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घर के इकलौते बच्चे को बस ने रौंदा
ब्यूरो अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Wed, 29 Apr 2015 11:02 PM IST
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नंदगंज थाना क्षेत्र के देवकली बस स्टैंड पर बुधवार की सुबह सड़क पार करते समय प्राइवेट बस की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई। मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों के साथ ग्रामीणों ने गाजीपुर-वाराणसी राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। एसडीएम द्वारा आश्वासन दिए जाने पर एक घंटे बाद जाम समाप्त हुआ। जाम की वजह से मार्ग पर आवागमन करने वालों के दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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देवकली निवासी नागेंद्र उर्फ नारद प्रजापति का पुत्र अभिषेक प्रजापति (11) बुधवार की सुबह करीब नौ बजे अपनी मां लालमुनि देवी के साथ गाजीपुर में पट्टीदार के नवनिर्मित मकान के गृह प्रवेश में भाग लेने के लिए घर से निकला था। बाजार में वह सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान वाराणसी से गाजीपुर की तरफ जा रही एक प्राइवेट बस ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल होने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
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जानकारी मिलते ही नंदगंज पुलिस ने चालक सहित बस को पकड़ लिया। गुस्साए ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर गाजीपुर-वाराणसी मार्ग पर बाजार के पास चक्काजाम कर दिया। जाम की जानकारी होते ही नंदगंज थानाध्यक्ष संजय त्रिपाठी पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए और जाम कर रहे लोगों को समझाने में जुट गए, लेकिन ग्रामीण किसी सक्षम अधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
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सूचना मिलते ही सपा प्रदेश सचिव सुभाष यादव की पहल पर एसडीएम भानूप्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और पीडि़त परिवार को लोहिया आवास, आवासीय जमीन तथा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपया दिलवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने जाम समाप्त किया। करीब एक घंटा तक चले जाम की वजह से दोनों तरफ वाहनों का लंबी लाइन लग गई थी। जाम में फंसे लोग तीखी धूप से बेहाल थे। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई, जो परिवार के साथ यात्रा पर निकले थे। उन्हें गर्मी में उलझन के बीच जाम समाप्त होने का इंतजार करना पड़ा।
पूरे परिवार का था दुलरुआ
अभिषेक प्रजापति अपने माता-पिता का इकलौता संतान था। इसके कारण वह उनका दुलरुआ था। आज मां उसके साथ हंसी-खुशी एक मकान के गृह प्रवेश में भाग लेने के लिए उसे साथ लेकर घर से निकली थी। वह इस बात से पूरी तरह अंजान थी कि बाजार में मौत उसके लाल का इंतजार कर रही है। सड़क पार करते समय उसके आंखों के सामने ही उसके कलेजे के टुकड़े को रौंदती हुई बस आगे निकल गई। बेटे का शव देख मां लालमुनि देवी का कलेजा फटा जा रहा था। वह छाती पीटकर रो रही थी। घटना की जानकारी होते ही मृतक की बहनें सोनी (15) और आसना (13) भी मौके पर पहुंच गई। मृत भाई को देख उनकी आंखों से आंसुओं का सैलाब बहने लगा। लोगों द्वारा लाख सांत्वना देने के बाद भी मां और बहनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। हर कोई इस घटना के शोक में डूब गया।