फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Tribal culture preserved by linking indigenous languages to education employment bilingual books

UP: स्वदेशी भाषाओं को शिक्षा-रोजगार से जोड़कर और द्विभाषी किताबों से बचेगी जनजातियों की संस्कृति

Sat, 18 Apr 2026 06:13 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 18 Apr 2026 06:13 AM IST
सार

Varanasi News: वसंत महिला महाविद्यालय में संथाली, मुंडारी और हो भाषाओं के विकास और संरक्षण के लिए डिजिटल और सांस्कृतिक नवाचार के लिए दो दिन का सम्मेलन शुरू हुआ है। इसके साथ ही जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रो. बिभूति भूषण मलिक ने इसका उद्घाटन किया था।

विज्ञापन
Tribal culture preserved by linking indigenous languages to education employment bilingual books
वसंत महिला महाविद्यालय में किताबों पर हुई चर्चा। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: राजघाट स्थित वसंत महिला महाविद्यालय में स्वदेशी भाषाओं को शिक्षा-रोजगार से जोड़कर और द्विभाषी किताबों से जनजाति संस्कृति को बचाने की कवायद हुई। शुक्रवार को संथाली, मुंडारी और हो भाषाओं के विकास और संरक्षण के लिए डिजिटल और सांस्कृतिक नवाचार पर 100 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। यूपी के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान और कर्नाटक के प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

विज्ञापन


डॉ. मनोहर कुमार दास ने बताया कि महिलाओं की मोबाइल और डिजिटल संसाधनों तक सीमित पहुंच भाषा संरक्षण के प्रयासों को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों ने स्वदेशी भाषाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने, द्विभाषी किताबों और जनजातीय भाषाओं को शिक्षण माध्यम में रखने की वकालत की। मुख्य अतिथि ओडिशा स्थित राजेंद्र विवि के कुलपति प्रो. विभूति भूषण मलिक ने कहा कि जनजातीय भाषाएं केवल बातचीत का माध्यम नहीं बल्कि समुदाय की पहचान, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अस्तित्व की आधारशिला हैं।

विज्ञापन

आईआईटी खड़गपुर के प्रो. हरे राम तिवारी और बीएचयू के प्रो. जय कांत तिवारी ने इसे एनईपी से जोड़कर आज की जरूरत बताया। सभागार में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से दो दिन के लिए आयोजित महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. अलका सिंह ने कहा कि यह संगोष्ठी जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी अकादमिक पहल है। प्रबंधक एसएन दुबे ने इसकी सामाजिक प्रासंगिकता बताई। संयोजक प्रो. जय सिंह ने समुदाय-आधारित प्रयासों, डिजिटल नवाचार और शिक्षा के समन्वय को जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के लिए जरूरी बताया। डॉ. प्रवीण कुमार ने इसे ज्ञान-विनिमय का सशक्त मंच बताया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed