गाजीपुर। गंगा पूजन की डोलची और दउरा माथे पर लिए महिलाओं की टोली बुधवार की दोपहर कोरस में गंगा गुहार की गीत गाते चीतनाथ घाट की सीढ़ियां उतर रहीं थीं। घाट पर फूल- माला और लोगों के छोड़े गंदे कपड़े घाट की खूबसूरती को मुहं चिढ़ा रहे थे। महिलाएं घाट पर कम गंदगी वाले स्थान की तलाश करती रहीं, कुछ देर तक घाट का अवलोकन करने के बाद कम गंदगी वाले स्थान पर गंगा पूजने की तैयारियां शुरू की गई।
जिला मुख्यालय अंतर्गत चीतनाथ घाट पर फैली गंदगी से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इस स्थान की सफाई मकर संक्रांति के बाद से अब तक नहीं की गई है। घाट के किनारे रहने वाले रितेश कुमार ने बताया कि गंगा घाट की साफ-सफाई का कार्य केवल त्योहारों पर ही किया जाता है। नगर पालिका के कर्मचारी घाट के किनारे आते भी हैं तो सफाई के नाम पर गंदगी को गंगा में ही बहाते हैं। घाट की गंदगी को गंगा में डाल कर और प्रदूषित किया जाता है। कभी कभार अधिकारियों की मौजूदगी में जरूर गंगा तट पर गड्ढ़ा खोदकर उसमें गंदगी को डाला जाता है। अन्यथा नदी किनारे फूल-माला और लोगों के छोड़े कपड़े नपा की सफाई व्यवस्था को आइना दिखा रहे हैं। घाट पर फैली गंदगी के बावजूद आस्था में कोई कमी नहीं है। गंगा किनारे तैरती गंदगी को हटा लोग स्नान कर रहे हैं। ठंड में गंगा में डुबकी लगाते श्रद्धालु तेज स्वर में गंगा मैया की जयकारा लगाकर डुबकी लगाते हैं और गंगा से प्रार्थना करते हैं। यहां नावापुरा घाट से लेकर ददरी घाट, कलेक्टर घाट, गोलाघाट, पक्का घाट, पोस्ता घाट, मसुल, नकटवा, खिड़की घाट, इस्लामी घाट पर श्रद्घालु गंगा दर्शन को आते हैं, लेकिन यहां फैली गंदगी देख व्यथित हो जाते हैं। नवापुरा घाट से लेकर कलेक्टर घाट तक गंगा तट से करीब 100 मीटर दूर बह रही हैं। चीतनाथ घाट पर गंगा किनारे को स्पर्श करते हुए आगे बहती हैं।