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सरकार की पहल से सुधरी है किसानों की स्थिति: सूर्यप्रताप शाही
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किसानों की आमदनी बढ़ाने की केंद्र और राज्य सरकार की पहल और नीतिगत बदलाव से किसानों की स्थिति सुधरी है। पहले बाजरा उत्पादन से इस जिले पहचान थी लेकिन लेकिन आज बैंगन, मिर्च, मटर, टमाटर और हरी सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। यहां का मटर बाहर निर्यात किया जा रहा। यहां के एक किसान ने केसर पैदा कर कृषि विशेषज्ञों की धारणा को बदल दिया है। ये बातें प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रविवार को बरहट में कृषि प्रगति एवं ग्रामीण विकास संस्था (फॉर्ड) फाउंडेशन व भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी की ओर से आयोजित किसान मेला व कृषि प्रदर्शनी ने कही।
उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को एसी तकनीक विकसित करनी होगी जिससे आसान और सस्ते कृ षि यंत्र उपलब्ध हो सकें। कहा, योगी सरकार ने करीब 800 करोड़ रुपये खर्च कर कृषि यंत्रों से प्रदेश के किसानों को सुसज्जित किया है। किसानों को जागरूक कर खेती के तौर-तरीकों को बदला जा सकता है। इसके लिए किसान पाठशाला शुरू की गई है। इसमें वैज्ञानिक और किसान संवाद के जरिये प्रदेश की खेती-किसानी बदली है। पीएम मोदी की मंशा के अनुरूप गेहूं और धान के अलावा मशरूम, दलहन और तिहलन की खेती पर जोर देने की जरूरत है। कहा, तेल की महंगाई इसलिए है क्योंकि देश बाहर से तिलहन खरीदता है। ऐसी ही स्थिति दालों की भी है। इसका रकबा बढ़ाकर ही इसकी महंगाई को रोका जा सकता है। देश में 10 फीसदी डीएपी का निर्माण होता है। बाकी 90 फीसदी अरब देशों से आता है। कोरोना के दौरान अरब के देशों में उत्पादन प्रभावित था। इसके चलते इस समय प्रति बोरी 2850 रुपये डीएपी उपलब्ध होती है। सरकार प्रति बोरी 1640 रुपये का बोझ सहकर किसानों को डीएपी भेज रही है।
कहा कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में यूपी में यूरिया पर 5 फीसदी का कर लगाया गया था जो 2017 तक लागू रहा। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उस टैक्स को खत्म किया गया जिससे किसानों को 350 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ रहा है। ऐसे ही प्रदेश में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री रहने के दौरान की लटकी सिंचाई परियोनाओं को लोकार्पण कराने का काम भाजपा सरकार में हुआ। पीएम मोदी ने 1977 के समय की सोनभद्र की अधूरी सिंचाई परियोजना का काम पूरा कराके लोगों को समर्पित करने का काम किया। कहा कि चंदौली में काला नमक चावल का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। काला नमक चावल को बुद्ध का प्रसाद होने से इसकी मांग भूटान और जापान में रहेगी जिससे विदेशों में काला नमक चावल का निर्यात किया जा सकेगा। इससे किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा। चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र में ऐसे बदलवा से किसानों को जोड़ने का काम फार्ड फाउंडेशन कर रहा है।
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इस मौके पर सहकारिता मंत्री संगीता बलवंत, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलाधिपति एवं फॉर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. पंजाब सिंह, कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू के पूर्व संकाय प्रमुख डा. आर एम सिंह, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशेक डा. जगदीश सिंह, वैज्ञानिक डा. नीरज सिंह ने संबोधित किया।
कालानमक की प्रजाति में होगा बदलाव
