गाजीपुर: अस्तित्व समाप्त होने तक सादात विधानसभा में हुए थे बारह चुनाव
आगामी विधानसभा के चुनाव की तिथि घोषित हो चुकी है। इस क्षेत्र के मतदाताओं को सादात विधानसभा का अस्तित्व समाप्त हो जाने के बाद अब जखनियां विधानसभा क्षेत्र में मताधिकार का अधिकार प्राप्त है। जखनिया विधानसभा में आने से पहले यहां के मतदाताओं ने सादात विधानसभा में अपने मताधिकार का प्रयोग करके जहां कई के सिर पर ताज बांधा, तो वहीं कई को नकार दिया।
सादात विधानसभा का गठन वर्ष 1967 में हुआ था। यहां पिछड़े और अनुसूचित जाति के मतदाताओं का बाहुल्य है। इन जातियों की बहुलता के बावजूद यहां से पहला विधायक होने का गौरव राजनाथ सिंह को प्राप्त हुआ था। उनकी पकड़ सभी जातियों में समान थी। लोकप्रियता के चलते उन्हें लगातार दूसरी बार 1969 के चुनाव में भी जीत हासिल हुई थी।
शुरूआती समय में इस विधानसभा का नंबर 240 था। यह सामान्य सीट थी, उस समय भी लोग महंगाई, बेरोजगारी, बिजली, पानी और खाद की किल्लत की बात करते थे और जनप्रतिनिधि उसे गंभीरता से लेते थे। सादात विधानसभा में कुल 12 चुनाव हुए। वर्ष 2007 के चुनाव के बाद इसको जखनिया और सैदपुर की विधानसभाओं में शामिल कर दिया गया था।
राजनाथ सिंह के अलावा यहां से कालीचरण यादव, रामधनी, रामनाथ मुंशी, गामाराम शास्त्री, भोनू सोनकर, बीजू पटनायक और अमेरिका प्रधान विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2007 के बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यह क्षेत्र जखनिया विधानसभा में शामिल था। उस चुनाव में सुब्बा राम सपा से विधायक निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2017 के बीते विस चुनाव में इस सीट से सुभासपा के प्रत्याशी त्रिवेणी राम ने बाजी मारी थी।