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रौजा में है होम्योपैथिक मेडिकल कालेज, फिर भी सुविधाएं नदारद
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वारनगर पालिका क्षेत्र का सीमा विस्तार नहीं होने से शहर से सटे इलाके विकसित तो हुए हैं लेकिन वहां जलनिकासी, पेयजल, सड़क आदि सुविधाओं का अभाव हैं। आबाद हुई 12 कालोनियों में 75 विद्यालय, कोचिंग संस्थान और प्ले ग्रुप के स्कूल संचालित हो रहे हैं। रौजा इलाके में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज, निजी बस स्टैंड और कई विद्यालय हैं। यहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से बारिश के मौसम में मेडिकल कालेज परिसर में पानी भर जाता है जिससे विद्यार्थियों को परेशानी होती है। पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
रौजा इलाका सबसे व्यस्त इलाका है। यहां निजी बस स्टैंड होने की वजह से मरदह, जमानिया आदि इलाकों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। यहां राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के साथ ही 15 से अधिक विद्यालय, कोचिंग और प्ले ग्रुप के स्कूल हैं। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ ही स्कूलों में छोटे बच्चे पढ़ने आते हैैं। नगर पालिका क्षेत्र में यह इलाका शामिल नहीं होने के कारण पेयजल, सड़क, जलनिकासी आदि की सुविधाएं नहीं है। जलनिकासी न होने से बरसात के मौसम में हर वर्ष राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज परिसर में घुटने भर तक पानी भर जाता है। लंबे समय से पानी भरे रहने से मच्छरों का प्रकोप होता है और गंदगी फैली रहती है। इससे पढ़ाई बाधित रहती है। यही नहीं बस स्टैंड के आस-पास यात्रियों के बैठने एवं रुकने तक की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसकी कमी लोगों को अखरती है। इसी तरह खोआमंडी, कालीनगर, मिश्रवलिया, आलमपट्टी, जमानिया तिराहा सहित अन्य कॉलोनियों में विद्यालय, कोचिंग संस्थान के अलावा बड़े-बड़े प्रतिष्ठान भी स्थापित हैं, जहां रोजाना ही भीड़ की स्थिति बनी रहती है। कमोवेश यही हाल शहर से सटे अन्य कॉलोनियों का भी है, जहां शैक्षणिक संस्थान के साथ-साथ बड़े प्रतिष्ठान, अस्पताल और दुकान स्थापित हैं लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। ऐसे में यहां रहने वाले लोग कहने को तो शहरी परिक्षेत्र में रहते हैं लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है।
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रौजा इलाका सबसे व्यस्त इलाका है। यहां निजी बस स्टैंड होने की वजह से मरदह, जमानिया आदि इलाकों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। यहां राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के साथ ही 15 से अधिक विद्यालय, कोचिंग और प्ले ग्रुप के स्कूल हैं। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ ही स्कूलों में छोटे बच्चे पढ़ने आते हैैं। नगर पालिका क्षेत्र में यह इलाका शामिल नहीं होने के कारण पेयजल, सड़क, जलनिकासी आदि की सुविधाएं नहीं है। जलनिकासी न होने से बरसात के मौसम में हर वर्ष राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज परिसर में घुटने भर तक पानी भर जाता है। लंबे समय से पानी भरे रहने से मच्छरों का प्रकोप होता है और गंदगी फैली रहती है। इससे पढ़ाई बाधित रहती है। यही नहीं बस स्टैंड के आस-पास यात्रियों के बैठने एवं रुकने तक की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसकी कमी लोगों को अखरती है। इसी तरह खोआमंडी, कालीनगर, मिश्रवलिया, आलमपट्टी, जमानिया तिराहा सहित अन्य कॉलोनियों में विद्यालय, कोचिंग संस्थान के अलावा बड़े-बड़े प्रतिष्ठान भी स्थापित हैं, जहां रोजाना ही भीड़ की स्थिति बनी रहती है। कमोवेश यही हाल शहर से सटे अन्य कॉलोनियों का भी है, जहां शैक्षणिक संस्थान के साथ-साथ बड़े प्रतिष्ठान, अस्पताल और दुकान स्थापित हैं लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। ऐसे में यहां रहने वाले लोग कहने को तो शहरी परिक्षेत्र में रहते हैं लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है।
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