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कोपभवन गई कैकेयी, श्रीराम का राज्याभिषेक रुका
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Mon, 12 Oct 2015 11:39 PM IST
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दशरथ ने जब पुत्र श्रीराम का राज्याभिषेक करने का निर्णय लिया तो नाराज होकर कैकेयी कोपभवन में चली गईं। सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और श्रीराम का राज्याभिषेक नहीं हो सका। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से रविवार की रात मंचित इस प्रसंग को देखकर दर्शक मुग्ध हो गए।
महाराजा दशरथ मंत्रियों से मंत्रणा कर बड़े पुत्र राम को राज्य सौंपकर खुद संन्यास लेने का निर्णय लेते हैं। कुलगुरु वशिष्ठ के सामने यह प्रस्ताव रखा गया। गुरुदेव की अनुमति पर अयोध्या में श्रीराम के राज्यभिषेक की तैयारी होती है। इसी बीच दासी मंथरा ने महारानी कैकेयी को यह जानकारी दी। श्रीराम को राज्य देने की सूचना से नाराज कैकेयी कोपभवन में चली गईं। इसकी जानकारी होने पर दशरथ कैकेयी के पास गए तो कैकेयी ने महाराज को दो वरदान मांगने के वचन की याद दिलाते हुए अयोध्या का राजपाठ अपने पुत्र भरत को देने और श्रीराम राम को वनवास भेजने के लिए कहा। इतना सुनने के बाद राज दशरथ मुर्छित होकर गिर जाते हैं। इस मार्मिक दृश्य को देख दर्शक भावविभोर हो गए। श्रीराम के जयकारे लगने लगे। इस अवसर पर अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकार तिवारी बच्चा, मेला प्रबंधक जैमिनिदत्त त्रिवेदी, उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी, सहायक प्रबंधक शिवपूजन तिवारी, अनुज अग्रवाल, सरदार बलवंत सिंह, सरदार दर्शन सिंह, ओमनारायण सैनी, मीडिया प्रभारी कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, रामनारायण पांडेय, अभय अग्रवाल, राजेंद्र विक्रम सिंह, सुधीर कुमार अग्रवाल, विजय कुमार मोदनवाल तथा कमेटी के सभी पदाधिकारी मौजूद थे।
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महाराजा दशरथ मंत्रियों से मंत्रणा कर बड़े पुत्र राम को राज्य सौंपकर खुद संन्यास लेने का निर्णय लेते हैं। कुलगुरु वशिष्ठ के सामने यह प्रस्ताव रखा गया। गुरुदेव की अनुमति पर अयोध्या में श्रीराम के राज्यभिषेक की तैयारी होती है। इसी बीच दासी मंथरा ने महारानी कैकेयी को यह जानकारी दी। श्रीराम को राज्य देने की सूचना से नाराज कैकेयी कोपभवन में चली गईं। इसकी जानकारी होने पर दशरथ कैकेयी के पास गए तो कैकेयी ने महाराज को दो वरदान मांगने के वचन की याद दिलाते हुए अयोध्या का राजपाठ अपने पुत्र भरत को देने और श्रीराम राम को वनवास भेजने के लिए कहा। इतना सुनने के बाद राज दशरथ मुर्छित होकर गिर जाते हैं। इस मार्मिक दृश्य को देख दर्शक भावविभोर हो गए। श्रीराम के जयकारे लगने लगे। इस अवसर पर अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकार तिवारी बच्चा, मेला प्रबंधक जैमिनिदत्त त्रिवेदी, उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी, सहायक प्रबंधक शिवपूजन तिवारी, अनुज अग्रवाल, सरदार बलवंत सिंह, सरदार दर्शन सिंह, ओमनारायण सैनी, मीडिया प्रभारी कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, रामनारायण पांडेय, अभय अग्रवाल, राजेंद्र विक्रम सिंह, सुधीर कुमार अग्रवाल, विजय कुमार मोदनवाल तथा कमेटी के सभी पदाधिकारी मौजूद थे।
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