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नोटबंदी से होने वाली दिक्कत जारी
गाजीपुर
Updated Thu, 15 Dec 2016 10:25 PM IST
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महुआबाग स्थित यूनियन बैंक के एटीएम में और दुबिहां स्थित यूनियन बैंक में पैसा के लिए कतार में खड़ीं महिलाएं।
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नोटबंदी के करेंट का झटका लगातार जारी है। शहर के बैंकों में तो कुछ खास परेशानी नहीं रही, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में लेन-देन के लिए महिला-पुरुषों की कतार सुबह से लगी हुई थी। बारी-बारी से उपभोक्ताओं को दो-दो हजार रुपये का भुगतान किया गया। इससे जिन्हें अधिक पैसे की जरूरत थी, उनको निराशा होना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों में कैश ही नहीं पहुंचे थे, जिससे ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ी।
बीते आठ नवंबर को पीएम मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध करने की घोषणा के बाद आज भी लोग परेशान हैं। अपने ही पैसे के लिए लोगों को बैंकों और एटीएम पर घंटों परिश्रम करना पड़ रहा है। आलम यह है कि पहले पैसा मिल जाए, इसके लिए लोग खुलने से पहले ही बैंकों पर पहुंच जा रहे हैं। शहर के बैंकों में तो ग्राहकों की कोई खास दिक्कत नहीं हुई। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में ग्राहकों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ा। पैसा पाने के लिए महिला और पुरुषों की लाइन लगी रही। लाइन में खड़ा हर कोई पैसे के लिए बेताब दिखा। नंबर आने पर प्रत्येक उपभोक्ता दो हजार रुपये का वितरण किया गया। हालांकि इस पैसे को पाने के बाद उपभोक्ताओं ने ऐसा महसूस किया कि चलो मैंने करेंसी की जंग जीत ली, लेकिन जिन्हें अधिक पैसे की जरूरत थी, वह इस बात से मायूस दिखे कि एक तो काफी परिश्रम के बाद पैसा मिला, वह भी सिर्फ दो हजार। इस पैसे में वह बच्चों की फीस कैसे जमा करेंगे या घर का राशन कैसे खरीदेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों की हालत यह है कि खुलते ही इस बात की तख्ती टांग दी गई है कि पैसा नहीं है। अब-तब पैसा आने की आस में पूरे दिन ग्राहक बैंकों का चक्कर लगाते रहे हैं, लेकिन बैंक बंद होने तक कैश नहीं आया।
बीते आठ नवंबर को पीएम मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध करने की घोषणा के बाद आज भी लोग परेशान हैं। अपने ही पैसे के लिए लोगों को बैंकों और एटीएम पर घंटों परिश्रम करना पड़ रहा है। आलम यह है कि पहले पैसा मिल जाए, इसके लिए लोग खुलने से पहले ही बैंकों पर पहुंच जा रहे हैं। शहर के बैंकों में तो ग्राहकों की कोई खास दिक्कत नहीं हुई। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में ग्राहकों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ा। पैसा पाने के लिए महिला और पुरुषों की लाइन लगी रही। लाइन में खड़ा हर कोई पैसे के लिए बेताब दिखा। नंबर आने पर प्रत्येक उपभोक्ता दो हजार रुपये का वितरण किया गया। हालांकि इस पैसे को पाने के बाद उपभोक्ताओं ने ऐसा महसूस किया कि चलो मैंने करेंसी की जंग जीत ली, लेकिन जिन्हें अधिक पैसे की जरूरत थी, वह इस बात से मायूस दिखे कि एक तो काफी परिश्रम के बाद पैसा मिला, वह भी सिर्फ दो हजार। इस पैसे में वह बच्चों की फीस कैसे जमा करेंगे या घर का राशन कैसे खरीदेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों की हालत यह है कि खुलते ही इस बात की तख्ती टांग दी गई है कि पैसा नहीं है। अब-तब पैसा आने की आस में पूरे दिन ग्राहक बैंकों का चक्कर लगाते रहे हैं, लेकिन बैंक बंद होने तक कैश नहीं आया।
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