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िजले में मौसम ने दिखाए कई रूप झमाझम बारिश तो कहीं तेज धूप

Thu, 23 Jun 2022 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 11:30 PM IST
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The weather in the district has shown many forms of rain and strong sunshine
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बृहस्पतिवार की दोपहर में मानसून की पहली बारिश होने से लोगों को तेज धूप और गर्मी से राहत मिली है। कहीं रिमझिम तो कहीं झमाझम बारिश होने से मौसम सुहाना हो गया। शाम को ठंडी हवा के बीच लोग पार्क और खुले में आकर बैठकर लोग राहत भरी सांस ली। वहीं, कई क्षेत्रों में बारिश के दस्तक देने से किसान खुश भी नजर आ रहे हैं। क्योंकि धान की नर्सरी के लिए यह बारिश काफी कारगर साबित होगा। दूसरी ओर थोड़ी देर की बारिश ने कई जगहों में जल-जमाव की भी स्थिति पैदा कर दी। शहर के सहकारी कालोनी स्थित गांधी पार्क में शाम होते ही कॉलोनी वासियों का जमावड़ा हो गया। ऐसे ही न्यू इंदिरा नगर, आमघाट, चंदन नगर, स्टेशन रोड सहित अन्य जगहों पर लोग खुले में बैठकर गर्मी से निजात मिलने के साथ राहत भरी सांस ली।
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कासिमाबाद संवाददाता के अनुसार, लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को बृहस्पतिवार को हुई झमाझम बारिश से काफी राहत मिली है। वर्षा से जहां आम लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली है। दूसरी तरफ झमाझम बरसात से खेती-बारी के लिए वरदान साबित होगी। किसान अपने खेतों की जुताई के साथ धान, अरहर, मक्का के साथ बरसाती सब्जियों के बीज लगाना प्रारंभ हो जाएगा। रेवतीपुर संवाददाता में लगभग एक घंटा तक हुए गरज तड़क के साथ मुसलाधार बारिश से लोगों को थोड़ी राहत मिली है। वहीं, पहली बारिश में ही कई जगह पानी इकट्ठा हो गया। ब्लाक मुख्यालय जाने वाली सड़क पर जल-जमाव होने से लोगों को अवागमन में परेशानी हुई। दूसरी ओर, कल्याणपुर में बिजली गिरने से मुन्ना यादव की दो भैंस झुलस गई जिसमें एक की मौत हो गई जबकि दूसरे की हालत नाजुक है।
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मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार, स्थानीय नगर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में शाम को हुई मानसून की पहली झमाझम वारिस से तेज धूप और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली है। दिनभर तेज धूप रही और शाम को अचानक बादल छाया और बारिश होने लगी लेकिन इसका क्षेत्र काफी सीमित रहा। नगर में दो बार बारिश हुई जबकि नगर से सटे सलेमपुर, अदिलाबाद आदि गांवों मे बारिश नहीं हुई। करइल इलाके में हुई इस बरसात से खेती किसानी के लिए काफी लाभ मिलेगा। जहां-जहां भी बारिश हुई है वहां सूख रही धान की नर्सरी को जीवन दान मिल गया है।
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औड़िहार संवाददाता के अनुसार, अभी खुलकर बारिश नहीं होने से खेती पिछड़ रही है। जून का पहला पखवाड़ा बीतने के बाद बारिश कम होने से धान की खेती के लिए नर्सरी पिछड़ रही है। पशुओं को खिलाने के लिए चरी बोने का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। यहां के फसल चक्र के हिसाब से मक्का आलू और उसके बाद गेहूं की फसल लेने का उपक्रम आसाढ़ की वर्षा लेट होने से गड़बड़ा रहा है। देखा जाए तो असाढ़ की वर्षा जब समय से हो जाती है तो अगेती मक्का और उसमें मिलवा फसल के रूप में उर्द, तिल और बाजरा की खेती का इंतजाम बन जाता है। किसान मक्का की फसल लेकर उसके बाद आलू और फिर 70 दिन बाद उस में गेहूं की खेती करके यहां की जलवायु के मुताबिक खुशहाल होता है।
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