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एके सिंह ने कहा कि चावल की प्रजाति काला नमक में बदलाव कर उत्पादकता में सुधार लाई जाएगी। पहले एक हेक्टेयर में 20 क्विंटल काला नमक चावल का उत्पादन होता था। आज बौने किस्म की प्रजाति जिसकी लंबाई 80 सेमी रहती है। उसको बोने पर काला चावल की उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से 60 क्विंटल होती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय फैजाबाद के कुलपति डॉ. विजेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में बहुत सारे एफपीओ बन रहे हैं। उसके निर्माण के मध्य का दौर चल रहा है। कहा कि आज गेहूं और चावल के बजाय दलहन, तिलहन, मछली, दूध और मधुमक्खी पालन सबसे कारगर है। इससे किसान फायदे में रहने के साथ खेती का विविधिकरण होगा। किसी गांव में मधुमक्खी पालन बढ़ता है तो वहां की खेती की उर्वरता भी बढ़ जाती है। जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को एसी तकनीक विकसित करनी होगी जिससे आसान और सस्ते कृ षि यंत्र उपलब्ध हो सकें। कहा, योगी सरकार ने करीब 800 करोड़ रुपये खर्च कर कृषि यंत्रों से प्रदेश के किसानों को सुसज्जित किया है। किसानों को जागरूक कर खेती के तौर-तरीकों को बदला जा सकता है। इसके लिए किसान पाठशाला शुरू की गई है। इसमें वैज्ञानिक और किसान संवाद के जरिये प्रदेश की खेती-किसानी बदली है। पीएम मोदी की मंशा के अनुरूप गेहूं और धान के अलावा मशरूम, दलहन और तिहलन की खेती पर जोर देने की जरूरत है। कहा, तेल की महंगाई इसलिए है क्योंकि देश बाहर से तिलहन खरीदता है। ऐसी ही स्थिति दालों की भी है। इसका रकबा बढ़ाकर ही इसकी महंगाई को रोका जा सकता है। देश में 10 फीसदी डीएपी का निर्माण होता है। बाकी 90 फीसदी अरब देशों से आता है। कोरोना के दौरान अरब के देशों में उत्पादन प्रभावित था। इसके चलते इस समय प्रति बोरी 2850 रुपये डीएपी उपलब्ध होती है। सरकार प्रति बोरी 1640 रुपये का बोझ सहकर किसानों को डीएपी भेज रही है।
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कहा कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में यूपी में यूरिया पर 5 फीसदी का कर लगाया गया था जो 2017 तक लागू रहा। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उस टैक्स को खत्म किया गया जिससे किसानों को 350 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ रहा है। ऐसे ही प्रदेश में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री रहने के दौरान की लटकी सिंचाई परियोनाओं को लोकार्पण कराने का काम भाजपा सरकार में हुआ। पीएम मोदी ने 1977 के समय की सोनभद्र की अधूरी सिंचाई परियोजना का काम पूरा कराके लोगों को समर्पित करने का काम किया। कहा कि चंदौली में काला नमक चावल का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। काला नमक चावल को बुद्ध का प्रसाद होने से इसकी मांग भूटान और जापान में रहेगी जिससे विदेशों में काला नमक चावल का निर्यात किया जा सकेगा। इससे किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा। चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र में ऐसे बदलवा से किसानों को जोड़ने का काम फार्ड फाउंडेशन कर रहा है।
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इस मौके पर सहकारिता मंत्री संगीता बलवंत, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलाधिपति एवं फॉर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. पंजाब सिंह, कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू के पूर्व संकाय प्रमुख डा. आर एम सिंह, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशेक डा. जगदीश सिंह, वैज्ञानिक डा. नीरज सिंह ने संबोधित किया।
कालानमक की प्रजाति में होगा बदलाव
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एके सिंह ने कहा कि चावल की प्रजाति काला नमक में बदलाव कर उत्पादकता में सुधार लाई जाएगी। पहले एक हेक्टेयर में 20 क्विंटल काला नमक चावल का उत्पादन होता था। आज बौने किस्म की प्रजाति जिसकी लंबाई 80 सेमी रहती है। उसको बोने पर काला चावल की उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से 60 क्विंटल होती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय फैजाबाद के कुलपति डॉ. विजेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में बहुत सारे एफपीओ बन रहे हैं। उसके निर्माण के मध्य का दौर चल रहा है। कहा कि आज गेहूं और चावल के बजाय दलहन, तिलहन, मछली, दूध और मधुमक्खी पालन सबसे कारगर है। इससे किसान फायदे में रहने के साथ खेती का विविधिकरण होगा। किसी गांव में मधुमक्खी पालन बढ़ता है तो वहां की खेती की उर्वरता भी बढ़ जाती है। जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा।