मंजारी सिंह, माधुरी जायसवाल, शहाना परवीन, स्वाति सिंह, सविता राय, शीला देवी समेत 15 लोगों ने हिस्सा लिया।
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कोट...
परिवार से लेकर काम करने की जगह तक महिलाओं को बराबर समझे जाने से महिलाओं के जीवन में बदलाव संभव है। - डॉ. प्रतिमा सिंह, पीजी कॉलेज, गाजीपुर।
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महिलाएं किसी से कम नहीं हैं, लेकिन अभी भी समाज में उनको उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। महिलाएं हक के लिए आगे आएं, इससे वे सशक्त होंगी। - डॉ. रुचि मूर्ति सिंह, पीजी कॉलेज गाजीपुर।
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महिलाएं अगर ठान लें, तो कुछ भी कर सकती हैं। बस उनको अवसर मिलना चाहिए। महिलाओं को अवसर का लाभ उठाना चाहिए। - डॉ. नीतू सिंह, हिंदू पीजी कॉलेज जमानिया
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महिलाओं की स्थिति में अभी और बदलाव की जरूरत है। महिलाओं को अभी भी घर तक ही सीमित मानने की सोच से ऊपर उठना होगा। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। - प्रियंका सिंह, पटकनियां गाजीपुर।
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नारी को अबला और दया का पात्र समझा जाता है। यह ठीक नहीं है। महिलाएं समाज को सभ्य बनाने से लेकर राष्ट्र को सभ्य नागरिक देती हैं। -श्वेता सिंह, रौजा गाजीपुर।
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लोकतांत्रिक देश में स्वच्छ और मजबूत सरकार बनाने में महिलाएं भी योगदान दे रही हैं। यह उनके सशक्त होने का उदाहरण है। -पूर्णिमा त्रिपाठी
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लोग बेटियों को शिक्षित करें ताकि आगे चल कर वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। इससे बेटे-बेटियों में फर्क मिटाने में भी मदद मिलेगी। - महजबीन
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महिलाएं पहले से सशक्त हुई हैं। वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं। इससे समाज में उनकी स्थिति में बदलाव आया है। उन्हें इसी तरह आगे बढ़ने की जरूरत है। - वंदना तिवारी
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