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पुलिया पानी में डूबी, आवागमन हुआ जोखिम भरा
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गाजीपुर के सैदपुर क्षेत्र के निंदीपुर गांव से होकर गुजरने वाली गांगी नदी पर बनी छलका पुलिया बरसात के पानी से डूब गई है। इससे आवागमन प्रभावित हो गया है। पुलिया के दोनों तरफ रेलिंग भी नहीं है। लोग जान जोखिम में डालकर पैदल या साइकिल से पुलिया पार कर रहे हैं।
छलका पुलिया का निर्माण वर्ष 2004 में तत्कालीन पंचायती राज्यमंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने कराया था। इस पुलिया से निंदीपुर, राजापुर, हिराधरपुर, रामचरनपुर, खैरा, खजूरहट, डहराकला, रफीपुर, भद्रसेन, कैथवलिया, घुरेपुर गांव के लोगों का आवागमन होता है। लगभग पचास हजार की आबादी का सैदपुर मुख्यालय पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता है। पुलिया डूबने से आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनको जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ रहा है। आवागमन में जरा भी चूक घातक हो सकती है। लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष बारिश के दिनों में हिराधरपुर वनवासी बस्ती के एक व्यक्ति की इसी पुलिया से नदी में गिरकर मौत हो गई थी।
स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से होकर अपने घर और विद्यालय जाते हैं। क्षेत्र के जितेंद्र यादव ने बताया कि बारिश के दिनों में पुलिया हर वर्ष पानी में डूब जाती है। ऐसे में यहां लोगों को 10 से 15 किलोमीटर घूमकर सैदपुर मुख्यालय आना पड़ता है। पुल बनवाने के लिए प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक पत्रक दिया गया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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छलका पुलिया का निर्माण वर्ष 2004 में तत्कालीन पंचायती राज्यमंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने कराया था। इस पुलिया से निंदीपुर, राजापुर, हिराधरपुर, रामचरनपुर, खैरा, खजूरहट, डहराकला, रफीपुर, भद्रसेन, कैथवलिया, घुरेपुर गांव के लोगों का आवागमन होता है। लगभग पचास हजार की आबादी का सैदपुर मुख्यालय पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता है। पुलिया डूबने से आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनको जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ रहा है। आवागमन में जरा भी चूक घातक हो सकती है। लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष बारिश के दिनों में हिराधरपुर वनवासी बस्ती के एक व्यक्ति की इसी पुलिया से नदी में गिरकर मौत हो गई थी।
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स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से होकर अपने घर और विद्यालय जाते हैं। क्षेत्र के जितेंद्र यादव ने बताया कि बारिश के दिनों में पुलिया हर वर्ष पानी में डूब जाती है। ऐसे में यहां लोगों को 10 से 15 किलोमीटर घूमकर सैदपुर मुख्यालय आना पड़ता है। पुल बनवाने के लिए प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक पत्रक दिया गया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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