{"_id":"618d49fc218d7708837a9531","slug":"the-fasting-women-prayed-for-happiness-and-prosperity-by-offering-arghya-to-the-rising-sun-ghazipur-news-vns6220412116","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्रती महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर की सुख और समृद्धि की कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्रती महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर की सुख और समृद्धि की कामना
विज्ञापन
दिलदारनगर गांव स्थित पोखरे में छठ पूजा करती महिलाएं। संवाद
- फोटो : GHAZIPUR
सूर्योपासना का प्रमुख पर्व डाला छठ बृहस्पतिवार की भोर में उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने का साथ ही संपन्न हो गया। भोर में साढ़े तीन बजे से ही व्रत महिलाएं छठ गीत गाती परिवार के सदस्यों के साथ गंगा घाटों और सरोवरों के घाटों पर पहुंचीं। बहुत से लोग गाजे-बाजे के साथ जा रहे थे। गंगा घाटों पर छठ गीत गूंजते रहे। महिलाएं उगी हे सुरुज देव भेल भिनसरवा... आदि गीत गाकर सूर्य से उगने की विनती कर रही थीं। सूर्योदय होते ही महिलाओं ने कमर तक पानी में खड़े रहकर अर्घ्य दिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर के ददरीघाट, कलेक्टर घाट, अंजही, नवापुरा, पोस्ताघाट, सिकंदरपुर, पत्थर घाट, स्टीमरघाट समेत अन्य घाटों पर जाने के लिए व्रती महिलाएं और उनके परिजन भोर में साढ़े तीन बजे से ही घरों से निकलने लगे। पांच बजते-बजते शहर के प्राय: सभी गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। घाटों पर पहुंची व्रती महिलाओं ने वेदी को गंगाजल से धोया। छह ईख को वेदी के पास लगाया। फिर दीपों में घी और बाती सजाकर उसे प्रज्ज्वलित कर पूजन-अर्चन शुरू किया। सूर्योदय से कुछ पहले ही व्रती महिलाएं पानी में सूप लेकर खड़ी हो गईं। सभी की निगाह सूर्यदेव की ओर थी। जैसे ही भगवान भाष्कर के दर्शन हुए श्रद्धालु उनका जयघोष करने लगे। इसके बाद दूध का अर्घ्य देने का क्रम शुरू हुआ। पुत्र एवं परिवार के अन्य सदस्यों सहित घाटों पर मौजूद लोगों ने व्रती महिलाओं को छह बार अर्घ्य दिया। समूह में मौजूद महिलाओं की ओर से गाए जाने वाले छठ मैया के गीत से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। कई गंगा घाटों पर समाजसेवियों की तरफ से भक्तों के लिए चाय, अर्घ्य देने के लिए नि:शुल्क दूध की व्यवस्था की गई थी।
मुहम्मदाबाद : क्षेत्र के बलुआ घाट, हरिहरपुर घाट, गौसपुर घाट, बड़कीधारा घाट, सुल्तानपुर घाट पर भोर में तीन बजे के बाद से व्रती महिलाओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। वेदी पर पूजन-अर्चन के बाद महिलाएं पानी में जाकर खड़ी हो गईं। सूर्योदय होते ही अर्घ्य देने का सिलसिला भी शरू हो गया। पूजा का कार्यक्रम संपन्न हो जाने के बाद लोग घाटों से घरों के लिए रवाना हुए। औड़िहार : भोर में क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु बाजे-गाजे के साथ घाटों पर पहुंचे थे। पुत्रों एवं परिवार के सदस्यों ने उदयाचल सूर्य को अर्घ्य दिया।
विज्ञापन
जमानिया : डाला छठ के अवसर पर व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। सादात : क्षेत्र में लोक आस्था का पर्व डाला छठ परंपरागत तरीके से उत्साह के साथ मनाया गया। इसी प्रकार जिले के रेवतीपुर, कासिमाबाद, मौधा, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, करंडा, खानपुर, दुल्लहपुर, मरदह, बिरनो, जंगीपुर, जखनिया, भीमापार, शादियाबाद, बहरियाबाद, सेवराई, दिलदारनगर, मतसा, देवकली, नंदगंज आदि ग्रामीण क्षेत्रों में डाला छठ पर्व पर घाटों एवं सरोवरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान व्रती महिलाओं ने पुत्र सहित परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही डाला छठ का उनका अनुष्ठान पूरा हो गया।
0
दीपों से रोशन हो उठे गंगा घाट
डाला छठ के आखिरी दिन भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महिलाओं ने दीप प्रज्ज्वलित किया। बहुत से श्रद्धालुओं ने प्रज्ज्वलित दीपों को गंगा में प्रवाहित भी किया। इसके अलावा लोगों ने आतिशबाजी भी की। इस दौरान दीपों की रौशनी और आतिशबाजी से गंगा घाट रोशन हो उठे। इस दौरान गंगा घाटों की अद्भुत छटा थी। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न गंगा घाटों का दृश्य देखते ही बन रहा था। मानो ऐसा लग रहा था जैसे आसमान से सितारे जमीं पर उतर आए हों। दर्जनों की संख्या में दीपों की रोशनी घाटों पर मौजूद लोगों का मन मोह रही थी। घाटों पर बिजली की झालरों से की गई सजावट देखते ही बन रही थी।
गंगा घाटों पर बच्चों एवं बड़ों की तरफ से जमकर आतिशबाजी की गई। भोर से शुरू हुआ सिलसिला घाट से घर लौटने तक जारी रहा। इस दौरान रोशनी करने वाले पटाखों के साथ ही तेज आवाज वाले पटाखों से धूम-धड़ाका किया गया।
0
लोगों ने एक-दूसरे से मांगा प्रसाद
गाजीपुर। गंगा घाटों पर भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के बाद पूजा का कार्यक्रम संपन्न होते ही प्रसाद मांगने की होड़ मच गई। घाटों पर महिलाएं, युवतियां, पुरुषों ने एक-दूसरे के पास जाकर प्रसाद मांगा। इस तरह का नजारा कई घाटों पर दिखाई दिया। लोगों ने उन लोगों को ठेकुआ, फल आदि प्रसाद दिया।
विज्ञापन
शहर के ददरीघाट, कलेक्टर घाट, अंजही, नवापुरा, पोस्ताघाट, सिकंदरपुर, पत्थर घाट, स्टीमरघाट समेत अन्य घाटों पर जाने के लिए व्रती महिलाएं और उनके परिजन भोर में साढ़े तीन बजे से ही घरों से निकलने लगे। पांच बजते-बजते शहर के प्राय: सभी गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। घाटों पर पहुंची व्रती महिलाओं ने वेदी को गंगाजल से धोया। छह ईख को वेदी के पास लगाया। फिर दीपों में घी और बाती सजाकर उसे प्रज्ज्वलित कर पूजन-अर्चन शुरू किया। सूर्योदय से कुछ पहले ही व्रती महिलाएं पानी में सूप लेकर खड़ी हो गईं। सभी की निगाह सूर्यदेव की ओर थी। जैसे ही भगवान भाष्कर के दर्शन हुए श्रद्धालु उनका जयघोष करने लगे। इसके बाद दूध का अर्घ्य देने का क्रम शुरू हुआ। पुत्र एवं परिवार के अन्य सदस्यों सहित घाटों पर मौजूद लोगों ने व्रती महिलाओं को छह बार अर्घ्य दिया। समूह में मौजूद महिलाओं की ओर से गाए जाने वाले छठ मैया के गीत से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। कई गंगा घाटों पर समाजसेवियों की तरफ से भक्तों के लिए चाय, अर्घ्य देने के लिए नि:शुल्क दूध की व्यवस्था की गई थी।
विज्ञापन
मुहम्मदाबाद : क्षेत्र के बलुआ घाट, हरिहरपुर घाट, गौसपुर घाट, बड़कीधारा घाट, सुल्तानपुर घाट पर भोर में तीन बजे के बाद से व्रती महिलाओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। वेदी पर पूजन-अर्चन के बाद महिलाएं पानी में जाकर खड़ी हो गईं। सूर्योदय होते ही अर्घ्य देने का सिलसिला भी शरू हो गया। पूजा का कार्यक्रम संपन्न हो जाने के बाद लोग घाटों से घरों के लिए रवाना हुए। औड़िहार : भोर में क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु बाजे-गाजे के साथ घाटों पर पहुंचे थे। पुत्रों एवं परिवार के सदस्यों ने उदयाचल सूर्य को अर्घ्य दिया।
विज्ञापन
जमानिया : डाला छठ के अवसर पर व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। सादात : क्षेत्र में लोक आस्था का पर्व डाला छठ परंपरागत तरीके से उत्साह के साथ मनाया गया। इसी प्रकार जिले के रेवतीपुर, कासिमाबाद, मौधा, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, करंडा, खानपुर, दुल्लहपुर, मरदह, बिरनो, जंगीपुर, जखनिया, भीमापार, शादियाबाद, बहरियाबाद, सेवराई, दिलदारनगर, मतसा, देवकली, नंदगंज आदि ग्रामीण क्षेत्रों में डाला छठ पर्व पर घाटों एवं सरोवरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान व्रती महिलाओं ने पुत्र सहित परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही डाला छठ का उनका अनुष्ठान पूरा हो गया।
0
दीपों से रोशन हो उठे गंगा घाट
डाला छठ के आखिरी दिन भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महिलाओं ने दीप प्रज्ज्वलित किया। बहुत से श्रद्धालुओं ने प्रज्ज्वलित दीपों को गंगा में प्रवाहित भी किया। इसके अलावा लोगों ने आतिशबाजी भी की। इस दौरान दीपों की रौशनी और आतिशबाजी से गंगा घाट रोशन हो उठे। इस दौरान गंगा घाटों की अद्भुत छटा थी। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न गंगा घाटों का दृश्य देखते ही बन रहा था। मानो ऐसा लग रहा था जैसे आसमान से सितारे जमीं पर उतर आए हों। दर्जनों की संख्या में दीपों की रोशनी घाटों पर मौजूद लोगों का मन मोह रही थी। घाटों पर बिजली की झालरों से की गई सजावट देखते ही बन रही थी।
गंगा घाटों पर बच्चों एवं बड़ों की तरफ से जमकर आतिशबाजी की गई। भोर से शुरू हुआ सिलसिला घाट से घर लौटने तक जारी रहा। इस दौरान रोशनी करने वाले पटाखों के साथ ही तेज आवाज वाले पटाखों से धूम-धड़ाका किया गया।
0
लोगों ने एक-दूसरे से मांगा प्रसाद
गाजीपुर। गंगा घाटों पर भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के बाद पूजा का कार्यक्रम संपन्न होते ही प्रसाद मांगने की होड़ मच गई। घाटों पर महिलाएं, युवतियां, पुरुषों ने एक-दूसरे के पास जाकर प्रसाद मांगा। इस तरह का नजारा कई घाटों पर दिखाई दिया। लोगों ने उन लोगों को ठेकुआ, फल आदि प्रसाद दिया।