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चार वर्षों में एसटीपी के लिए नहीं मिली दो बीघा जमीन
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गंगा घाट पर बनाए जाने वाले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए लगभग दो बीघा की जमीन सैदपुर नगर पंचायत चार वर्षों में भी तलाश नहीं कर पाई है। लगभग ढाई वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी ने सैदपुर नगर में आकर इसके लिए जमीन तलाशने की कवायद की थी। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली में कोई तेजी नहीं आ सकी है।
सैदपुर के प्रमुख आठ घाटों में रंगमहल घाट, पकवा घाट, बूढ़े महादेव घाट, गाय घाट, मियां घाट, कोल्हुआ घाट, संगत घाट और सुभाष घाट हैं। जिनसे कुछ ही दूरी पर आठ अलग अलग नाले भी हैं। जिनके जरिए पूरे नगर का गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी चौबीसों घंटे गंगा में गिरकर उन्हे प्रदूषित कर रहा है। कचरा रोकने के लिए इन नालों में लगी लोहे की जालियां खुद ही कचरे से भरी पड़ी हैं। कचरा और आसपास की दुकानों का अवशेष भी नालों के जरिए गंगा में दिन रात समाहित हो रहा है। एनजीटी के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी डा. ओपी आर्य ने एसटीपी के लिए जमीन तलाशने की जिम्मेदारी जल निगम और नगर पंचायत को सौंपी थी। जल निगम ने परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेजा। लेकिन नगर पंचायत अभी तक एसटीपी के लिए दो बीघे जमीन की तलाश पूरी नहीं कर पाई है। जिससे यह कार्य अधर में लटका हुआ है।
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए हमें डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन को भेजनी होती है। इस कार्य के पहले हमें आवश्यक जमीन की तलाश पूरी कर लेनी है। काम जल्द ही शुरू होगा।
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आशुतोष त्रिपाठी, ईओ सैदपुर
गंगा को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। हम गंगा को साफ रखें और उनका सम्मान करें। गंगा की सफाई के नाम पर एसटीपी बनाने में की जा रही देरी निंदनीय है।- डा. पीएन सिंह
गंगा हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। हमारी अगली पीढ़ी को गंगा एक स्वच्छ उपहार के रूप में उपलब्ध हो सकें। इसके लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। - अवनीश चौबे
नालों के गंदे पानी को एसटीपी से शुद्ध करने के लिए बड़ी योजना बनानी चाहिए। गंगा में हमें अन्य प्रदूषण कारी चीजें फेंकने से बचना चाहिए।- प्रभुनाथ यादव
गंगा का प्रदषण खत्म करने में सरकार प्रयासरत है। इसके परिणाम दिखाई भी पड़ रहे हैं। लेकिन सैदपुर में इसकी गति काफी धीमी है। इसलिए लोग निराश हो रहे हैं।- नवीन अग्रवाल
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सैदपुर के प्रमुख आठ घाटों में रंगमहल घाट, पकवा घाट, बूढ़े महादेव घाट, गाय घाट, मियां घाट, कोल्हुआ घाट, संगत घाट और सुभाष घाट हैं। जिनसे कुछ ही दूरी पर आठ अलग अलग नाले भी हैं। जिनके जरिए पूरे नगर का गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी चौबीसों घंटे गंगा में गिरकर उन्हे प्रदूषित कर रहा है। कचरा रोकने के लिए इन नालों में लगी लोहे की जालियां खुद ही कचरे से भरी पड़ी हैं। कचरा और आसपास की दुकानों का अवशेष भी नालों के जरिए गंगा में दिन रात समाहित हो रहा है। एनजीटी के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी डा. ओपी आर्य ने एसटीपी के लिए जमीन तलाशने की जिम्मेदारी जल निगम और नगर पंचायत को सौंपी थी। जल निगम ने परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेजा। लेकिन नगर पंचायत अभी तक एसटीपी के लिए दो बीघे जमीन की तलाश पूरी नहीं कर पाई है। जिससे यह कार्य अधर में लटका हुआ है।
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सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए हमें डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन को भेजनी होती है। इस कार्य के पहले हमें आवश्यक जमीन की तलाश पूरी कर लेनी है। काम जल्द ही शुरू होगा।
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आशुतोष त्रिपाठी, ईओ सैदपुर
गंगा को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। हम गंगा को साफ रखें और उनका सम्मान करें। गंगा की सफाई के नाम पर एसटीपी बनाने में की जा रही देरी निंदनीय है।- डा. पीएन सिंह
गंगा हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। हमारी अगली पीढ़ी को गंगा एक स्वच्छ उपहार के रूप में उपलब्ध हो सकें। इसके लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। - अवनीश चौबे
नालों के गंदे पानी को एसटीपी से शुद्ध करने के लिए बड़ी योजना बनानी चाहिए। गंगा में हमें अन्य प्रदूषण कारी चीजें फेंकने से बचना चाहिए।- प्रभुनाथ यादव
गंगा का प्रदषण खत्म करने में सरकार प्रयासरत है। इसके परिणाम दिखाई भी पड़ रहे हैं। लेकिन सैदपुर में इसकी गति काफी धीमी है। इसलिए लोग निराश हो रहे हैं।- नवीन अग्रवाल