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बांस की स्टिक से हाकी टीम बनाने वाले तेजबहादुर सिंह हुए द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए नामित
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मौधा। क्षेत्र के करमपुर गांव निवासी और मेघबरन सिंह स्पोर्ट्स एकेडमी के संस्थापक स्व. ठाकुर तेजबहादुर सिंह को द्रोणाचार्य अवार्ड दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक सराहनीय पहल की है। शासन के संयुक्त सचिव विनीत प्रकाश ने भारत सरकार के खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्रालय को बीते 25 जून को एक पत्र भेजा है। जिसमें हॉकी को अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्व. तेजबहादुर सिंह को द्रोणाचार्य अवार्ड -2021 के लिये नामांकित किए जाने की पुरजोर सिफारिश केंद्र सरकार से की गई है।
प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से स्व. ठाकुर तेजबहादुर सिंह का नाम द्रोणाचार्य अवार्ड-2021 के लिए भेेजे जाने से क्षेत्र के खेलप्रेमियों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। उनका कहना है कि जो पुरस्कार तेजबहादुर सिंह को जीते जी मिल जाना चाहिए था, उसकी पहल अब की जा रही है। जो कि नि:संदेह प्रशंसनीय है।
करीब 35 साल पहले करमपुर गांव निवासी ठाकुर तेजबहादुर सिंह ने बांस की स्टिक के सहारे गांव के बच्चों की हॉकी टीम खड़ी की थी, तब खुद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि उनका यह कदम सैकड़ों युवाओं की तकदीर संवारने वाला साबित होगा। उनके पिता के नाम से स्थापित किए गए मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम की नर्सरी से हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर सैकड़ों युवाओं ने न सिर्फ अपना जीवन संवारा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी गांव करमपुर और गुरु तेजबहादुर सिंह का नाम चमकाया। भारत में हॉकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे ललित उपाध्याय, राजकुमार पाल, अजीत पांडेय, करिश्मा सिंह, जमीला बानो, अनिल सिंह, अनिल राजभर, शशिकांत राजभर, उत्तम सिंह, स्वामी यादव, शैलेष यादव, जोखन पाल, बोनी सिंह, राजू पाल, संदीप सिंह आदि मेघबरन स्टेडियम की नर्सरी से ही निकले सितारे थे। जिन्हें तेजबहादुर सिंह के हाथों ही पुष्पित और पल्लवित होने का मौका मिला। हॉकी के प्रति तेजबहादुर सिंह के समर्पण को देख कर ही सरकार ने करमपुर के मेघबरन स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ लगाने का निश्चय किया और उसे पूरा भी किया।
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प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से स्व. ठाकुर तेजबहादुर सिंह का नाम द्रोणाचार्य अवार्ड-2021 के लिए भेेजे जाने से क्षेत्र के खेलप्रेमियों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। उनका कहना है कि जो पुरस्कार तेजबहादुर सिंह को जीते जी मिल जाना चाहिए था, उसकी पहल अब की जा रही है। जो कि नि:संदेह प्रशंसनीय है।
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करीब 35 साल पहले करमपुर गांव निवासी ठाकुर तेजबहादुर सिंह ने बांस की स्टिक के सहारे गांव के बच्चों की हॉकी टीम खड़ी की थी, तब खुद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि उनका यह कदम सैकड़ों युवाओं की तकदीर संवारने वाला साबित होगा। उनके पिता के नाम से स्थापित किए गए मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम की नर्सरी से हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर सैकड़ों युवाओं ने न सिर्फ अपना जीवन संवारा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी गांव करमपुर और गुरु तेजबहादुर सिंह का नाम चमकाया। भारत में हॉकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे ललित उपाध्याय, राजकुमार पाल, अजीत पांडेय, करिश्मा सिंह, जमीला बानो, अनिल सिंह, अनिल राजभर, शशिकांत राजभर, उत्तम सिंह, स्वामी यादव, शैलेष यादव, जोखन पाल, बोनी सिंह, राजू पाल, संदीप सिंह आदि मेघबरन स्टेडियम की नर्सरी से ही निकले सितारे थे। जिन्हें तेजबहादुर सिंह के हाथों ही पुष्पित और पल्लवित होने का मौका मिला। हॉकी के प्रति तेजबहादुर सिंह के समर्पण को देख कर ही सरकार ने करमपुर के मेघबरन स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ लगाने का निश्चय किया और उसे पूरा भी किया।
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